प्रकाश मेहरा
नई दिल्ली (स्पेशल डेस्क): दूरदर्शन के स्वर्णिम युग की एक और पहचान अब यादों के झरोखों में सिमट गई है। अपनी सादगी और गंभीर आवाज से करोड़ों दर्शकों के दिलों पर राज करने वालीं समाचार वाचक सरला माहेश्वरी का बृहस्पतिवार को दिल्ली विश्वविद्यालय के नजदीक शक्ति नगर में उनके आवास पर निधन हो गया। वह पिछले कुछ समय से बीमार चल रही थीं। उनका अंतिम संस्कार दिल्ली के निगम बोध घाट पर किया गया, जहां मीडिया जगत की तमाम हस्तियों ने उन्हें नम आंखों से विदाई दी।
दिल्ली- 6 से बीबीसी तक का सफर
पुरानी दिल्ली के सीताराम बाजार (दिल्ली-6) में जन्मीं सरला माहेश्वरी की शिक्षा- दीक्षा दिल्ली विश्वविद्यालय में हुई। उन्होंने न केवल पीएचडी की उपाधि प्राप्त की बल्कि हंसराज कालेज में छह वर्षों तक हिंदी की अध्यापिका के रूप में ज्ञान की भी लौ जलाती रही।
साल 1976 में उन्होंने दूरदर्शन के साथ बतौर एंकर अपने करियर की शुरुआत की। 1984 में डा. पवन माहेश्वरी से विवाह के बाद वह इंग्लैंड चली गईं, जहां उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए ढाई साल तक बीबीसी में काम किया। 1988 में भारत लौटने के बाद वह दोबारा दूरदर्शन परिवार का हिस्सा बनीं।
खबरें पढ़ने का शालीन अंदाज था उनकी पहचान
स्वर्गीय सरला माहेश्वरी के पूर्व सहकर्मी और दिग्गज एंकर शम्मी नारंग उन्हें याद करते हुए बताते हैं कि वह स्वभाव से बेहद सौम्य और मिलनसार थीं। सरला माहेश्वरी का खबरें पढ़ने का शालीन अंदाज उनकी पहचान था। वह दूरदर्शन की सम्मानित और प्रतिष्ठित समाचार वाचिका थीं, जिन्होंने अपनी सौम्य आवाज, सटीक उच्चारण और गरिमापूर्ण प्रस्तुति से भारतीय समाचार जगत में विशेष स्थान बनाया। उनकी सादगी, संयम और व्यक्तित्व ने दर्शकों के मन में गहरा विश्वास स्थापित किया था।
कांपती आवाज में दी थी राजीव गांधी के निधन की खबर
वहीं, वरिष्ठ पत्रकार विवेक शुक्ला उन्हें याद करते हुए कहते है एक साक्षात्कार के दौरान स्वर्गीय सरला माहेश्वरी ने जिक्र करते हुए बताया था कि वर्ष 1991 में उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के निधन की खबर पूरे देश को देनी थी। उस समय शोक और दुख के कारण उनकी आवाज कांप रही थी, जो उनके लिए बहुत यादगार और भावुक पल था। वह स्वयं देवकी नंदन पांडे जैसे दिग्गजों से बेहद प्रभावित थीं







