नई दिल्ली। बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के लिए स्थितियां बेहद भयावह हो चुकी हैं। पिछले महज 18 दिनों के भीतर छह हिंदुओं की योजनाबद्ध तरीके से हत्या कर दी गई है। सोमवार (5 जनवरी 2026) को नरसिंग्दी में एक किराना दुकानदार और जेसोर में एक पत्रकार की सरेआम हत्या ने सुरक्षा दावों की पोल खोल दी है।
मरने वालों में शामिल शरत चक्रवर्ती ने अपनी हत्या से कुछ दिन पहले ही सोशल मीडिया पर देश को ‘मौत की घाटी’ करार दिया था। एक के बाद एक हो रही इन नृशंस वारदातों ने पूरे देश में दहशत और असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया है।
31 दिसंबर 2025: नए साल की पूर्व संध्या पर खोकन दास को जिंदा जलाया
हिंसा के इस खौफनाक सिलसिले में सबसे विचलित करने वाली घटना साल के आखिरी दिन हुई। हमलावरों ने खोकन दास पर पेट्रोल छिड़ककर उन्हें जिंदा जला दिया। खुद को बचाने के लिए वह पास के तालाब में कूद गए, लेकिन गंभीर रूप से झुलसने के कारण ढाका के अस्पताल में उन्होंने दम तोड़ दिया। इस घटना ने साफ कर दिया कि अपराधियों के मन में कानून का कोई खौफ नहीं बचा है।
19 दिसंबर 2025: शरत चक्रवर्ती की वो ‘भविष्यवाणी’ और खौफनाक सच
दिसंबर के मध्य में स्थिति बिगड़ती देख नरसिंग्दी के शरत चक्रवर्ती मणि ने फेसबुक पर एक भावुक पोस्ट लिखी थी। उन्होंने अपनी जन्मभूमि को ‘डेथ वैली’ (मौत की घाटी) बताया था। दुर्भाग्यवश, उनकी यह आशंका सच साबित हुई जब सोमवार रात उनकी अपनी दुकान में घुसकर अज्ञात हमलावरों ने धारदार हथियारों से उनकी जान ले ली। यह हत्या अल्पसंख्यकों की बढ़ती असुरक्षा का सबसे बड़ा प्रमाण बन गई है।
5 जनवरी 2026 (दोपहर): जेसोर में पत्रकार राणा प्रताप की सरेआम हत्या
सोमवार की दोपहर जेसोर के मोनीरामपुर में हमलावरों ने दुस्साहस का परिचय दिया। ‘दैनिक बीडी खबर’ के संपादक और व्यवसायी राणा प्रताप बैरागी को उनकी बर्फ फैक्ट्री से बाहर बुलाया गया और एक सुनसान गली में ले जाकर सिर में गोली मार दी गई। दिनदहाड़े हुई इस हत्या ने साबित कर दिया कि अब न तो व्यवसायी सुरक्षित हैं और न ही सच्चाई लिखने वाले पत्रकार।
5 जनवरी 2026 (रात): नरसिंग्दी में 18 दिनों में छठी मौत का तांडव
जेसोर की वारदात के कुछ ही घंटों बाद, रात के अंधेरे में नरसिंग्दी जिले के चरसिंदूर बाजार में शरत चक्रवर्ती को निशाना बनाया गया। 18 दिनों के भीतर यह छठी हिंदू हत्या थी। स्थानीय मीडिया और निवासियों का कहना है कि प्रशासन की चुप्पी और ठोस कार्रवाई का अभाव हमलावरों को शह दे रहा है। बांग्लादेश (Bangladesh violence news Hindi) का हिंदू समाज अब अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से सुरक्षा की गुहार लगा रहा है।







