नई दिल्ली। रक्षा विशेषज्ञ लेफ्टिनेंट जनरल राज शुक्ला (रिटायर्ड) ने भारतीय रक्षा क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि राफेल लड़ाकू विमान और मिसाइलें तब तक बेकार हैं, जब तक उनके डिलीवरी सिस्टम को प्रभावी ढंग से उपयोग करने वाला सॉफ्टवेयर न हो। उन्होंने सुझाव दिया कि भारत को AI में भारी निवेश करना चाहिए। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव की ओर से विकसित 12 AI मॉडलों में से तीन-चार मॉडल सेना के लिए आरक्षित किए जाने चाहिए, क्योंकि सैन्य डेटा को सिविल क्षेत्र में साझा नहीं किया जा सकता। उन्होंने विशेष रूप से सैन्य उपयोग के लिए एक्सक्लूसिव लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स (LLMs) की जरूरत बताई।
लेफ्टिनेंट जनरल शुक्ला ने कहा कि इन LLMs पर 50 अनुभवी डेटा इंजीनियरों को लगाया जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि AI के लिए अतिरिक्त सचिव या मेजर जनरल स्तर के अधिकारी बेकार हैं, क्योंकि उन्हें AI की गहरी समझ नहीं होती। सैन्य डेटा और युद्ध योजनाओं को समझने वाला वास्तविक AI एक्सपर्ट ही इस क्षेत्र का नेतृत्व कर सकता है, जिससे भारत की रक्षा क्षमता को AI के माध्यम से मजबूत बनाया जा सके। यह विचार भारत टुडे कॉन्क्लेव 2026 में व्यक्त किया गया, जहां उन्होंने AI-आधारित युद्ध के महत्व पर प्रकाश डाला।
युद्ध में AI का बढ़ता दायरा
आज के दौर में युद्ध के दौरान AI का उपयोग अभूतपूर्व रूप से बढ़ गया है। रूस-यूक्रेन संघर्ष में ड्रोन अब 70-80 प्रतिशत हताहतों का कारण बन चुके हैं, जहां AI-संचालित टारगेटिंग सिस्टम ने फर्स्ट-पर्सन व्यू ड्रोन हमलों की सटीकता को 30-50 प्रतिशत से बढ़ाकर लगभग 80 प्रतिशत कर दिया है। गाजा व मध्य-पूर्व के संघर्षों में AI को पहला एआई युद्ध माना जा रहा है, जहां यह टारगेट, इंटेलिजेंस और किल चेन को कुशल बनाता है। सैन्य AI बाजार 2023 में 9.9 अरब डॉलर से बढ़कर 2035 तक 35 अरब डॉलर पहुंचने का अनुमान है, जो वैश्विक स्तर पर इसके तेज विस्तार को दर्शाता है।
AI की युद्ध में जरूरत अब बढ़ गई है क्योंकि यह फैसला लेने की गति को बढ़ाता है, सटीकता सुनिश्चित करता है व सैनिकों की जान बचाता है। ऑटोमैटिक हथियार, साइबर सुरक्षा, लॉजिस्टिक्स और सर्विलांस में AI बिना आधुनिक युद्ध जीतना असंभव है। हालांकि नैतिक चुनौतियां जैसे मशीनों के जरिए जीवन-मृत्यु और संभावित खतरे अभी मौजूद हैं, फिर भी रणनीतिक बढ़त के लिए AI अपनाना जरूरी है। देश इस तकनीक से अपनी रक्षा क्षमता मजबूत कर रहे हैं, जो भविष्य के युद्धों का आधार बनेगा।







