नई दिल्ली। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन मंगलवार शाम करीब 4:30 बजे भारत पहुंच रहे हैं और दिल्ली उनके स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार है. यह दो दिवसीय दौरा कई मायनों में बेहद अहम माना जा रहा है. खासकर इसलिए क्योंकि यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद यह पुतिन का पहला भारत दौरा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पुतिन की मुलाकात सिर्फ भारत और रूस ही नहीं बल्कि अमेरिका और चीन सहित पूरी दुनिया की नजर में है.
अमेरिका लंबे समय से चाहता है कि भारत रूस से दूरी बनाए, खासकर ऊर्जा और व्यापार के मामले में. हाल ही में ट्रंप प्रशासन की टैरिफ नीति ने इस दबाव को और बढ़ाया है. अमेरिका भारत पर यह दबाव डाल रहा है कि वह रूस पर निर्भरता कम करे. लेकिन भारत ने साफ कर दिया है कि वह अपने हितों के आधार पर ही फैसले लेगा. ऐसे में यह दौरा एक महत्वपूर्ण संकेत है कि भारत अपनी रणनीतिक स्वतंत्रता बनाए रखेगा.
पुतिन के दौरे पर क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?
भारत और रूस का रक्षा सहयोग दशकों पुराना और बेहद मजबूत है. यही वजह है कि पश्चिमी देशों में चिंता बनी रहती है. यूक्रेन युद्ध के बाद ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने रूस का खुला विरोध किया है और ऐसे माहौल में मोदी पुतिन मुलाकात पश्चिमी देशों की चुभन का कारण बनी हुई है. अमेरिका के सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह दौरा वॉशिंगटन के लिए ‘अनकम्फर्टेबल’ है. इंडो-पैसिफिक सिक्योरिटी प्रोग्राम की डायरेक्टर लीसा कर्टिस ने IANS से कहा कि ‘अमेरिका को यह मीटिंग मददगार नहीं लगेगी, क्योंकि यह ऐसे समय में हो रही है जब पुतिन यूक्रेन में अपनी लड़ाई और तेज कर रहे हैं और यूरोप को ड्रोन व साइबर हमलों की धमकी दे रहे हैं.’ कर्टिस ने साफ कहा कि भारत किसी राजनीतिक दबाव में नहीं आएगा और यह अमेरिका के लिए एक कूटनीतिक संदेश है. भारत अमेरिका के दबाव में नहीं झुकेगा. ना ही नई दिल्ली अपनी रणनीतिक स्वतंत्रता को छोड़ेगा.
अमेरिका किन चीजों पर रखेगा नजर?
ब्रूकिंग्स इंस्टिट्यूशन की तन्वी मदान के मुताबिक अमेरिका इस दौरे के दो पहलुओं पर गहरी नजर रखेगा. पहला, भारत पुतिन को किस स्तर का सेरेमोनियल सम्मान देता है. दूसरा, रक्षा और ऊर्जा से जुड़े फाइनल परिणाम क्या निकलते हैं? मदान के अनुसार, अमेरिका यह भी देखेगा कि भारत रूस से तेल आयात को किस स्तर पर जारी रखता है. आंकड़ों पर बारीकी से नजर रखी जाएगी.
पुतिन के भारत दौरे से चीन अलर्ट
उधर चीन भी इस मुलाकात को लेकर सतर्क है. चीन और रूस के संबंध पहले से ही मजबूत हैं और ऐसे में पुतिन का भारत आना एशिया की रणनीतिक तस्वीर में एक बड़ा संकेत माना जा रहा है. चीनी और अमेरिकी मीडिया इस मुलाकात को लगातार कवर कर रहे हैं. कई विश्लेषकों का मानना है कि यह मुलाकात सिर्फ द्विपक्षीय एजेंडा नहीं बल्कि बड़े भू-राजनीतिक संदेश का हिस्सा है. भारत पश्चिमी दबाव के बीच अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखे हुए है और यह दौरा उस नीति की एक और मिसाल है. दुनिया की नजरें आज इस बात पर होंगी कि मोदी और पुतिन की मुलाकात में युद्ध, ऊर्जा, व्यापार और सुरक्षा पर कौन से निर्णय निकलते हैं और अमेरिका की प्रतिक्रिया क्या होती है.







