नई दिल्ली। दिल्ली आबकारी नीति मामले में सीबीआई ने दिल्ली हाईकोर्ट में ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए कहा है कि निचली अदालत ने कानून की तय सीमाओं से आगे जाकर फैसला दिया। एजेंसी की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच के सामने लिखित दलीलें पेश कीं और कहा कि उपलब्ध सामग्री आरोप तय करने और मुकदमे की सुनवाई के लिए पर्याप्त है। आज हुई सुनवाई में दिल्ली हाईकोर्ट ने आबकारी नीति मामले में निचली अदालत की ओर से आरोप मुक्त किए जाने के खिलाफ CBI की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत 23 लोगों को नोटिस जारी किया।
ED केस में नहीं होगी सुनवाई
दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि वो निचली अदालत के जज की ओर से अपने आदेश में सीबीआई और जांच अधिकारी के खिलाफ की गई टिप्पणी पर रोक लगाएगा। हाईकोर्ट ने साफ किया कि जब तक हाई कोर्ट में CBI की इस अर्जी का निपटारा नहीं होता तब तक निचली अदालत में ED के केस में सुनवाई नहीं हो पाएंगी। इसका मतलब यह है कि फिलहाल CBI के केस का हवाला देकर ही ED के केस में आरोपी अभी तुंरत आरोपमुक्त नहीं हो पाएंगे, इसके लिए उन्हें हाईकोर्ट के आदेश का इंतजार करना होगा। इस मामले में अगली सुनवाई 16 मार्च को होगी।
सीबीआई ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने 27 फरवरी 2026 के आदेश में 23 आरोपियों को डिस्चार्ज कर दिया, जबकि जांच में आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार के कई संकेत मिले हैं। एजेंसी का कहना है कि अदालत ने आरोप तय करने के चरण में ही गवाहों के बयानों और दस्तावेजों का विस्तार से विश्लेषण कर दिया, जो इस स्तर पर नहीं किया जाना चाहिए।
आबकारी नीति में हेरफेर का आरोप: सीबीआई
सीबीआई के अनुसार दिल्ली सरकार की 2021 22 की आबकारी नीति को इस तरह बदला गया कि कुछ निजी कारोबारियों को फायदा मिले। एजेंसी का कहना है कि नीति में बदलाव कर शराब के थोक कारोबारियों के लिए 12 प्रतिशत का तय मुनाफा रखा गया। सीबीआई का आरोप है कि इस मुनाफे का लगभग 6 प्रतिशत हिस्सा रिश्वत के रूप में देने की व्यवस्था की गई थी। एजेंसी का दावा है कि इस कथित साजिश के तहत करीब 90 से 100 करोड़ रुपये की राशि जुटाई गई।
गोवा चुनाव में इस्तेमाल हुआ पैसा
सीबीआई ने अदालत को बताया कि इस रकम में से लगभग 44.54 करोड़ रुपये गोवा विधानसभा चुनाव के दौरान आम आदमी पार्टी के चुनाव अभियान में इस्तेमाल किए गए। जांच एजेंसी के अनुसार यह पैसा दिल्ली से गोवा तक हवाला और अंगड़िया नेटवर्क के जरिये अलग अलग किश्तों में भेजा गया। सीबीआई का कहना है कि इस रकम के इस्तेमाल के लिए अलग अलग लोगों और चैनलों का सहारा लिया गया और नकद राशि को कई चरणों में स्थानांतरित किया गया।
300 से ज्यादा गवाह और सैकड़ों दस्तावेज
एजेंसी ने अदालत को बताया कि मामले में विस्तृत जांच की गई है। सीबीआई ने एक मुख्य चार्जशीट और चार पूरक चार्जशीट दाखिल की हैं। इन चार्जशीट के साथ 374 दस्तावेज और 300 से ज्यादा गवाहों के बयान अदालत में पेश किए गए हैं। सीबीआई का कहना है कि इन सभी सामग्री से कम से कम इतना मजबूत संदेह जरूर बनता है कि आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाया जाए और मामले की पूरी सुनवाई हो।
साजिश में सीधे सबूत मिलना मुश्किल
सीबीआई ने अदालत से कहा कि आपराधिक साजिश के मामलों में सीधे सबूत मिलना अक्सर मुश्किल होता है। ऐसे मामलों में घटनाओं की श्रृंखला, मुलाकातों और परिस्थितियों से साजिश का संकेत मिलता है। एजेंसी का कहना है कि ट्रायल कोर्ट ने इस सिद्धांत को नजरअंदाज कर दिया और प्रत्यक्ष सबूत की कमी को आधार बनाकर आरोपियों को राहत दे दी।
सबूत मिटाने की कोशिश का आरोप
सीबीआई ने यह भी कहा कि जांच के दौरान बड़े पैमाने पर सबूत मिटाने की कोशिश हुई। एजेंसी के अनुसार करीब 36 लोगों ने 170 से ज्यादा मोबाइल फोन बदल दिए या नष्ट कर दिए। सीबीआई का कहना है कि यह उस समय किया गया जब आबकारी नीति से जुड़े आरोप सार्वजनिक होने लगे थे। इसके बावजूद जांच एजेंसी ने कई महत्वपूर्ण डिजिटल और दस्तावेजी सबूत जुटाए हैं।
सीबीआई ने की हाईकोर्ट से ट्रायल की मांग
सीबीआई ने दिल्ली हाईकोर्ट से कहा कि उपलब्ध सामग्री से आरोप तय करने के लिए पर्याप्त आधार बनता है। इसलिए ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द कर आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति दी जानी चाहिए।







