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संघ की शाखा में डॉ. अम्बेडकर ने किया सामाजिक समरसता का अनुभव : अशोक पांडेय

"राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और डॉ. अम्बेडकर" विषय पर विश्व संवाद केंद्र, मध्यप्रदेश में विशेष व्याख्यान का आयोजन

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
April 15, 2026
in राष्ट्रीय, विशेष
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Rashtriya Swayamsevak Sangh
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भोपाल। विश्व संवाद केंद्र, मध्यप्रदेश की ओर से सामाजिक समरसता के अग्रदूत भीमराव रामजी अंबेडकर की जयंती के अवसर पर “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और डॉ. अंबेडकर” विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने अंबेडकर के व्यक्तित्व और कृतित्व को व्यापक परिप्रेक्ष्य में रखते हुए उनके विचारों की समकालीन प्रासंगिकता पर विस्तार से प्रकाश डाला।

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मुख्य वक्ता मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मध्यभारत प्रांत के प्रांत संघचालक अशोक पांडे ने ऐतिहासिक संदर्भों के साथ अपने विचार रखते हुए बताया कि 2 जनवरी 1940 को सतारा के कराड में डॉ. अंबेडकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा में गए थे और वहां उन्होंने सामाजिक समरसता का अनुभव किया। ‘केसरी’ समाचार पत्र में प्रकाशित समाचार के अनुसार, डॉ. अम्बेडकर ने कहा था कि कुछ बातों से असहमति हो सकती है लेकिन संघ के काम की मैं सराहना करता हूँ।

पुणे के संघ शिक्षा वर्ग में भी डॉ आंबेडकर शामिल हुए। वहां उन्होंने देखा कि सभी स्वयंसेवक सामाजिक समरसता के साथ रह रहे हैं। 1949 में संघ के तत्कालीन सरसंघचालक श्रीगुरुजी और डॉ. अम्बेडकर की भेंट का उल्लेख भी किया। उन्होंने कहा कि केशव बलिराम हेडगेवार ने 1920 में ही शोषणमुक्त समाज की अवधारणा प्रस्तुत कर दी थी। पांडे जी ने स्पष्ट किया कि कानून के माध्यम से समता स्थापित की जा सकती है, लेकिन समरसता केवल आत्मीयता और बंधुत्व के भाव से ही संभव है।

उन्होंने आगे कहा कि 1963 में माधव सदाशिव गोलवलकर के मार्गदर्शन में समरसता का जो संदेश समाज के सामने आया और जिसे आगे बालासाहब देवरस ने विस्तार दिया, उसकी प्रेरणा डॉ. अंबेडकर के विचारों से ही जुड़ी हुई है। “मंदिर, कुआं और श्मशान” जैसे प्रतीकों के माध्यम से उन्होंने सामाजिक एकात्मता के भाव को समझाया और कहा कि यदि समाज एकत्व की दिशा में आगे बढ़े, तो व्यापक सामाजिक कल्याण संभव है।

मुख्य अतिथि बाबा साहब भीमराव अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय, लखनऊ के पूर्व कुलाधिपति तथा मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग के पूर्व सदस्य प्रकाश बरतूनिया ने कहा कि यह मध्यप्रदेश के लिए गौरव का विषय है कि अंबेडकर का जन्म इसी भूमि पर हुआ। उन्होंने बताया कि अंबेडकर ने विश्व के अनेक संविधानों का अध्ययन किया और भारतीय इतिहास एवं दर्शन को आत्मसात किया, जिसके परिणामस्वरूप उनके विचारों में भारतीय जीवन मूल्यों की स्पष्ट झलक मिलती है। उन्होंने आरक्षण, समरसता, संविधान निर्माण, धर्म और राष्ट्र जैसे विषयों पर अंबेडकर के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि उनके संबंधों को लेकर फैले भ्रम को दूर करने के लिए धनंजय कीर और दत्तोपंत ठेंगड़ी के लेखन को पढ़ना चाहिए।

कार्यक्रम की प्रस्तावना रखते हुए विश्व संवाद केंद्र, मध्यप्रदेश के सचिव लोकेंद्र सिंह ने कहा कि डॉ. अंबेडकर को किसी एक विचारधारा या वर्ग विशेष तक सीमित करना उनके व्यक्तित्व के साथ अन्याय है। उन्होंने कहा कि डॉ अंबेडकर एक बहुआयामी चिंतक थे, जिन्होंने धर्म, अर्थव्यवस्था, इस्लाम, कम्युनिज्म और राष्ट्र जैसे विविध विषयों पर गहन अध्ययन किया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अंबेडकर और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संबंधों को योजनाबद्ध तरीके से नजरअंदाज किया गया है, जिसे समझने के लिए दत्तोपंत ठेंगड़ी के साहित्य का अध्ययन महत्वपूर्ण है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्व संवाद केंद्र, मध्यप्रदेश के अध्यक्ष लाजपत आहूजा ने अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि डॉ. अंबेडकर ऐसे चिंतक थे जिन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि आर्य इसी भूमि के मूल निवासी हैं। उन्होंने अंबेडकर को “युगनायक” बताते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपने प्रारंभ से ही उनके विचारों को आत्मसात किया है।

कार्यक्रम के दौरान अंबेडकर साहित्य का स्टॉल आकर्षण का केंद्र रहा, जहां उपस्थित लोगों ने उनके विभिन्न ग्रंथों का अवलोकन किया। साथ ही “हिंदू गर्जना” के गो-विशेषांक का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम का संचालन सृष्टि झा ने किया और आभार प्रदर्शन विश्व संवाद केंद्र न्यास के पूर्व अध्यक्ष एवं संस्थापक न्यासी लक्ष्मेंद्र माहेश्वरी जी ने किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में प्रबुद्धजन, सामाजिक कार्यकर्ता एवं युवा उपस्थित रहे।

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