प्रकाश मेहरा
एग्जीक्यूटिव एडिटर
नई दिल्ली। दिल्ली के रामलीला मैदान में देशभर से आए हजारों किसानों ने एक विशाल किसान महापंचायत में हिस्सा लिया। इस आयोजन का नेतृत्व संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने किया, जिसे पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित किया गया। सुबह से ही किसानों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी, जिसके चलते मध्य दिल्ली में ट्रैफिक पर असर पड़ा और पुलिस को विशेष एडवाइजरी जारी करनी पड़ी।
पंजाब, हरियाणा, कर्नाटक, बिहार और राजस्थान सहित कई राज्यों से किसान जत्थों में यहां पहुंचे। महापंचायत का मुख्य उद्देश्य किसानों की लंबित मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाना था। मंच से विभिन्न किसान नेताओं ने सरकार की कृषि नीतियों की आलोचना करते हुए अपनी बात रखी और कई प्रस्ताव पारित किए।
क्या हैं किसानों की प्रमुख मांगें !
सभी फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी। भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते में कृषि, डेयरी और पोल्ट्री सेक्टर को बाहर रखने की मांग। किसानों के कर्ज की माफी और मजदूरों-किसानों के लिए पेंशन व्यवस्था। बिजली दरों में बढ़ोतरी पर रोक। 2020-21 किसान आंदोलन में जान गंवाने वाले किसानों के परिवारों को मुआवजा। स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करना।
कॉर्पोरेट-समर्थक नीतियों के खिलाफ विरोध
कुछ प्रमुख किसान नेताओं, जैसे जगजीत सिंह डल्लेवाल, ने कहा कि “यह महापंचायत सरकार को अपनी मांगों पर गंभीरता से विचार करने के लिए मजबूर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।”
महापंचायत सुबह 10 बजे शुरू हुई और दोपहर तक जारी रही। इस दौरान किसानों ने नारेबाजी की, भाषण दिए और अपने अधिकारों के लिए एकजुटता दिखाई। फिलहाल किसी भी तरह की हिंसा या टकराव की खबर नहीं है, लेकिन स्थिति को देखते हुए पुलिस पूरी तरह सतर्क है।







