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Home राष्ट्रीय

NCERT किताब विवाद पर CJI सूर्यकांत: ये गहरी साजिश, जिम्मेदारी तय हो

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
February 26, 2026
in राष्ट्रीय
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cji surya kant
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नई दिल्ली।  NCERT की 8वीं कक्षा की किताब में न्यायपालिका से जुड़े चैप्टर में भ्रष्टाचार को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. इस दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत काफी नाराज दिखे. उन्होंने सुनवाई के दौरान कई सख्त टिप्पणियां कीं. कोर्ट ने कहा कि ये कैलकुलेटिव मूव है. चीफ जस्टिस ने कहा कि बच्चों को ये पढ़ाया जाएगा कि न्यायपालिका भ्रष्ट है?

सुनवाई के दौरान काफी नाराज दिख रहे चीफ जस्टिस के सामने सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि जो 32 किताबें बिकी थीं, उसे वापस ले लिया गया है. इसके अलावा बाकी किताबों को भी वापस ले लिया गया है. तब चीफ जस्टिस ने कहा कि उन्होंने पहले वाले को निकाल दिया और आज न्यायपालिका खून बहा रही है. यह हर जगह मीडिया में है. जानिए कोर्ट ने क्या-क्या कहा…

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न्यायपालिका भ्रष्ट है, क्या संदेश जाएगा?

चीफ जस्टिस ने कहा कि मैंने एजुकेशन सेक्रेटरी का भेजा हुआ कम्युनिकेशन पढ़ा है. जब हम पर हमला होता है तो हम जानते हैं कि कैसे जवाब देना है. उन्होंने कहा कि आप कहते हैं कि पब्लिकेशन वापस ले लिया गया है. यह मार्केट में है, यह सोशल मीडिया में है..! मुझे भी किताब की एक कॉपी मिली! अगर आप पूरी टीचिंग कम्युनिटी और स्टूडेंट्स को सिखा रहे हैं कि ज्यूडिशियरी करप्ट है तो क्या मैसेज जाएगा? टीचर्स इसे सीखेंगे! पेरेंट्स इसे सीखेंगे.

इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए

चीफ जस्टिस ने कहा कि इस मामले में जवाबदेही तय होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि हल्की सजा देकर नहीं छोड़ा जा सकता. चीफ जस्टिस ने कहा कि ये 8 वी क्लास के बच्चों की बात नहीं हैं. ये कैलकुलेटिव मूव है. बच्चों को ये पढ़ाया जाएगा कि ज्यूडिशियरी करप्ट है ? ⁠जो भी इसके पीछे है उसका पता लगाएंगे. उन्होंने गोली चलाई है और ज्यूडिशियरी खून बहा रही है

यह गहरी साजिश है

CJI ने कहा कि यह एक सोचा-समझा कदम है. पूरी टीचिंग कम्युनिटी को बताया जाएगा कि इंडियन ज्यूडिशियरी करप्ट है और केस पेंडिंग हैं. फिर स्टूडेंट्स और फिर पेरेंट्स. यह एक गहरी साजिश है! CJI ने कहा कि हम और गहरी जांच चाहते हैं. हमें पता लगाना है कि कौन जिम्मेदार है और हम देखेंगे कि कौन-कौन हैं. उसकी सजा मिलनी चाहिए! हम केस बंद नहीं करेंगे.

उनको सजा मिलनी चाहिए

CJI ने कहा कि हम और गहरी जांच चाहते हैं. हमें पता लगाना है कि कौन जिम्मेदार है और हम देखेंगे कि कौन-कौन हैं. उसकी सजा मिलनी चाहिए! हम केस बंद नहीं करेंगे. मैं न्यायपालिका का मुखिया होने के नाते जब तक संतुष्ट नहीं हो जाता है तब तक इस की सुनवाई जारी रहेगी. सेकेट्री जनरल ने जब पता किया तो NCERT निदेशक ने अपने कदम का बचाव किया. चीफ जस्टिस ने कहा कि इससे साफ होता है कि ये न्यायपालिका की गरिमा को कम करने के लिए एक कैलकुलेटिव मूव है.

चीफ जस्टिस ने कहा कि हमारे संविधान बनाने वाले बहुत जागरूक थे और उन्होंने इस बात का ध्यान रखा कि संवैधानिक जिम्मेदारियां तय हों. उन्होंने कहा कि विधायिका, न्यायपालिका और कार्यपालिका  ऑटोनॉमी के साथ काम कर सकें और हमारे देश के लोकतांत्रिक ताने-बाने को बचा सकें. संवैधानिक रूप से बताई गई सीमाओं को मानते हुए हम चौंक गए जब एक बड़े अखबार ने ग्रेड (II) के लिए सोशल साइंस की किताब ‘एक्सप्लोरिंग सोसाइटी इंडिया एंड बियॉन्ड’ के रिलीज़ के बारे में एक आर्टिकल छापा, जिसका पहला एडिशन फरवरी 2026 में NCERT ने पब्लिश किया गया था.

चीफ जस्टिस ने कहा कि इस चैप्टर में ज्यूडिशियरी के खिलाफ मिली सैकड़ों शिकायतों का खास तौर पर ज़िक्र है, जिससे लगता है कि कोई एक्शन नहीं लिया गया और एक पूर्व CJI के भाषण के कुछ शब्द लिए गए हैं, जिससे लगता है कि ज्यूडिशियरी ने खुद ट्रांसपेरेंसी की कमी और इंस्टीट्यूशनल करप्शन को माना है. आर्टिकल में आगे कहा गया है कि लोग ज्यूडिशियरी में अलग-अलग लेवल के करप्शन का अनुभव करते हैं.

न्यायपालिका की गरिमा को कम करने की चाल

काफी गुस्से में नजर आ रहे CJI ने कहा कि किताब में जो कुछ भी लिखा गया है वो बहुत ही लापरवाही से लिखा गया है, उस पर अपनी राय देने के बजाय,  डायरेक्टर ने कंटेंट का बचाव करते हुए जवाब दिया है. उन्होंने कहा कि हालांकि पब्लिकेशन में हमारे समाज में ज्यूडिशियरी की भूमिका पर पूरा चैप्टर है, लेकिन यह SC, HC और ट्रायल कोर्ट के शानदार इतिहास को धो देता है.

उन्होंने कहा कि इसे छोड़ दिया गया है और डेमोक्रेटिक ताने-बाने को बचाने में इंस्टीट्यूशन की भूमिका को भी नहीं बताया गया है, टेक्स्ट ज्यूडिशियरी की भूमिका को पहचानने में नाकाम रहा है जिसने मूल ढांचा सिद्धांत को बनाए रखा. चीफ जस्टिस ने कहा कि हमें ऐसा लगता है कि इंस्टीट्यूशनल अथॉरिटी को कमजोर करने और न्यायपालिका की गरिमा को कम करने की एक सोची-समझी चाल है. अगर इसे बिना रोक-टोक के चलने दिया गया, तो यह आम जनता और युवाओं के आसानी से समझ में आने वाले मन में ज्यूडिशियल ऑफिस की पवित्रता को खत्म कर देगा.

CJI ने कहा कि हमें ऐसा लगता है कि किताब की कहानी इस कोर्ट द्वारा बताए गए किसी भी बदलाव लाने वाले कदम पर ध्यान देने की कोशिश नहीं करती है, जिसमें लीगल एड सिस्टम और न्याय तक पहुंच को आसान बनाना शामिल है. चीफ जस्टिस ने कहा कि इसमें पक्षपातपूर्ण बाते हैं. उन्होंने कहा कि बुक के कटेंट सिर्फ छात्रों तक सीमित नहीं रहेंगे बल्कि अगली पीढियों तक पहुंचेंगे.

ये चुप्पी बहुत बुरी है

चीफ जस्टिस ने कहा कि यह चुप्पी बहुत बुरी है क्योंकि इस कोर्ट ने कई बड़े अधिकारियों को करप्शन, सरकारी पद का गलत इस्तेमाल करने या फंड की हेराफेरी के लिए पकड़ा है. उन्होंने कहा कि हमें लगता है कि किताब में शब्दों, बातों का चुनाव, शायद अनजाने में हुई गलती या सच्ची गलती नहीं है. उन्होंने कहा कि हम यह भी कहना चाहते हैं कि हम किसी भी सही आलोचना या ज्यूडिशियरी की जांच करने के अधिकार को दबाने के लिए स्वत: संज्ञान कार्यवाही का प्रस्ताव नहीं रखते हैं. उन्होंने कहा कि हमारा पक्का यकीन है कि सख्त बातचीत से संस्थान की जान बनी रहती है.

हल्की सजा देकर नहीं छोड़ा जा सकता

चीफ जस्टिस ने कहा कि इस मामले में जवाबदेही तय होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि हल्की सजा देकर नहीं छोड़ा जा सकता. इस पर ⁠सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि इस चैप्टर के लिए ज़िम्मेदार लोग अब इस मिनिस्ट्री या किसी दूसरी मिनिस्ट्री का हिस्सा नहीं रहेंगे. जो भी इसके पीछे है उसका पता लगाएंगे. उन्होंने गोली चलाई है और ज्यूडिशियरी खून बहा रही है.

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