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ईरान टेंशन के बीच लगा एक और करंट, लगातार 5वें महीने देश में बढ़ी महंगाई

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
April 14, 2026
in राष्ट्रीय, व्यापार
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नई दिल्ली। मार्च के महीने में रिटेल महंगाई में इजाफा देखने को मिला है. आंकड़ा 3.40 फीसदी पर पहुंच गया है. खास बात तो ये है कि रिटेल महंगाई में लगातार 5वें महीने इजाफा देखने को मिला है. उसके बाद भी देश में महंगाई दर टॉलरेंस लेवल 4 फीसदी से कम है. वैसे आरबीआई ने हाल ही में अपनी पॉलिसी मीटिंग में अनुमान जताया था कि देश में महंगाई बढ़ने की सभावना है. उसका कारण मिडिल ईस्ट वॉर है. जिसकी वजह से सप्लाई में काफी रुकावटों का सामना करना पड़ रहा है.

देश में गैस सिलेंडर के दाम काफी महंगे हो गए हैं. साथ ही इंपोर्टेड सामान के साथ कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी देखने को मिली है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर सरकार की ओर से महंगाई को लेकर आंकड़े सामने रखे हैं.

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महंगाई में इजाफा

सोमवार को जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मार्च में भारत की खुदरा महंगाई दर मामूली रूप से बढ़कर 3.40% हो गई, जो फरवरी में 3.21% थी. इसकी वजह यह रही कि मिडिल ईस्ट ?से पैदा हुए भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति-पक्ष के दबावों का असर कीमतों पर पड़ने लगा. 45 अर्थशास्त्रियों के रॉयटर्स पोल में अनुमान लगाया गया था कि मार्च में महंगाई दर मामूली रूप से बढ़कर 3.48 फीसदी तक पहुंच सकती है. इसमें ईंधन की कीमतों में हुई भारी बढ़ोतरी के असर को, ईरान युद्ध से जुड़े तनाव बढ़ने के बाद उस महीने सोने की कीमतों में हुई लगभग 11 फीसी की गिरावट ने कुछ हद तक कम कर दिया. इस बढ़ोतरी के बावजूद, संशोधित ढांचे के तहत, महंगाई दर लगातार 12 महीनों तक भारतीय रिजर्व बैंक के 4 फीसदी के मध्यम-अवधि के लक्ष्य दायरे (2%6%) से नीचे बनी रही है.

लगातार 5वें महीने महंगाई में इजाफा

वैसे देश में रिटेल महंगाई में लगातार 5वें महीने इजाफा देखने को मिला है. आंकड़ों को देखें तो अक्टूबर 2025 के बाद रिटेल महंगाई में लगातार तेजी देखने को मिल रही है, जब देश में महंगाई का आंकड़ा 0.25 फीसदी पर आ गया था. उसके बाद नवंबर के महीने में महंगाई दर 0.71 फीसदी पर आ गई थी. दिसंबर के महीने में रिटेल महंगाई की दर 1.33 फीसदी पर आ गई थी. जनवरी और फरवरी की बात करें तो महंगाई का आंकड़ा क्रमश: 2.74 फीसदी और 3.21 फीसदी पर आ गया था.

मिडिल ईस्ट में टेंशन

महंगाई के ये ताजा आंकड़े ऐसे समय में सामने आए हैं, जब ईरान, इजराइल और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच भू-राजनीतिक अनिश्चितता काफी बढ़ गई है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति में रुकावटों को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं. अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकेबंदी लगाए जाने के बाद तनाव और बढ़ गया, जिससे ऊर्जा बाजार अस्थिर हो गए और क्षेत्रीय शत्रुता और तेज हो गई. इस कदम से होर्मुज स्ट्रेट पर दबाव बढ़ गया है, जो वैश्विक तेल शिपमेंट के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है.

वाशिंगटन ने कहा कि ये प्रतिबंध ईरानी समुद्री गतिविधियों से जुड़े जहाजों को निशाना बनाएंगे, जबकि व्यापक व्यवधान को कम करने के लिए गैर-ईरानी बंदरगाहों तक आवागमन की अनुमति जारी रहेगी. हालांकि, तेहरान ने इस दबाव को खारिज कर दिया और जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी, जिससे बाजार में अनिश्चितता और गहरी हो गई.

RBI ने बाहरी जोखिमों के प्रति आगाह किया

अप्रैल में हुई मॉनेटरी पॉलिसी समिति की बैठक में, भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा कि हालांकि भारत के व्यापक आर्थिक बुनियादी सिद्धांत मजबूत बने हुए हैं, लेकिन अगर वैश्विक तनाव बना रहता है या और बढ़ता है, तो बाहरी झटके और तेज हो सकते हैं. भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने कहा था कि भारतीय अर्थव्यवस्था के बुनियादी सिद्धांत अब पहले की तुलना में अधिक मजबूत स्थिति में हैं, जिससे इसमें झटकों को झेलने की क्षमता (लचीलापन) बढ़ गई है. अर्थव्यवस्था को आपूर्ति-पक्ष के झटके का सामना करना पड़ रहा है. बदलते हालात और विकास-महंगाई के उभरते परिदृश्य पर नजर रखना और इंतजार करना ही समझदारी होगी.

बेस ईयर में हुआ बदलाव

यह संशोधित CPI ढांचे के तहत महंगाई का तीसरा आंकड़ा है. इस ढांचे में बेस ईयर को 2012 से बदलकर 2024 कर दिया गया है, और उपभोग बास्केट (खपत की टोकरी) को भी संशोधित किया गया है, ताकि मौजूदा खर्च के तरीकों को बेहतर ढंग से दर्शाया जा सके. नई सीरीज के तहत, खाने-पीने की चीजों और पेय पदार्थों का कुल वजन 45.9 फीसदी से घटकर 36.75 फीसदी हो गया है, हालांकि यह इंडेक्स का सबसे बड़ा हिस्सा बना हुआ है. अकेले खाने-पीने की चीजों का हिस्सा अब 34.77 फीसदी है.

घर, यूटिलिटी और फ्यूल से जुड़ी कैटेगरी का वजन 16.9 फीसदी से बढ़कर 17.7 फीसदी हो गया है, जबकि ट्रांसपोर्ट, कम्युनिकेशन और घरेलू सेवाओं जैसी सेवाओं का प्रतिनिधित्व अब ज्यादा हो गया है. अपडेटेड बास्केट में नए जमाने की इस्तेमाल की चीजें भी शामिल हैं, जैसे ग्रामीण आवास, OTT सब्सक्रिप्शन, वैल्यू-एडेड डेयरी उत्पाद और डिजिटल स्टोरेज डिवाइस आदि. वहीं VCR और ऑडियो कैसेट जैसी पुरानी कैटेगरी को हटा दिया गया है.

FY27 में महंगाई पर RBI का नजरिया

भारतीय रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी ने FY27 के लिए CPI महंगाई दर 4.6 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है. तिमाही अनुमानों के मुताबिक, Q1 में यह 4.0 फीसदी, Q2 में 4.4 फीसदी, Q3 में 5.2 फीसदी और Q4 में घटकर 4.7 फीसदी हो जाएगी. कोर महंगाई दर 4.4 फीसदी रहने का अनुमान है.

सेंट्रल बैंक ने यह भी बताया कि यह पहली बार है जब उसने इतना विस्तृत तिमाही ब्योरा दिया है, जो पारदर्शिता और स्टेकहोल्डर के सुझावों पर बढ़ते फोकस को दिखाता है. पिछली पॉलिसी समीक्षा के बाद से, RBI ने कहा है कि वैश्विक अनिश्चितता बढ़ी है. हालांकि महंगाई मोटे तौर पर काबू में है, फिर भी इसके बढ़ने का जोखिम बना हुआ है. इसमें संभावित ‘सेकंड-राउंड इफेक्ट’ भी शामिल हैं, अगर भू-राजनीतिक दबाव बढ़ता रहता है.

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