देहरादून। अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर रविवार को चारधाम यात्रा का आगाज हो गया। उत्तरकाशी में स्थित दो पवित्र धामों गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुल गए। मां गंगा के जयकारों के बीच गंगोत्री मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए। ठीक 12.15 पर गंगोत्री और ठीक 12.35 पर यमुनोत्री धाम के कपाट विधि-विधान से खोले गए। कपाटोद्घाटन के साक्षी बने सैकड़ों लोगों ने मंदिर में अखंड ज्योति के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया। इस मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने गंगा में डुबकी आस्था डुबकी लगाई।
गंगोत्री धाम के कपाट खुले
गंगोत्री मंदिर समिति के सचिव सुरेश सेमवाल ने बताया कि रविवार सुबह सात बजे भैरव घाटी स्थित प्राचीन भैरव मंदिर से मां गंगा की डोली यात्रा गंगोत्री धाम के लिए रवाना हुई। गंगोत्री मुख्य द्वार से मंदिर तक आर्मी के पाइप बैंड और पारंपरिक ढोल-दमाऊं एवं रणसिंघे की धुन पर झूमते श्रद्धालुओं के बीच मां गंगा की डोली यात्रा 9 बजे अपने धाम गंगोत्री पहुंची। जहां डोली का भव्य स्वागत किया गया।
मां की डोली पर फूलों की बरसात, झूमे भक्तगण
इस मौके पर तीर्थ पुरोहितों और यात्रा कारोबारियों ने गंगा जी की डोली पर फूलों की बरसात की। इसके बाद यहां गंगा पूजन, गंगा सहस्त्रनाम, गंगा लहरी, श्रीशुक्त आदि के पाठ के साथ ही वैदिक मंत्रोच्चार के साथ धार्मिक अनुष्ठान किया गया। जिसके बाद 12 बजकर 15 मिनट पर गंगोत्री मंदिर के कपाट देश विदेश के श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए। जिकसे बाद सैकड़ों श्रद्धालु मंदिर के भीतर जल रही अखंड ज्योति के साक्षी बने। मंदिर के कपाट खुलने के साथ ही गंगा जी के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगने लगा। हजारों श्रद्धालुओं ने अक्षय तृतीया पर गंगा में डुबकी लगाने के साथ ही गंगोत्री धाम में दान कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
वैदिक मंत्रोच्चार के साथ यमुनोत्री धाम के कपाट खुले
बड़कोट। अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर विश्व प्रसिद्ध यमुनोत्री धाम के कपाट रविवार को विधिवत पूजा-अर्चना एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए। शुभ लग्नानुसार दोपहर 12 बजकर 35 मिनट पर कपाटोद्घाटन हुआ, जिसके साथ ही ग्रीष्मकालीन चारधाम यात्रा का विधिवत शुभारंभ भी हो गया। कपाट खुलने के बाद अब आगामी छह माह तक देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु यमुनोत्री धाम में मां यमुना के दर्शन कर सकेंगे।
अक्षय तृतीया के अवसर पर सुबह मां यमुना की शीतकालीन गद्दी स्थल खुशीमठ (खरसाली) से पारंपरिक विधि-विधान के साथ डोली यात्रा प्रारंभ हुई। शनिदेव की डोली की अगुवाई में सुबह साढ़े आठ बजे मां यमुना की डोली यमुनोत्री धाम के लिए रवाना हुई। इस दौरान ग्रामीणों ने भव्य ढंग से मां यमुना को विदाई दी। पूरे यमुनोत्री धाम क्षेत्र पारंपरिक वाद्य यंत्रों व आईटीबीपी देहरादून के बैंड की धुन से गुंजायमान रहा तथा मां यमुना के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा।
खुशीमठ से प्रस्थान करने के बाद डोली यात्रा यमुनोत्री धाम पहुंची, जहां हवन-पूजन एवं विधिवत अनुष्ठान संपन्न किए गए। इसके पश्चात शुभ मुहूर्त में दोपहर 12:35 बजे परंपरा अनुसार कपाट खोल दिए गए। इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। कपाट खुलने के साथ ही यमुनोत्री धाम में श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो गई है और पूरे क्षेत्र में आस्था व उत्साह का माहौल बना हुआ है।
मोबाइल, रील पर पाबंदी
इसके अलावा, इस बार चारों धाम के मंदिर परिसरों में मोबाइल फोन और कैमरों के उपयोग पर भी सख्त प्रतिबंध लगाया गया है जिसके तहत बदरीनाथ और केदारनाथ में श्रद्धालुओं को परिसर के बाहर ही अपने मोबाइल व कैमरे जमा करने होंगे, जबकि गंगोत्री व यमुनोत्री में मंदिर परिसर से 100 मीटर के दायरे में इनके उपयोग पर रोक रहेगी। अधिकारियों के अनुसार, पिछले वर्षों में दर्शन व्यवस्था में आई बाधाओं को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।
इस साल प्लास्टिक मुक्त चारधाम यात्रा
मुख्यमंत्री ने चारधाम यात्रा को आत्मिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करने वाला बताते हुए कहा कि राज्य सरकार का संकल्प यात्रा को सुगम, सुरक्षित, सुव्यवस्थित और दिव्य बनाना है। उन्होंने श्रद्धालुओं से स्वच्छता बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि देवभूमि की पवित्रता बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में इस वर्ष ‘प्लास्टिक मुक्त’ और ‘हरित’ चारधाम यात्रा का लक्ष्य रखा गया है, जिसके तहत सभी वाहनों में कूड़ादान रखना अनिवार्य किया गया है।
उन्होंने कहा, ”जैसे हम अपने घर के मंदिर को साफ और पवित्र रखते हैं, वैसे ही देवभूमि को भी स्वच्छ और पवित्र बनाए रखना है।” मुख्यमंत्री ने कहा कि यात्रा को और सुगम बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है, जिनमें हाल में करीब 12 हजार करोड़ रुपये की लगात से तैयार दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे, बारहमासी सड़क परियोजना तथा गौरीकुंड-केदारनाथ और गोविंदघाट-हेमकुंड साहिब रोपवे परियोजनाएं शामिल हैं।
उम्मीदः इस साल चारधाम यात्रा सारे रिकॉर्ड तोड़ेगी
उन्होंने विश्वास जताया कि इस वर्ष की चारधाम यात्रा अपने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ेगी । प्राकृतिक आपदाओं के बावजूद पिछले वर्ष चारधाम यात्रा में 51 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे थे। इस बार भी श्रद्धालुओं में खासा उत्साह है और अब तक करीब 19 लाख लोग ऑनलाइन और ऑफलाइन पंजीकरण करा चुके हैं।







