मॉस्को: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन आज यानी 4 दिसंबर को भारत की धरती पर लैंड करने वाले हैं. पीएम मोदी खुद उन्हें रिसीव करने जाएंगे. इसके बाद 5 दिसंबर का दिन भारत-रूस के रिश्तों में नया चैप्टर लिखने वाला है. शुक्रवार को पीएम मोदी और पुतिन कई तगड़ी डील्स साइन करने वाले हैं. ये सारी डील्स ऐसे मौके पर होने वाली हैं, जब भारत-रूस के रिश्ते टैरिफ की मार झेल रहे हैं. बात करें तो अर्थव्यवस्था की तो भारत, रूस से बहुत आगे है. यह दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती हुई प्रमुख अर्थव्यवस्था है और रूस की कुल GDP भारत से लगभग आधी है.
दुनिया ने देखी India की पावर
ट्रंप लंबे समय से भारत-रूस के रिश्ते तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं और ऐसे मुश्किल वक्त में पुतिन भारत के साथ रिश्ते और मजबूत करने आ रहे हैं.
अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने के लिए भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ की पेनल्टी लगा दी थी लेकिन फिर भी भारत की जीडीपी में तरक्की देखने को मिली. वित्त मंत्रालय के मुताबिक कि जुलाई से सितंबर की तीसरी तिमाही में भारत का जीडीपी ग्रोथ रेट 8.2 प्रतिशत रहा.
Russia GDP का क्या है हाल?
इसके अलावा दुनिया की सबसे पावरफुल अर्थव्यवस्थाओं में भारत चौथी पोजीशन पर आकर खड़ा हो गया है. 2025 में ये जगह जापान से छिन गई है और अब देश दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर कदम बढ़ा रहा है. इस लिस्ट में रूस नौंवे नंबर पर आता है. मुश्किल हालातों में भी भारत की कुल GDP 4.3 ट्रलियन डॉलर है.जबकि रूस की GDP भारत से लगभग आधी यानी 2.54 ट्रिलियन डॉलर पर टिकी है.
वरदान ही कैसे बन गया श्राप
रूस की अर्थव्यवस्था लगभग पूरी तरह सीधे प्राकृतिक संसाधनों, विशेष रूप से कच्चे तेल और गैस पर निर्भर है. पुतिन की की देश की इकोनॉमी का 60% हिस्सा तब प्रभावित हो जाता है तेल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिरती हैं. इसका सीधा आसर रूस की कुल आमदनी पर पड़ता है और यहां की जीडीपी बुरी तरह से गिर जाती है. रूस को जीडीपी बढ़ाने के लिए तेल की कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल की जरूरत होती है, जो जंग के हालातों में कतई संभव नहीं है. यहां पर टेक्नोलॉजी, हाई-वैल्यू मैन्युफैक्चरिंग जैसे अन्य उद्योग किसी काम के नहीं है, इन्हीं वजहों से रूस की अर्थव्यवस्था कमजोर पड़ जाती है.







