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Home विश्व

अमेरिका के बड़े शहरों पर डूबने का खतरा, एक सदी में एक बार आने वाली तबाही

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
December 3, 2025
in विश्व
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US cities are at risk of sinking
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नई दिल्ली। अमेरिका के उत्तर-पूर्वी हिस्से (न्यूयॉर्क, न्यू जर्सी, कनेक्टिकट, वर्जीनिया आदि) में पहले जो बाढ़ सौ साल में एक बार आती थी, वही बाढ़ अब सदी के अंत तक हर साल आने लगेगी. यह डरावनी बात एक नई वैज्ञानिक रिसर्च में सामने आई है. नवंबर 2025 में एक बहुत बड़ी वैज्ञानिक रिसर्च प्रकाशित हुई है.

यह रिसर्च अमेरिका के मशहूर प्रिंसटन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने की है. इसमें साफ कहा गया है कि जो बाढ़ पहले 100 साल में एक बार आती थी, वही बाढ़ साल 2100 तक हर साल आने लगेगी. इसके मुख्य लेखक हैं अमीरहोसैन बेगमोहम्मदी, जो सिविल इंजीनियर हैं.

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दो सबसे बड़ी वजहें

समुद्र का पानी बहुत तेजी से बढ़ रहा है… जलवायु परिवर्तन की वजह से ग्लेशियर और बर्फ पिघल रहे हैं. इससे समुद्र का स्तर हर साल ऊंचा होता जा रहा है. अगले 75 सालों में यह कई फीट तक बढ़ सकता है.

तूफान ज्यादा ताकतवर और ज्यादा बार आने लगे हैं… पहले के मुकाबले अब तूफान ज्यादा तेज हवाएं और ज्यादा बारिश ला रहे हैं. कुछ तूफान सीधे तट से टकराते हैं (जैसे 2012 का हरीकेन सैंडी), जो सबसे ज्यादा नुकसान करते हैं.

कंप्यूटर मॉडल ने दिखाया डरावना भविष्य

वैज्ञानिकों ने एक बहुत बड़ा कंप्यूटर मॉडल बनाया. इसमें हजारों काल्पनिक तूफान बनाए गए और समुद्र के बढ़ते पानी को भी जोड़ा गया. नतीजे कुछ इस तरह हैं…

  • 100 साल वाली बाढ़ – 2100 तक हर साल आएगी.
  • 500 साल वाली बाढ़ – अगर हम सुधार करे तो 60 साल में एक आएगी. हम कुछ नहीं कर पाए तो हर 20 साल में आएगी.
  • न्यूयॉर्क और बोस्टन जैसे शहरों में मुख्य खतरा समुद्र के पानी का बढ़ना है.
  • न्यू जर्सी और वर्जीनिया जैसे इलाकों में पानी का बढ़ना + तेज तूफान दोनों मिलकर तबाही मचाएंगे.

छोटे तूफान भी करेंगे बड़ा नुकसान

कनाडा के वैज्ञानिक जेफ ओलरहेड ने बताया कि भविष्य में बहुत छोटे-छोटे तूफान भी पहले जैसे बड़े तूफानों जितना नुकसान करेंगे.

उदाहरण: 2022 में कनाडा में आया तूफान फियोना ने 2 मीटर ऊंची लहरें लाई थीं. अगर समुद्र का स्तर 1 मीटर और बढ़ गया तो सिर्फ आधे ताकत वाला तूफान भी उतना ही नुकसान कर देगा. मतलब – पहले जो बाढ़ 100 साल में आती थी, अब हर 2-3 साल में घरों में पानी घुस जाएगा.

सबसे बड़ा सवाल – हम क्या करेंगे?

वैज्ञानिकों ने कहा कि प्रकृति का व्यवहार तो समझ में आ गया है, लेकिन सबसे बड़ी अनिश्चितता इंसानों की है. दुनिया के नेता कार्बन उत्सर्जन (कोयला, पेट्रोल, फैक्ट्री का धुआं) कम करने में कितने गंभीर होंगे – यही तय करेगा कि हालत कितनी खराब होगी.

अब बचने के लिए क्या करना होगा?

  • घरों को ऊंची और पीछे की जगह पर ले जाना – समुद्र तट से दूर और ऊंचाई पर नए घर बनाना.
  • नई इमारतों के नियम बदलना – अभी जो नियम 100 साल वाली बाढ़ के हिसाब से बने हैं, उन्हें तुरंत बदलना होगा.
  • पुरानी इमारतों को मजबूत करना – ऊंचा प्लेटफॉर्म बनाना, पानी रोकने की दीवारें लगाना.
  • प्राकृतिक सुरक्षा बचाना – बीच पर रेत के टीले, मैंग्रोव जंगल और दलदल को बचाना पड़ेगा.
  • हर शहर को नया बाढ़ नक्शा बनाना – जो बताए कि अब कहां पानी आएगा.

वैज्ञानिकों का साफ कहना है…

आज की 100 साल वाली बाढ़ कल की हर साल वाली बाढ़ बन जाएगी. अगर हम अभी नहीं जागे तो 50-60 साल बाद हमारे बच्चे हर साल बाढ़ में डूबते घर देखेंगे. अब भी वक्त है – पेड़ लगाइए, बिजली-पेट्रोल बचाइए, सरकारों पर दबाव डालिए कि जलवायु परिवर्तन को गंभीरता से लें.

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