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Home राष्ट्रीय

परिसीमन पर भ्रम फैला रहा विपक्ष? इन आंकड़ों से समझें

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
April 15, 2026
in राष्ट्रीय
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परिसीमन आयोग
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नई दिल्ली। परिसीमन से जुड़े विधेयकों को लेकर इस सप्ताह होने वाले संसद के विशेष सत्र से पहले सरकार और विपक्ष के बीच टकराव तेज हो गया है। कांग्रेस ने इस कदम की मंशा पर सवाल उठाए। जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने उस पर अतीत में महिलाओं को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। दक्षिण भारत के दो प्रमुख गैर-BJP शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों तमिलनाडु के एम.के. स्टालिन और तेलंगाना के ए. रेवंत रेड्डी ने परिसीमन के मुद्दे पर केंद्र पर हमला तेज कर दिया है।

स्टालिन ने चेतावनी दी है कि यदि तमिलनाडु के साथ कोई अन्याय हुआ तो व्यापक आंदोलन होगा। जबकि रेड्डी ने इसे अन्याय बताया। रेड्डी ने प्रधानमंत्री को खुले पत्र में सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की। उन्होंने कहा कि केवल जनसंख्या के आधार पर लोकसभा सीटों में वृद्धि करने से देश के संघीय संतुलन पर असर पड़ेगा।

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उन्होंने कहा कि दक्षिणी राज्यों के लिए यह अनुपात आधारित मॉडल स्वीकार्य नहीं होगा। सीएम ने कहा कि बिना उनकी चिंताओं को दूर किए आगे बढ़ने पर व्यापक विरोध होगा। उन्होंने आंध्र प्रदेश के एन. चंद्रबाबू नायडू, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन, पुडुचेरी के मुख्यमंत्री एन. रंगासामी और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री स्टालिन से मिलकर सामूहिक रणनीति बनाने की भी अपील की।

जोरदार विरोध प्रदर्शन की धमकी

वीडियो संदेश में स्टालिन ने कहा कि यदि परिसीमन के जरिये उत्तरी राज्यों की राजनीतिक ताकत असंतुलित तरीके से बढ़ाई गई, तो तमिलनाडु में जोरदार विरोध प्रदर्शन होंगे। महिला आरक्षण कानून को 2029 के आम चुनाव से पहले लागू करने के लिए परिसीमन करके लोकसभा सीटों की संख्या मौजूदा 543 से बढ़ाकर लगभग 850 तक की जा सकती है। संविधान संशोधन विधेयक के मसौदे के अनुसार, राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए सीटें बढ़ाई जाएंगी।

सरकार द्वारा महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयक सांसदों के बीच साझा किए जाने के बाद कांग्रेस ने कहा कि यदि किसी विधेयक की मंशा भ्रामक हो, तो उससे संसदीय लोकतंत्र को गंभीर नुकसान हो सकता है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा, “जब किसी विधेयक की नीयत और उसकी सामग्री दोनों संदिग्ध हों, तो लोकतंत्र को भारी नुकसान होता है।”

सरकार का पलटवार

वहीं, सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने प्रधानमंत्री के इस कदम को ऐतिहासिक बताते हुए समर्थन दिया। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि यह पहल महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। भारतीय लोकतंत्र में स्वर्णिम अध्याय जोड़ेगी।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने भी सभी दलों और सांसदों से महिला आरक्षण अधिनियम में संशोधन का समर्थन करने की अपील की। केंद्रीय मंत्री रक्षा खडसे ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और लोकतंत्र को मजबूत बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया।

BJP नेता शाजिया इल्मी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि उसने महिलाओं को नजरअंदाज किया। 16 से 18 अप्रैल तक संसद का तीन-दिवसीय विशेष सत्र बुलाया गया है। इसमें ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (महिला आरक्षण कानून) में संशोधन लाकर 2029 से इसके क्रियान्वयन का रास्ता साफ किया जाएगा।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया कि परिसीमन प्रक्रिया से दक्षिण भारतीय राज्यों के हितों पर कोई आंच नहीं आएगी। गोयल ने इन आशंकाओं को बेबुनियाद बताया कि जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले दक्षिणी राज्यों को सीटों के नुकसान का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि सीटों की संख्या में देशभर में आनुपातिक वृद्धि होगी, जिससे संतुलन बना रहेगा। उन्होंने कहा कि किसी भी राज्य की स्थिति कमजोर नहीं होगी।

16 अप्रैल को पेश होगा बिल

लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को लागू देने के लिए 16 अप्रैल को एक विधेयक संसद में पेश किया जाएगा। इसमें संसद के निचले सदन में सदस्यों की मौजूदा संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रावधान है। इसके साथ ही, सरकार परिसीमन आयोग के गठन के लिए भी एक विधेयक तथा इन्हीं से संबंधित केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन विधेयक), 2026 लाने की तैयारी में है। नारी शक्ति वंदन अधिनयम में संशोधन करने वाले विधेयक में निर्वाचन क्षेत्रों का फिर से निर्धारण करने के लिए 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाया जाएगा।

सरकार परिसीमन विधेयक, 2026 पेश करेगी, जिसके तहत केंद्र सरकार लेटेस्ट जनगणना आंकड़ों के आधार पर और संविधान के प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए लोकसभा तथा विधानसभाओं में सीटों के निर्धारण के लिए एक परिसीमन आयोग का गठन कर सकेगी। नए विधेयक के कई प्रावधान 2002 के कानून के समान हैं। इस विधेयक के माध्यम से 2002 के परिसीमन कानून को निरस्त कर दिया जाएगा।

NDA पर दक्षिणी राज्यों के साथ विश्वासघात की क्या है सच्चाई

परिसीमन विधेयक पर NDA के सूत्रों ने उन आरोपों का खंडन किया है जिसमें कहा NDA पर दक्षिणी राज्यों के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाया गया है:-

  • सूत्रों ने कहा कि सीटों की अंतिम संख्या परिसीमन आयोग द्वारा तय की जाएगी। इसलिए, विधेयक में सीटों की कोई सटीक संख्या या कोई निश्चित प्रतिशत (जैसे 50%) निर्धारित नहीं किया गया है।
  • इसके अलावा 850 का आंकड़ा लोकसभा की कुल सीटों की केवल ऊपरी सीमा को दर्शाता है।
  • उन्होंने कहा कि सीटों का आवंटन आनुपातिक प्रतिनिधित्व के आधार पर किया जाएगा।
  • इस फार्मूले के तहत दक्षिण भारतीय राज्यों को लाभ होने का दावा किया गया है।
  • 2011 की जनगणना को रेफरेंस पॉइंट के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
  • दक्षिणी राज्यों में जनसंख्या नियंत्रण के अधिक प्रभावी उपायों के कारण उन्हें सीटों के आवंटन में उत्तरी राज्यों की तुलना में लाभ मिल सकता है, जहां जनसंख्या वृद्धि दर अधिक रही है।

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