प्रकाश मेहरा
एग्जीक्यूटिव एडिटर
नई दिल्ली। दिल्ली के आउटर जिले में पुलिस की फॉरेनर सेल ने अवैध रूप से भारत में रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 10 लोगों को गिरफ्तार किया है। ये सभी आरोपी फर्जी मेडिकल वीजा के जरिए यूरोप के देश Bulgaria जाने की तैयारी कर रहे थे। पुलिस के मुताबिक, आरोपी लंबे समय से अवैध तरीके से भारत में रह रहे थे और एजेंटों के जरिए विदेश भागने की योजना बना रहे थे।
गुप्त सूचना के बाद हुई कार्रवाई
दिल्ली पुलिस की फॉरेनर सेल को सूचना मिली थी कि कुछ बांग्लादेशी नागरिक अवैध तरीके से भारत में रह रहे हैं और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर यूरोप जाने की तैयारी कर रहे हैं। सूचना के आधार पर पुलिस ने Delhi के आउटर जिले में छापेमारी कर 10 लोगों को पकड़ लिया।
पूछताछ में पता चला कि ये सभी आरोपी मूल रूप से Bangladesh के रहने वाले हैं और बिना वैध दस्तावेजों के भारत में घुस आए थे। यहां रहने के दौरान इन्होंने स्थानीय एजेंटों की मदद से फर्जी मेडिकल वीजा बनवाने की कोशिश की थी।
फर्जी मेडिकल वीजा के जरिए यूरोप पहुंचने की साजिश
पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपियों का मकसद मेडिकल ट्रीटमेंट के नाम पर वीजा हासिल कर यूरोप पहुंचना था। इसके लिए एजेंटों के माध्यम से नकली दस्तावेज और मेडिकल कागजात तैयार कराए गए थे, ताकि आसानी से वीजा मिल सके।
बताया जा रहा है कि आरोपियों को बुल्गारिया भेजने की पूरी तैयारी कर ली गई थी और जल्द ही वे भारत से बाहर निकलने वाले थे। हालांकि इससे पहले ही पुलिस ने कार्रवाई कर उनकी योजना नाकाम कर दी।
अवैध रूप से भारत में रह रहे थे
जांच में यह भी पता चला है कि ये सभी लोग लंबे समय से भारत में अलग-अलग जगहों पर रह रहे थे। कुछ आरोपी मजदूरी कर रहे थे, जबकि कुछ अन्य छोटे-मोटे कामों में लगे हुए थे। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि भारत में इनके प्रवेश का नेटवर्क कितना बड़ा है और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही है।
एजेंटों की तलाश में जुटी पुलिस
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, इस पूरे मामले में मानव तस्करी और फर्जी दस्तावेज बनाने वाले एजेंटों की भी भूमिका सामने आ रही है। पुलिस अब उन एजेंटों की पहचान कर उन्हें पकड़ने की कोशिश कर रही है, जिन्होंने इन लोगों को भारत में ठहराने और विदेश भेजने की योजना बनाई थी।
गिरफ्तार किए गए सभी आरोपियों के खिलाफ विदेशी नागरिक अधिनियम और अन्य संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस उनसे पूछताछ कर रही है और उनके नेटवर्क की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत इन्हें डिपोर्ट करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।







