नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में दिल्ली के 51 अस्पतालों को अवमानना नोटिस जारी किया क्योंकि उन्होंने कमजोर तबके के लोगों के लिए कम-से-कम 10 फीसद ‘इनपेशेंट डिपार्टमेंट’ (आईपीडी) और 25 फीसद ओपीडी (आउटपेशेंट डिपार्टमेंट) को मुफ्त इलाज देने की शर्त का पालन नहीं किया। न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की पीठ ने अस्पतालों से कारण बताने को कहा कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए और दिल्ली सरकार द्वारा दी गई छूट (जमीन देने के लिए) वापस क्यों न ले ली जाए।
आदेश का पालन करने का निर्देश दिया
बता दें कि जिन अस्पतालों को नोटिस जारी किए गए हैं उनमें शामिल हैं – सर गंगा राम अस्पताल, बीएलके मैक्स अस्पताल, फोर्टिस एस्कॉर्ट अस्पताल, मूलचंद खैरातीराम अस्पताल, सेंटर फार साइट और राजीव गांधी कैंसर इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर, रोहिणी। पीठ ने यह आदेश केंद्र द्वारा मूलचंद खैराती राम ट्रस्ट, राजीव गांधी कैंसर संस्थान और डीडीए के खिलाफ दायर एक विविध आवेदन पर दिया। इस सिविल अपील में अदालत ने 2018 में अस्पतालों को केंद्र सरकार के 2 फरवरी 2012 के आदेश का पालन करने का निर्देश दिया।
इस आदेश में दिल्ली में गरीब लोगों के लिए मुफ्त मरीज इलाज की नीति बनाई गई। जिसका पालन ‘लैंड डेवलपमेंट ऑफिस’ द्वारा रियायती दरों पर जमीन दिए गए निजी अस्पतालों को करना था। इसमें 25 फीसदी ओपीडी और 10 फीसदी आईपीडी मरीजों को मुफ्त इलाज का प्रावधान था। दिल्ली सरकार द्वारा दायर एक अमल संबंधी हलफनामे से अदालत ने हाल ही में देखा कि कुछ अस्पतालों ने 2018 के उसके आदेश का उल्लंघन किया।
कार्रवाई के लिए नोडल ऑफिसर नियुक्त किया
फिर भी दिल्ली में अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसके अलावा सरकार द्वारा डीडीए, ‘लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस’ और नगर निगम को भेजे गए संदेश का या तो जवाब नहीं दिया गया या उन पर कार्रवाई नहीं की गई और पूरी कार्रवाई बहुत लापरवाही से की गई। इस पृष्ठभूमि में अदालत ने गलती करने वाले अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग के सचिव को नोडल ऑफिसर नियुक्त किया।
सभी अधिकारियों, यानी डीडीए, एलडीओ और नगर निगम को नोडल ऑफिसर को जवाब देने का निर्देश दिया गया। कोर्ट ने कहा— अगर ऊपर बताए गए ऑफिस की तरफ से कोई कमी पाई जाती है, तो नोडल ऑफिसर इस कोर्ट को बताने और एक्शन लेने के लिए जिम्मेदार होंगे।
इन अस्पतालों को मिला नोटिस
जिन अस्पतालों को नोटिस जारी किया, वे हैं- आर्य वैद्यशाला कोट्टाक्कल, कैलाश दीपक अस्पताल, राजन फोर्टिस अस्पताल, दिल्ली ईएनटी अस्पताल, एमजीएस सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, माई कमली वाली अस्पताल, मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल (प्रेस एन्क्लेव), मूल चंद खैरातीराम अस्पताल, प्राइमस सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, सीता राम भरतिया अस्पताल, वेंकटेश्वर अस्पताल, विनायक अस्पताल, विमहेन्स अस्पताल, मैक्स स्मार्ट अस्पताल, एक्शन कैंसर अस्पताल, आयुष्मान अस्पताल एंड हेल्थ सर्विसेज, बत्रा अस्पताल एंड मेडिकल रिसर्च सेंटर, बेन्सप्स अस्पताल, बिमला देवी अस्पताल, बीएलके कपूर मेमोरियल अस्पताल, सेंटर फॉर साइट, धर्मशिला नारायणा अस्पताल शामिल हैं।
इन अस्पतालों के अलावा फोर्टिस एस्कॉर्ट्स अस्पताल, गुरु हरकिशन अस्पताल, हकीम अब्दुल हमीद सेंटेनरी अस्पताल, ह्यूमन केयर चैरिटेबल अस्पताल, इंडियन स्पाइनल इंजरी सेंटर, जयपुर गोल्डन अस्पताल, जीवन अनमोल अस्पताल, मधुकर रेनबो चिल्ड्रन्स अस्पताल, महाराजा अग्रसेन अस्पताल, पंजाबी बाग, यथार्थ अस्पताल, महाराजा अग्रसेन अस्पताल (द्वारका), महर्षि आयुर्वेद अस्पताल, माता चानन देवी अस्पताल, मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल (पटपड़गंज), मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल (शालीमार बाग), नेशनल हार्ट इंस्टिट्यूट, पुष्पावती सिंघानिया अस्पताल, आरएलकेसी अस्पताल, रेड क्रास जनरल मैटरनिटी एंड चाइल्ड केयर अस्पताल, राजीव गांधी कैंसर इंस्टिट्यूट एंड रिसर्च सेंटर रोहिणी, राजीव गांधी कैंसर इंस्टिट्यूट एंड रिसर्च सेंटर नीति बाग, सरोज अस्पताल, शांति मुकुंद अस्पताल, श्री अग्रसेन इंटरनेशनल अस्पताल, सर गंगा राम अस्पताल, सेंट स्टीफंस अस्पताल, स्वामी परमानंद प्राकृतिक अस्पताल, संतोम अस्पताल, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टिट्यूट के नाम शामिल हैं।







