नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और होर्मुज जलसंधि की नाकेबंदी ने भारत की रसोई तक पहुंचने वाली गैस की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के अनुसार, वैश्विक LPG सप्लाई चेन को पूरी तरह बहाल होने में 3 से 4 साल का समय लग सकता है। संकट की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अभी तक यह भी स्पष्ट नहीं है कि खाड़ी देशों में उत्पादन अस्थायी रूप से रुका है या वहां के इंफ्रास्ट्रक्चर को स्थायी नुकसान हुआ है।
सप्लाई बहाल होने में इतनी देरी क्यों?
सरकारी अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि आपूर्ति बाधित होने के पीछे कई बड़ी वजहें है\। उन्होंने बताया कि, अभी यह साफ नहीं है कि तेल के कुएं पूरी तरह खाली हो चुके हैं या प्रोडक्शन को युद्ध के कारण रोका गया है। वहीं विदेशी सप्लायर्स से मिले इनपुट के आधार पर, सप्लाई चेन को फिर से पटरी पर लाने में कम से कम 3 साल और उससे ज्यादा का समय भी लग सकता है। ईरान द्वारा सऊदी अरब और UAE के ऊर्जा ठिकानों पर किए गए हमलों ने गैस उत्पादन और लोडिंग की क्षमता को बुरी तरह प्रभावित किया है।
इंपोर्ट पर भारी निर्भरता बनी हुई है भारत की ‘दुखती रग’
भारत अपनी LPG खपत का लगभग 60% हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है, जो इसे वैश्विक झटकों के प्रति बेहद संवेदनशील बनाता है। युद्ध से पहले भारत की 90% LPG सप्लाई ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के रास्ते आती थी। मार्च 24 तक खाड़ी देशों से होने वाले आयात की हिस्सेदारी घटकर 55% रह गई है, जो सप्लाई में बड़ी रुकावट का संकेत है। रुबिक्स डेटा साइंसेज की रिपोर्ट के अनुसार, नए रास्ते खोजने के बावजूद आपूर्ति में 40-50% की कमी बनी रह सकती है।
कम स्टॉक की वजह से बढ़ रही है कीमतें
भारत की सालाना LPG डिमांड करीब 3.3 करोड़ टन है, लेकिन भंडारण की क्षमता चिंताजनक है। मार्च के मध्य तक भारत के पास केवल 15 दिनों की खपत के बराबर स्टॉक था। मार्च के मध्य से अब तक घरेलू 14.2 किलो वाले सिलेंडर की कीमत ₹60 और कमर्शियल सिलेंडर की कीमत ₹115 तक बढ़ चुकी है। बढ़ती कीमतों के कारण ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) पर सब्सिडी का आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
किन देशों पर निर्भर है भारत?
भारत की 92% LPG सप्लाई मुख्य रूप से छह देशों से आती है। UAE और कतर भारत के सबसे बड़े सप्लायर हैं। भारत के LPG इंपोर्ट में UAE की 41% वहीं कतर की 22% हिस्सेदारी है। चूंकि ईरान के हमलों का सबसे ज्यादा असर UAE पर पड़ा है, इसलिए भारत के लिए जोखिम और बढ़ गया है।सऊदी अरब, कुवैत, बहरीन और ओमान भी भारत के प्रमुख सप्लायर हैं।
सरकार का ‘एक्शन प्लान’ और चुनौतियां
सप्लाई बनाए रखने के लिए सरकार कई मोर्चों पर काम कर रही है:
विकल्पों की तलाश: कोविड-19 के दौरान अपनाई गई रणनीतियों जैसे- नए देशों से आयात और रूट बदलना आदि को फिर से लागू किया जा रहा है।
घरेलू उत्पादन: रिफाइनरियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपना LPG उत्पादन अधिकतम स्तर पर ले जाएं।
MSME पर मार: महंगी गैस के कारण होटल, रेस्टोरेंट और MSMEs की लागत बढ़ गई है, जिससे उनके कारोबार पर संकट मंडरा रहा है।







