नई दिल्ली। सरकार एक बार फिर से महिला आरक्षण और परिसीमन बिल सदन में लाने वाली है? इस तरह की बातें राजनीतिक गलियारों में जोर पकड़ रही हैं, क्योंकि मानसून सत्र खत्म होने के बाद भी राष्ट्रपति ने अभी तक सत्र समाप्ति की औपचारिक मंजूरी नहीं दी है. इधर, बीजेपी की तरफ से रविवार (23 अगस्त) को एक बार फिर से अपील की गई है कि महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पास किया जाए. यह बयान बीजेपी ने राहुल गांधी की तरफ से शनिवार को महाराष्ट्र के पुणे में आयोजित किए गए छात्रों की गूंज कार्यक्रम के दौरान महिला सशक्तिकरण और भारत की पितृ सत्ता वाली सोच पर सवाल उठाने के बाद दिया है.
कांग्रेस समेत विपक्षी नेताओं से स्मृति ईरानी की अपील
बीजेपी की राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी और कांग्रेस समेत विपक्ष के नेताओं से अपील की थी कि अगर महिलाओं की बात करते हैं, तो केंद्र सरकार जो 2029 में उनको 33 फीसदी आरक्षण देने की बात कर रही है, उस बिल को संसद से पास करवाने में मदद करें. ऐसे में सरकार ने इस बिल को लेकर अपना रुख साफ कर दिया है. सरकार अब जल्द से जल्द इन दोनों बिलों को संसद से पास करवाने की कोशिश में जुटी हुई है.
13 को अगस्त को भले ही सदन का मानसून सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किया जा चुका है, लेकिन अभी तक इस सत्र को औपचारिक रूप से खत्म करने की राष्ट्रपति की मंजूरी नहीं मिली है. ऐसे में चर्चाएं हैं कि सरकार इस बीच सत्र को आगे बढ़ा सकती है और सदन के पटल पर महिला आरक्षण और परिसीमन बिल टेबल पर फिर से रख सकती है. किसी भी सत्र को खत्म करने के लिए राष्ट्रपति की मंजूरी होना जरूरी है. इधर, सरकार लगातार बैक डोर से इस बिल को पास कराने के लिए एक माहौल बनाने की कोशिश में जुटी हुई है. अगले दो से तीन हफ्ते बाद सरकार सदन में बिल ला सकती है. कई विपक्षी पार्टियों ने भी इसको लेकर अंदेशा जाहिर किया है.
सत्रावसान न होने पर कांग्रेस ने उठाए सवाल
लोकसभा के अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बाद भी अभी तक राष्ट्रपति की मंजूरी न मिलने के बाद विपक्षी नेता जयराम रमेश ने सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा है कि अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने और उसके सत्र अवसान (Prorogation) के बीच का समय आमतौर पर दो से चार दिन का होता है. ऐसे कई उदाहरण हैं, जब स्थगन और सत्रावसान एक ही दिन हुए हैं. इस लोकसभा के अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हुए दस दिन बीत चुके हैं.
लेकिन अभी भी इसके सत्रावसान के बारे में किसी तरह की जानकारी नहीं है. यह सच है कि 2015 में मॉनसून सत्र के लिए अंतर 28 दिन का था. 2021 में यह 20 दिन का था. लेकिन तब कोई खतरानक चालें नहीं चली जा रही थीं. अब इतनी असामान्य देरी का क्या कारण है? क्या केंद्रीय गृहमंत्री अभी भी विशेष सत्र में परिसीमन पर संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए अपने उस विवादास्पद 2/3 बहुमत की तलाश में है?






