वॉशिंगटन : ईरान युद्ध का आज 39वां दिन है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को धमकी दी है कि अगर उसने डील नहीं किया और होर्मुज समुद्री मार्ग नहीं खोला तो मंगलवार की रात ईरान पर इतने हमले करेंगे कि वह पाषाण युग में चला जाएगा लेकिन इसके बीच अमेरिका ने एक ऐसा कदम उठाया है, जिससे पश्चिम एशिया समेत पूरी दुनिया में अटकलों और अचरज का बाजार गर्म हो गया है। दरअसल, अमेरिका ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच एक बड़ा और चौंकाने वाला कदम उठाया है। ट्रंप प्रशासन ने फारस की खाड़ी से सटे बहरीन में तैनात अपने करीब 1500 नौसैनिकों और उनके परिवारों को गुप्त तरीके से वहां से निकाल लिया है।
इस गुपचुप निकासी और बहरीन से नौसैनिकों की तैनाती पर अमेरिकी यू-टर्न का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सैनिकों से कहा गया था कि वे अपने साथ केवल उतना ही सामान ले जाएं, जितना कि उनके एक बैकपैक में आ सके। इसके साथ ही अमेरिकी सैनिकों को पालतू जानवरों को भी निकालने की इजाजत दी गई थी। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि उन्हें आदेश दिया गया था कि “जो बैग में आ सके, उतना ही लेकर तुरंत निकलो।”
अचानक आदेश, हड़बड़ी में निकासी
रिपोर्ट के मुताबिक, यह निकासी ईरान के मिसाइल और ड्रोन खतरों के बीच की गई है। सैनिकों को वहां से निकलने के लिए कोई लंबी तैयारी का समय नहीं मिल सका। उन्हें सिर्फ एक निर्देश मिला, “बैग पैक करो और निकलो।” रिपोर्ट में कहा गया है कि कई लोग सिर्फ कपड़ों और जरूरी सामान के साथ ही रवाना हो गए। एक अधिकारी के मुताबिक, “वे लगभग खाली हाथ लौटे… सिर्फ उतना ही लिया जो बैकपैक में आ सका।”
क्यों अहम है बहरीन?
फारस की खाड़ी के दक्षिणी तट पर बसा बहीन सिर्फ एक छोटा द्वीप नहीं है, बल्कि यहां अमेरिकी सेना की 5वीं फ्लीट का मुख्यालय भी है, जिस पर ईरान युद्ध के बीच मंडराता खतरा बढ़ गया है। यहीं से पूरे पश्चिम एशिया में समुद्री ऑपरेशन कंट्रोल होते हैं। इसके अलावा यह क्षेत्र तेल आपूर्ति और शिपिंग रूट्स के लिए बेहद महत्वपूर्ण है लेकिन सबसे बड़ा खतरा ईरान है। यह ईरान के तट से मात्र करीब 124 नौटिकल माइल्स दूर है। यानी बहरीन ईरानी मिसाइलों और ड्रोनों की सीधी पहुंच में है। ईरान ने इस महीने की शुरुआत में भी बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए हैं।
असल खतरा और खौफ की वजह क्या?
हाल के घटनाक्रम में जहां अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को पाषाण युग में भेजने की धमकी दी है, वहीं ईरान ने भी अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने की चेतावनी दी है। ऐसे में इस क्षेत्र में ड्रोन और मिसाइल हमलों का खतरा बढ़ गया है। युद्ध में स्थिति बिगड़ने की सूरत में अमेरिकी सैन्य बेस सीधे ईरान के टारगेट ज़ोन में आ गए हैं। यही वजह है कि अमेरिका को तेजी से गुपचुप तरीके से बहरीन से अपने सैनिकों को तुरंत निकालना पड़ा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बहरीन से निकाले गए सैनिकों को सीधे अमेरिका ले जाया गया है। यह कदम साफ संकेत देता है कि अमेरिका अब ईरान पर संभावित बड़े हमले के लिए तैयार हो रहा है। दूसरी तरफ, पश्चिम एशिया में सुरक्षा स्थिति तेजी से बिगड़ने वाली है और रणनीतिक ठिकानों पर वास्तविक और तात्कालिक खतरा बढ़ गया है।
सऊदी अरब का क्या हाल?
इस तनातनी और बढ़ते खतरे का असर मिडिल-ईस्ट ,के अन्य देशों पर भी पड़ा है। सऊदी अरब ने 25 KM लंबे किंग फहद कॉजवे (King Fahd causeway) पुल को आनन-फानन में बंद कर लिया है। यह कॉजवे सऊदी को बहरीन से जोड़ता है और इसे खाड़ी के लिए काफी अहम माना जाता है। खाड़ी में बहरीन और सऊदी अरब को अमेरिका का अहम सहयोगी माना जाता है। ईरान इन दोनों देशों के कई अहम ठिकानों को निशाना बना चुका है। मंगलवार को ही ईरान ने सऊदी के एक पेट्रोकेमिकल्स साइट पर हमले किए हैं।







