नई दिल्ली। तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) ने तमिलनाडु के राजनीतिक इतिहास में एक नया इतिहास रच दिया है। अभिनेता से नेता बने सी. जोसेफ. विजय ने तमिल राज्य में DMK-AIDMK के दशकों लंबे वर्चस्व को खत्म कर दिया। सत्तारूढ़ डीएमके तीसरे नंबर पर खिसक गई है। तमिलनाडु में सोमवार को विधानसभा चुनाव की मतगणना जारी रहने के बीच अभिनेता-नेता विजय की पार्टी 107 सीटों पर बढ़त के साथ सबसे आगे चल रही है। वहीं 55 सीटों पर यह दूसरे पायदान पर हैं।
तमिलनाडु चुनाव में 100 से ज्यादा सीटों पर बढ़त बनाने और राज्य में सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरने के बाद विजय के घर की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। मतगणना के बीच टीवीके के प्रवक्ता फेलिक्स गेराल्ड ने भरोसा जताया कि तमिलनाडु में पार्टी सरकार बनाने जा रही है। उन्होंने दावा किया कि तमिलनाडु की जनता ने टीवीके को इसलिए चुना है क्योंकि वे मौजूदा राजनीतिक दलों से तंग आ चुके हैं।
उन्होंने कहा, ”बेशक उनके (मौजूदा दल) पास 50 या 75 साल का अनुभव है लेकिन इस अनुभव से उन्होंने सिर्फ राज्य को लूटने का काम किया।” उन्होंने कहा कि मतदाता टीवीके पर भरोसा करते हैं और उसे एक विकल्प के रूप में देखते हैं। चुनाव प्रचार के दौरान पार्टी नेता विजय की सीमित मीडिया उपस्थिति के बारे में पूछे जाने पर गेराल्ड ने कहा कि नेता मीडिया के जरिए बात करने के बजाय ‘सीधे जनता से बात करना’ पसंद करते हैं। तमिलनाडु में टीवीके की इस ऐतिहासिक जीत के पांच सबसे बड़े कारण कौन से रहे? आइये समझते हैं कि आखिर वो कौन सी वजह हैं जिनके चलते टीवीके तमिलनाडु में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है…
चुनावी वादे
टीवीके अपने चुनावी घोषणापत्र में जनता से बड़े-बड़े वादे किए थ। परिवार की महिला मुखिया को प्रति माह 2,500 रुपये की सहायता और ‘ईमानदार प्रशासन’ शामिल हैं। हालांकि 2026 के विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी के घोषणापत्र में घोषित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के लिए धन की व्यवस्था को लेकर चुनाव से पहले बहस हुई थी। लेकिन पार्टी ने अपने वादों को पूरा करने को लेकर भरोसा जताया है। जानकारी के मुताबिक, सरकार बनती है तो ये कल्याणकारी योजनाएं टीवीके की प्राथमिकता होंगी।
इसके अलावा, टीवीके ने 60 वर्ष से कम आयु की महिलाओं के लिए समान योजनाओं के लाभार्थियों को छोड़कर हर महीने 2,500 रुपये की सहायता देने का वादा किया है। इसके साथ ही कम आय वाले परिवारों की दुल्हनों को आठ ग्राम सोना और रेशमी साड़ी देने का भी आश्वासन दिया गया है। पार्टी के आश्वासनों में पांच लाख नई सरकारी नौकरियां पैदा करना, विद्यार्थियों के लिए पांच लाख वेतनयुक्त प्रशिक्षण अवसर उपलब्ध कराना, बेरोजगार स्नातकों को प्रतिमाह 4,000 रुपये का भत्ता देना और उच्च शिक्षा के लिए 20 लाख रुपये तक का एजुकेशन लोन ऑफर करना शामिल है।
रैलियों में उमड़ी भारी भीड़
विजय की शुरुआती राजनीतिक रैलियों में बड़ी संख्या में भीड़ उमड़ी। विजय के फैंस उनके समर्थक बनकर वोट बैंक बने। थलापति विजय की रैलियों में युवाओं की खासी भीड़ दिखी और वेन्यू खचाखच भरे दिखे। इस लामबंदी ने TVK को उसके संगठनात्मक आधार से कहीं ज़्यादा व्यापक पहचान दिलाई।
गठबंधन की राजनीति से दूरी
टीवीके ने चुनाव की शुरुआत में ही यह साफ संदेश दिया था कि पार्टी अकेले चुनाव लड़ने जा रही है। डीएमके और एआईएडीएमके के साथ टीवीके ने किसी तरह का कोई गठबंधन नहीं किया और तमिलनाडु की ‘द्रविड़ राजनीति’ में खुद को एक वैकल्पिक राजनीतिक पार्टी के तौर पर पेश किया।
सत्ता विरोधी लहर
TVK ने अपने चुनावी अभियान में सत्ता-विरोधी माहौल पर जोर दिया। इसके अलावा शासन की आलोचना और ‘बदलाव’ के मुद्दे पर भी जोर दिया। टीवीके ने जनता के सामने सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोपों और नागरिक विकास में कमियों को निशाना बनाया। जनता ने टीवीके से जुड़ाव महसूस किया और शायद इसी ‘कनेक्ट’ ने टीवीके को सबसे बड़ी पार्टी बनाने में मदद की।
सोशल मीडिया के जरिए पहुंच
विजय की पार्टी ने डिजिटल प्लेटफॉर्म, फैन नेटवर्क और ऑनलाइन मोबलाइज़ेशन का खूब इस्तेमाल किया। युवा मतदाताओं से उन्हीं के अंदाज में कनेक्ट किया और यही एक बड़ी वजह रही जिससे वह पारंपरिक बूथ-स्तर की पार्टी मशीनरी को दरकिनार कर सीधे युवा मतदाताओं तक पहुंच सकी।
इसके अलावा स्टार पावर का जलवा भी काम आया। विजय अपनी फिल्मी लोकप्रियता DMK और AIADMK की मजबूत जमीनी पकड़ के मुकाबले चुनावी ताकत में बदलने में कामयाब रहे जिससे TVK की एंट्री एक दिलचस्प राजनीतिक प्रयोग बन गई है।
‘बिना पैसे के काम किया’
जैसे ही पार्टी ने 101 सीट पर बढ़त बनाई, पनय्यूर स्थित टीवीके के हेडऑफिस में जश्न का माहौल शुरू हो गया। समर्थक पार्टी नेता विजय की तस्वीरें लेकर उमड़ पड़े। एक कार्यकर्ता तांगराज ने कहा, ”वह मेरे दिल में बसते हैं, इसलिए हमने उनकी तस्वीर अपने सीने पर लगा रखी है।”
समर्थकों ने कहा कि उनका चुनाव प्रचार धन के बल पर नहीं बल्कि जमीनी मेहनत पर टिका था। तांगराज ने कहा, ”हमने बिना धन के काम किया। दूसरे दलों में लोग धन लेकर काम करते हैं, लेकिन हमने बिना किसी लालच के काम किया।” पार्टी को अपने दम पर बहुमत मिलने का पूरा भरोसा है। उन्होंने दावा किया, ”हम जरूर जीतेंगे और अपने बहुमत से मुख्यमंत्री बनाएंगे।”
पल्लवरम निर्वाचन क्षेत्र से आए कस्पर राजा ने भी यही उत्साह दिखाया। उन्होंने कहा कि पार्टी को भरोसा है कि वह 130 सीट का आंकड़ हासिल कर लेगी और अपने बल पर बहुमत हासिल करेगी। उन्होंने कहा, ”अगर पार्टी सत्ता में आई तो यह जनता की सरकार होगी। हमें पूरा यकीन है कि वह जनता के लिए अच्छा काम करेंगे।” टीवीके के एक प्रतिनिधि ने राजनीतिक विरोधियों की आलोचनाओं को सिरे से खारिज करते हुए इन रुझानों को बदलाव का जनादेश बताया।
पश्चिम बंगाल में पहली बार भारतीय जनता पार्टी (BJP) ऐतिहासिक जीत करने की ओर बढ़ रही है। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को हटाने की ओर बढ़ रही भाजपा और सहयोगी पार्टियों के गठबंधन एनडीए की अब 22 राज्य विधानसभाओं में सत्ता हो गई है। 2025 के आखिर तक 21 राज्यों में बीजेपी या एनडीए की सरकार थी।







