नई दिल्ली। नेपाल के रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी में भूकंप के बाद अचानक भीषण बाढ़ आ गई. बाढ़ ने देखते बाजार, सड़कें, पुल, घर और बिजली परियोजनाओं को अपनी चपेट में ले लिया. हजारों लोग लापता हैं. इनमें बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक भी शामिल बताए जा रहे हैं. फिलहाल, नेपाल में हालात इतने गंभीर हो चुके हैं, कि बालेन शाह की सरकार ने भारत से रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए तत्काल मदद मांगी है.
नेपाल सरकार के प्रवक्ता और शिक्षा मंत्री सस्मित पोखरेल ने बताया कि हालात को देखते हुए भारत से समन्वय किया जा रहा है. नेपाल को भारत की तरफ से सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा भी मिला है. इसके अलावा नेपाल सरकार में विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा कि प्रधानमंत्री बालेन शाह, वित्त मंत्री और अन्य वरिष्ठ मंत्रियों के समन्वय से आज काठमांडू में भारतीय सहायता सामग्री लाने की तैयारियां चल रही हैं. इसके अलावा भारत ने रेस्क्यू ऑपरेशन में मदद करने का भी आश्वासन दिया है.
प्रधानमंत्री मोदी ने भी नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह से फोन पर बात की और जान-माल की हानि पर शोक व्यक्त किया. प्रधानमंत्री मोदी ने हर संभव मानवीय और राहत सहायता देने का भी आश्वासन दिया है. पीएम ने कहा कि भारत के लोग इस मुश्किल समय में नेपाल में अपने भाइयों और बहनों के साथ खड़े हैं. हमारी टीमें बचाव और राहत के कामों पर मिलकर काम कर रही हैं.
नेपाल के लिए बेहद अहम है भारत की मदद?
नेपाल के लिए यह मदद इसलिए अहम है क्योंकि प्रभावित इलाके बेहद दुर्गम हैं. अचानक आई बाढ़ ने सड़क संपर्क को नुकसान पहुंचाया है और कई जगह पुल भी क्षतिग्रस्त हुए हैं. ऐसे में जमीन के रास्ते राहत सामग्री पहुंचाना मुश्किल हो गया है. लापता लोगों तलाश और दुर्गम स्थानों पर फंसे हुए लोगों को बचाने के लिए सबसे पहले के जरिए रेस्क्यू और राहत पहुंचाना फिलहाल सबसे प्रभावी विकल्पों में से एक है. ऐसे में भारत की मदद उनके लिए बहुत जरूरी है.
भारत के पास आपदा के दौरान बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान चलाने का अनुभव है. भारतीय वायुसेना के हेलिकॉप्टर, विशेष रूप से दुर्गम पहाड़ी इलाकों में ऑपरेशन करने वाली टीमें, नेपाल के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती हैं. जरूरत पड़ने पर भारत मेडिकल इमरजेंसी टीम, आपदा राहत विशेषज्ञ, खोज एवं बचाव दल और जरूरी उपकरण भी भेज सकता है.
नेपाल में आई इस बाढ़ भारत की चिंता अपने नागरिकों को लेकर भी है. नेपाल पर्यटन बोर्ड के मुताबिक इस बाढ़ में 100 से ज्यादा भारतीय पर्यटक लापता हैं. इनमें मानसरोवर यात्रा पर जा रहे तीर्थयात्री भी शामिल हैं. नेपाल में बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक भी फंसे हुए हैं.ऐसे में भारत के लिए राहत अभियान की एक अहम प्राथमिकता अपने नागरिकों की जानकारी जुटाना, उनका लोकेशन पता करना औरउन्हें सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना होगा.
बाढ़ के दौरान और उसके बाद भी नेपाल को मेडिकल किट, जरूरी दवाएं, प्राथमिक उपचार का सामान, मोबाइल मेडिकल यूनिट और डॉक्टरों की टीम की जरूरत पड़ेगी. प्रभावित लोगों के लिए पीने का साफ पानी, खाने का सामान, टेंट, कंबल, कपड़े, सैनिटेशन किट और सोलर लाइट जैसी चीजें भी जरूरी होंगी.ऐसे में इस समय नेपाल के लिए भारत की लॉजिस्टिक मदद भी महत्वपूर्ण हो सकती है.
भारतीय उच्चायोग ने जारी किया हेल्पलाइन
नेपाल में भारतीय उच्चायोग की ओर से बाढ़ में फंसे भारतीय लोगों के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किया गया है. उच्चायोग की ओर से किए गए ट्वीट में कहा गया है कि आज नेपाल में अचानक आई बाढ़ से प्रभावित भारतीय नागरिकों से जुड़ी मदद और जानकारी के लिए, इन (+977 985 131 6807- 977 970 910 7500) इमरजेंसी नंबरों पर संपर्क किया जा सकता है.
चीन से जानकारी पर निर्भर नेपाल
नेपाल की सबसे बड़ी चिंता वहां भगौलिक और नदियों की स्थितियों के बारे में जानकारी नहीं मिलने की है. नेपाली विशेषज्ञों के पास इलाके की नई सैटेलाइट तस्वीरें और पर्याप्त ताजा डेटा नहीं होता है. उन्हें काफी हद तक चीन से मिलने वाले डेटा और ब्रीफिंग पर निर्भर रहना पड़ रहा है. ऐसे में कई बार समय से या स्पष्ट जानकारियां नहीं मिलने पर ऐसी घटनाएं सामने आ सकती है.
आज सुूबह सुबह 8:37 बजे इलाके में भूकंप के झटके महसूस किए गए और इसके बाद हिमस्खलन के कारण बाढ़ आने की शुरुआती जानकारी मिली है. हालांकि, इस वजह की अभी पूरी तरह पुष्टि नहीं हुई है. विशेषज्ञों के अनुमान के मुताबिक, संभावित घटना स्थल नेपाल-चीन सीमा से करीब 30-40 किमी ऊपर हो सकता है. अगर झील टूटने या हिमस्खलन की जानकारी उसी समय मिल जाती, तो नीचे रहने वाले लोगों को चेतावनी देने के लिए करीब 30 से 45 मिनट का समय मिल सकता था. इससे कई जानें बचाई जा सकती थीं.







