प्रकाश मेहरा
एग्जीक्यूटिव एडिटर
नई दिल्ली। करीब तीन दशक पुराने अपहरण और हत्या के सनसनीखेज मामले में फरार चल रहे आरोपी सलीम वास्तिक उर्फ सलीम खान को आखिरकार पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इस गिरफ्तारी के बाद ऐसे कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं, जिन्होंने पूरे मामले को फिर से सुर्खियों में ला दिया है।
1995 का खौफनाक अपराध
यह मामला वर्ष 1995 का है, जब उत्तर-पूर्वी दिल्ली के एक कारोबारी के 13 वर्षीय बेटे का अपहरण कर लिया गया था। अपहरण के बाद आरोपी सलीम और उसके साथी अनिल ने बच्चे की सुरक्षित रिहाई के बदले 30,000 रुपये की फिरौती मांगी थी। परिवार को निर्देश दिया गया था कि रकम को लोनी फ्लाईओवर के पास एक बस में तय स्थान पर रखा जाए और पुलिस को इसकी सूचना न दी जाए।
हालांकि, पुलिस को सूचना दी जा चुकी थी और जांच शुरू हो गई थी। इसी दौरान संदेह के आधार पर सलीम को पकड़ा गया। पूछताछ में उसने अपराध कबूल कर लिया और पुलिस को मुस्तफाबाद स्थित एक नाले तक ले गया, जहां से बच्चे का शव बरामद हुआ।
सह-आरोपी की भूमिका
जांच में सामने आया कि इस पूरे अपराध की योजना सलीम के साथी अनिल ने बनाई थी। अनिल ने ही फिरौती के लिए कॉल किया। उसी ने अमीर परिवार के बच्चे को निशाना बनाने का सुझाव दिया। बाद में 4 फरवरी 1995 को अनिल ने अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। उसकी झुग्गी से बच्चे की घड़ी, टिफिन बॉक्स और स्कूल बैग जैसे अहम सबूत भी बरामद किए गए।
सजा और फिर फरारी
जांच पूरी होने के बाद अदालत ने 5 अगस्त 1997 को दोनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। हालांकि, अपील लंबित रहने के दौरान 24 नवंबर 2000 को सलीम को अंतरिम जमानत मिली, जिसके बाद वह फरार हो गया और कभी वापस नहीं लौटा।
खुद को ‘मृत’ घोषित कर बदली पहचान
फरारी के दौरान सलीम ने कानून से बचने के लिए एक चौंकाने वाली चाल चली—उसने खुद को मृत घोषित करवा दिया। इसके बाद उसने अपनी पहचान बदलकर “सलीम अहमद” उर्फ “सलीम वास्तिक” नाम रख लिया और अलग-अलग राज्यों में छिपकर रहने लगा। हरियाणा के करनाल और अंबाला में मजदूरी और फर्नीचर का काम किया। वर्ष 2010 में गाजियाबाद के लोनी में स्थायी रूप से बस गया। यहां उसने महिलाओं के कपड़ों की दुकान भी खोली।
यूट्यूबर बनकर नई पहचान
नई पहचान के साथ सलीम ने सोशल मीडिया का सहारा लिया और “एक्स-मुस्लिम” यूट्यूबर के रूप में पहचान बना ली। उसकी लोकप्रियता इतनी बढ़ी कि हाल ही में एक बॉलीवुड निर्माता उसकी जिंदगी पर फिल्म बनाने की तैयारी कर रहा था। पूछताछ में सलीम ने बताया कि “उसे बायोपिक के लिए संपर्क किया गया था। कॉन्ट्रैक्ट के एडवांस के तौर पर 15 लाख रुपये का चेक भी मिला था। पुलिस के हाथ कैसे लगा सुराग।
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को गुप्त सूचना मिली कि “सलीम वास्तिक” नाम का यूट्यूबर दरअसल 1995 के हत्याकांड का फरार आरोपी है।
इसके बाद पुराने रिकॉर्ड, फोटो और फिंगरप्रिंट मिलाए गए। कड़कड़डूमा कोर्ट से केस की जानकारी जुटाई गई। पहचान की पुष्टि होने पर गिरफ्तारी की योजना बनाई गई। अंततः गाजियाबाद पुलिस की मदद से उसे गिरफ्तार कर लिया गया। यह मामला दिखाता है कि “अपराधी चाहे कितनी भी चालाकी से पहचान बदल ले या खुद को मृत घोषित कर दे, कानून की पकड़ से बच पाना आसान नहीं होता। 31 साल बाद भी न्याय की प्रक्रिया जारी रही और आखिरकार आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया।







