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Home विश्व

ट्रंप की नीतियों से खोखला हुआ अमेरिका!

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
January 24, 2026
in विश्व
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donald trump
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नई दिल्ली: बदलते वैश्विक माहौल में अमेरिका की अर्थव्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं. मशहूर इकोनॉमिस्ट और PAICE के को-फाउंडर लार्स क्रिस्टेंसन ने बड़ा बयान दिया है. उनका कहना है कि अमेरिकी लोग एक भ्रम में जी रहे हैं कि उनका देश दुनिया में सबसे ऊपर है और सब कुछ अकेले कर सकता है. लेकिन असली समस्या डोनाल्ड ट्रंप नहीं हैं, बल्कि खुद अमेरिका है. क्रिस्टेंसन ने X पर एक लंबी पोस्ट में यह बात कही.

अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था से खिलवाड़ कर रहा अमेरिका

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क्रिस्टेंसन ने कहा कि अमेरिका ने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद खुद अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था बनाई थी, लेकिन अब उसी के साथ विश्वासघात कर रहा है. अमेरिका पिछले 20 सालों से अपनी क्षमता से ज्यादा खर्च कर रहा है. अमेरिकी लोगों का निजी और सरकारी खर्च यूरोपीय सेंट्रल बैंकों और पेंशन फंडों से मिलने वाले पैसे से चल रहा है. अब सवाल यह है कि कोई देश या निवेशक डॉलर में व्यापार क्यों करेगा? अगर अमेरिका नियमों का पालन नहीं करता, तो डॉलर पर भरोसा कैसे किया जाए? डॉलर को रखना मूर्खता होगी.

अमेरिका ने EU से 3.6 ट्रिलियन डॉलर तक कर्ज लिया

US ट्रेजरी डिपार्टमेंट और ब्यूरो ऑफ इकोनॉमिक एनालिसिस के मुताबिक, अमेरिका ने यूरोपीय यूनियन (EU) और यूरोपीय देशों से बड़ा कर्ज लिया हुआ है. यूरोपीय निवेशक अमेरिकी बॉन्ड और सिक्योरिटीज में 8 से 10 ट्रिलियन डॉलर तक रखे हुए हैं, जिनमें से सरकारी कर्ज का हिस्सा 2 से 3.6 ट्रिलियन डॉलर है. सिर्फ EU देशों में यह रकम 1.5 से 2 ट्रिलियन डॉलर तक है. यूरोप अमेरिका को सबसे ज्यादा कर्ज देने वाला क्षेत्र है, दुनिया के बाकी हिस्सों से दोगुना. उदाहरण के तौर पर, नवंबर 2025 तक UK ने 888 बिलियन डॉलर, बेल्जियम ने 481 बिलियन और फ्रांस ने 376 बिलियन डॉलर का निवेश किया हुआ है.

इसके बदले में, अमेरिका ने यूरोप में बड़ा निवेश किया है. अमेरिकी कंपनियां यूरोप में डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (जैसे फैक्टरियां, बिजनेस खरीदना) में लगभग 4 ट्रिलियन डॉलर लगा चुकी हैं. 2024 के अंत तक अमेरिका का कुल विदेशी डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट 6.83 ट्रिलियन डॉलर था, जिसमें यूरोप का हिस्सा 3.95 ट्रिलियन डॉलर है यानी 59% से भी ज्यादा. यूरोप अमेरिकी कंपनियों का सबसे बड़ा निवेश जगह है.

ट्रंप के रवैये से अमेरिका को कर्ज मिलना बंद

क्रिस्टेंसन ने कहा कि अमेरिका अगर अपने सहयोगी देशों की जमीन पर दावा करता है या उन्हें धमकी देता है, तो वह एक तानाशाह देश जैसा व्यवहार करता है. ऐसे में कोई समझदार व्यक्ति अमेरिकी सरकार को कर्ज क्यों देगा? अगर अमेरिका दूसरे देशों की संप्रभुता का सम्मान नहीं करता और अपने अंतरराष्ट्रीय वादों को नहीं निभाता, तो कर्ज चुकाने की उम्मीद कैसे की जाए? वे बोले कि अमेरिका अगर किसी देश की जमीन न देने पर टैरिफ लगा सकता है, तो निवेश करने का जोखिम क्यों उठाया जाए? अमेरिका पूंजी पर नियंत्रण लगा सकता है, इसकी कोई गारंटी नहीं.

ट्रंप के सत्ता में रहने से अमेरिकी नुकसान बढ़ेगा

ट्रंप की नीतियों पर क्रिस्टेंसन ने कहा कि ट्रंप जितने दिन सत्ता में रहेंगे, अमेरिका के लिए उतना ही नुकसान होगा. अब अमेरिकी लोगों पर जिम्मेदारी है कि वे साबित करें कि ट्रंप एक अपवाद हैं, न कि अमेरिका की पूरी सोच. ट्रंप ने हाल ही में ग्रीनलैंड को खरीदने की कोशिश की और यूरोपीय देशों को टैरिफ की धमकी दी, लेकिन NATO चीफ मार्क रुट्टे से बात के बाद धमकी वापस ली. इससे वैश्विक स्तर पर ट्रंप की आलोचना हो रही है.

एक्सपर्ट्स का मानना है कि क्रिस्टेंसन के बयान से लगता है कि अगर अमेरिका का यह रवैया जारी रहा, तो यूरोप से कर्ज मिलना मुश्किल हो सकता है. इससे अमेरिका की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ सकता है, क्योंकि यूरोपीय फंडिंग बंद होने से खर्च चलाना मुश्किल होगा. दोनों तरफ का यह आर्थिक रिश्ता बहुत मजबूत है, लेकिन ट्रंप की नीतियां इसे कमजोर कर सकती हैं. अमेरिका को अब अपनी छवि सुधारने की जरूरत है, वरना वैश्विक स्तर पर अलग-थलग पड़ सकता है.

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