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Home लाइफस्टाइल

डायबिटीज के टाइम बम पर भारत!

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
January 14, 2026
in लाइफस्टाइल, विशेष, स्वास्थ्य
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diabetes
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नई दिल्ली: भारत डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर के टाइम बम पर खड़ा है. लेंसेट इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में लगभग 10 करोड़ लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं. 2030 तक यह आंकड़ा दोगुना होने की आशंका है. अब नेचर जर्नल में प्रकाशित एक नई रिपोर्ट ने बेहद भयावह भविष्यवाणी की है. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि अगले 30 सालों में यानी मोटा-मोटी 2050 तक डायबिटीज देश के लिए इतना परेशान करने वाला होगा कि यह देश पर अर्थव्यवस्था का दूसरा सबसे बड़ा बोझ बन जाएगा.

रिपोर्ट में क्या है

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इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर एप्लायड सिस्टम एनालिसिस और वियना यूनिवर्सिटी ऑफ इकोनोमिक्स ने मिलकर 204 देशों मे डायबिटीज के बर्डन को लेकर यह अध्ययन किया है. इसी अध्ययन में बताया गया है कि डायबिटीज के कारण अगले 30 सालों में दुनिया की अर्थव्यवस्था पर 10 ट्रिलियन डॉलर का बोझ बढ़ने वाला है. 1 ट्रिलियन एक हजार अरब होता है. इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह कितना बड़ा बोझ है. रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका, भारत और चीन पर डायबिटीज का सबसे ज्यादा खर्च होने वाला है. डायबिटीज़ से होने वाला सबसे बड़ा आर्थिक बोझ संयुक्त राज्य अमेरिका पर होगा जहां यह 2.5 ट्रिलियन डॉलर खर्च होगा. इसके बाद भारत को इस पर 1.6 ट्रिलियन डॉलर खर्च करना होगा और चीन को 1 ट्रिलियन डॉलर खर्च करना होगा.

कैसे साल दर साल बढ़ रहे हैं केस

दो-तीन दशक पहले भारत में सिर्फ कॉलरा, टायफॉयड, डेंगू मलेरिया जैसी इंफेक्शन वाली बीमारियों के बारे में ही चर्चा होती थी. डायबिटीज के बारे में तो अधिकांश लोग जानते भी नहीं थे लेकिन 2000 के बाद जब शहरीकरण ने तेजी से अपना पैर पसारना शुरू कर दिया, नॉन-कम्युनिकेबल बीमारियों की बाढ़ आ गई है. भारतीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक अचानक 2000 में डायबिटीज के 3.2 करोड़ मरीज सामने आ गए. 2007 में यह दोगुना हो गया.

2017 में सरकारी आंकड़ों के मुताबिक भारत में डायबिटीज मरीजों की संख्या बढ़कर 7.3 करोड़ हो गई. फिलहाल यह माना जाता है कि भारत में 10 करोड़ लोग डायबिटीज की बीमारी से पीड़ित हैं लेकिन 10 करोड़ से कहीं ज्यादा प्री-डायबिटीज के शिकार हैं. यह आंकड़ा तो बहुत कम है, असली चिंता इस बात की है कि भारत में अधिकांश लोगों को पता ही नहीं कि उन्हें डायबिटीज की बीमारी है. यही कारण है नेचर जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन हम सब के लिए आंख खोलने वाला है.

क्यों बढ़ रहे हैं डायबिटीज के मामले

परंपरागत भोजन में कमी-1960 से 70 के दशक तक भारतीयों का भोजन एकदम शुद्ध अनाज पर आधारित था. रिफाइंड, कृत्रिम रुप से बने भोजन, पैकेटबंद फूड, प्रोसेस्ड फूड न के बराबर था. इसमें फाइबर की मात्रा अधिक होती थी जिसके कारण कई क्रोनिक बीमारियों का खतरा कम रहता था. लेकिन औद्योगिकरण के बाद चावल और गेहूं पॉलिस्ड होने लगा जिसके बाद फाइबर की मात्रा में कमी आने लगी. वहीं रिफाइंड और तेल का प्रयोग ज्यादा होने लगा. इस कारण से हमारे परंपरागत भोजन में कटौती आने लगी.

प्रोसेस्ड फूड-पिछले दो दशक से लोगों के भोजन में प्रोसेस्ड और रिफाइंड फूड का चलन बढ़ा है. रिफाइंड तेल, चीनी, चीज, बटर, मैदा से बनी चीजें आदि खूब खाया जाने लगा है. हर दिन पिज्जा, बर्गर, सॉफ्ट ड्रिंक, सोडा, बिस्किट, चॉकलेट आदि लोगों के जीवन का हिस्सा बनने लगे हैं. अधिकांश चीजों में इन प्रोसेस्ड चीजों को इस्तेमाल होता है और इसे हम खाते हैं. ये प्रोसेस्ड चीजें डायबिटीज, शुगर आदि बीमारियों का सबसे बड़ा कारण है.

फिजिकल एक्टिविटी में कमी-शारीरिक रूप से सक्रिय न होना इन क्रोनिक बीमारियों की बहुत बड़ी वजह है. पहले के लोग हमेशा किसी न किसी तरह के काम में लगे रहते थे. गांवों में खेतों में काम में पूरा परिवार लगा रहता था. मशीनों का इस्तेमाल बहुत कम होता था. लेकिन आज लोगों के पास समय का बहुत अभाव है. अधिकांश लोग ऑफिस में चेयर पर बैठकर काम करते हैं. सुबह से लेकर शाम तक की ड्यूटी होती है जिनकी वजह से समय नहीं मिल पाता. वहीं शहरीकरण शारीरिक गतिविधियों को और अधिक प्रभावित किया है. जब तक आप शारीरिक गतिविधियां नहीं करेंगे डायबिटीज, हार्ट डिजीज, हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों का खतरा नहीं घटेगा.

तनाव और डिप्रेशन-आधुनिकरण के बाद लोगों में तनाव और डिप्रेशन की समस्या काफी बढ़ गई है. लोगों के उपर काम का बोझ बहुत ज्यादा रहता है जिसके कारण उनके उपर दबाव बहुत अधिक होता है. वहीं लोगों की महत्वाकांक्षा बहुत बढ़ गई जिसके कारण वह उन चीजों को पाने के लिए वह किसी भी बद तक जाने के लिए तैयार रहते हैं. तनाव के कारण शरीर में खतरनाक केमिकल की बाढ़ जाती है जो कई क्रोनिक बीमारियों की वजह बनती है.

पॉल्यूशन-क्रोनिक बीमारियों के बढ़ने की बड़ी वजह पॉल्यूशन भी है. औद्योगिकीकरण के बाद लाखों फैक्ट्रियों से खतरनाक रसायन निकल रहे हैं जो हवा में घुलकर हमारी सांसों में आते हैं और हमें बीमार करते हैं.

फिर इन बीमारियों से कैसे छुटकारा पाएं

इस विषय पर जब हमने मोरेंगो एशिया अस्पताल में डायबेट्स एंड मेटाबोलिक डिसॉर्डर के डायरेक्टर डॉ. पारस अग्रवाल से बात की तो उन्होंने कहा कि डायबिटीज के खतरे को टालना बहुत आसान है. बस जो चीजें डायबिटीज के जोखिम को बढ़ाता है, उन्हें अपने जीवन से निकाल दीजिए. पुराने वाली लाइफस्टाइल अपना लीजिए. जैसा हमारे पूर्वज खाते-पीते और रहते थे, वैसा जीवन अपना लीजिए. मसलन शुद्ध अनाज, हरी सब्जियां, दाल, फल, सीड्स आदि का सेवन कीजिए.

आज की जितनी खाने पीने की चीजें और वो प्रोसेस्ड है, उन्हें मत खाइए और अपनी शारीरिक गतिविधियों को बढ़ाइए. रोज कम से कम आधा घंटा एक्सरसाइज कीजिए. खूब वॉक कीजिए. खूब पानी पीजिए, पर्याप्त नींद लीजिए और तनाव को भगाकर खुश रहिए. इन आदतों से सिर्फ डायबिटीज ही नहीं, हार्ट डिजीज, किडनी डिजीज और लिवर डिजीज का जोखिम भी कम हो जाएगा.

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