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पीएम मोदी ने सोमनाथ में किया कुंभाअभिषेक, जानें इस अनुष्ठान से जुड़ी खास बातें और महत्व

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
May 11, 2026
in राष्ट्रीय
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PM Modi
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नई दिल्ली।  सोमनाथ मंदिर के इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में सोमनाथ मंदिर के 155 फीट ऊंचे शिखर कलश का कुंभाभिषेक किया गया। देश के 11 पवित्र तीर्थों से लाए गए 1100 लीटर पवित्र जल से इस कलश का अभिषेक किया गया, जो 1.86 टन वजन का है। यह ऐतिहासिक अनुष्ठान सोमनाथ अमृत महोत्सव के तहत हुआ, जिसमें मंदिर की दिव्य ऊर्जा को पुनः जागृत करने का कार्य किया गया।

कुंभाभिषेक का विशेष महत्व

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कुंभाभिषेक मंदिर की आध्यात्मिक शक्ति को नवीनीकृत करने का प्राचीन वैदिक अनुष्ठान है। संस्कृत में ‘कुंभ’ का अर्थ कलश और ‘अभिषेक’ का अर्थ दिव्य स्नान है। इसमें विशेष मंत्रों से अभिमंत्रित जल को मंदिर के शिखर, कलश और देव विग्रहों पर चढ़ाया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, समय के साथ मंदिर की ऊर्जा कम होने लगती है। कुंभाभिषेक के जरिए उस ऊर्जा को फिर से सक्रिय किया जाता है।

सोमनाथ में पहली बार हुआ यह अनुष्ठान

सोमनाथ मंदिर में पहली बार शिखर कलश का कुंभाभिषेक इस भव्य रूप में किया गया। 350 टन की विशेष क्रेन की मदद से 1.86 टन के कलश को 155 फीट की ऊंचाई पर पहुंचाया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पुनीत कार्य को संपन्न किया। इसके बाद भगवान सोमनाथ की महापूजा में भी वे शामिल हुए। इस अवसर पर नूतन ध्वजारोहण का कार्यक्रम भी हुआ।

मंदिर को मानव शरीर का प्रतीक माना जाता है

सनातन परंपरा में मंदिर को मानव शरीर का प्रतीक माना गया है। गर्भगृह को सिर, शिखर को नाक, महामंडप को छाती और ध्वज स्तंभ को रीढ़ की हड्डी कहा जाता है। शिखर और कलश मंदिर की सबसे महत्वपूर्ण भाग हैं, क्योंकि ये ब्रह्मांडीय ऊर्जा को आकर्षित और प्रसारित करते हैं। कुंभाभिषेक के दौरान शिखर और कलश पर विशेष अभिषेक किया जाता है, जिससे मंदिर की दिव्य शक्ति पूरे क्षेत्र में फैलती है।

कुंभाभिषेक के चार प्रकार

आगम शास्त्रों में कुंभाभिषेक को चार श्रेणियों में बांटा गया है:

अनवर्धन – नए मंदिर, नए मंडप या नए शिखर के निर्माण पर।

पुनर्वर्धन – लंबे समय तक बंद या उपेक्षित मंदिर की पुनः स्थापना पर।

आवर्धन –सामान्य जीर्णोद्धार के बाद हर 12 वर्ष में किया जाने वाला सामान्य कुंभाभिषेक।

अंधारथम – प्राकृतिक आपदा, आग, चोरी या अशुभ घटना के बाद मंदिर की पवित्रता पुनः स्थापित करने के लिए।

अष्ट बंधनम् और मंदिर की ऊर्जा

मंदिर के देव विग्रहों को आधार से जोड़ने के लिए ‘अष्ट बंधनम्’ नामक विशेष मिश्रण का उपयोग किया जाता है। इसमें जड़ी-बूटियां, धातु और पवित्र पदार्थ शामिल होते हैं। इसकी प्रभाव अवधि लगभग 12 वर्ष मानी जाती है। इसके बाद मंदिर की आध्यात्मिक शक्ति प्रभावित होने लगती है। इसलिए हर 12 वर्ष में कुंभाभिषेक अनिवार्य माना गया है।

सोमनाथ का ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व

सोमनाथ 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम है। पौराणिक कथा के अनुसार, चंद्रदेव ने यहां घोर तपस्या कर भगवान शिव को प्रसन्न किया था। शिव ने उन्हें शाप से मुक्ति दी और स्वयं ज्योतिर्लिंग रूप में यहां विराजमान हुए। इसलिए इसे सोमनाथ कहा जाता है। इस मंदिर पर कई बार आक्रमण हुए, लेकिन हर बार इसे पुनः स्थापित किया गया। आज यह मंदिर भारतीय आस्था और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक है।

कुंभाभिषेक का आध्यात्मिक प्रभाव

कुंभाभिषेक के दौरान मंदिर में उपस्थित रहने और अभिषेक देखने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। माना जाता है कि इस समय मंदिर की दिव्य शक्तियां सबसे अधिक सक्रिय होती हैं। श्रद्धालुओं को मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और पापों से मुक्ति का अनुभव होता है। सोमनाथ का यह कुंभाभिषेक आस्था, इतिहास और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम साबित हुआ है।

कुंभाभिषेक से मिलने वाले लाभ

धार्मिक मान्यता है कि कुंभाभिषेक के समय मंदिर में उपस्थित रहने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। इससे मंदिर की दिव्य शक्ति बढ़ती है, नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और भक्तों को मानसिक शांति मिलती है।प्राचीन मंदिरों में होने वाला यह अनुष्ठान पूरे क्षेत्र की सकारात्मकता बढ़ाता है।

यह अनुष्ठान ना केवल सोमनाथ मंदिर की पवित्रता को नवीनीकृत कर रहा है, बल्कि पूरे राष्ट्र को सकारात्मक ऊर्जा प्रदान कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया यह कुंभाभिषेक भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा को मजबूत करने वाला ऐतिहासिक क्षण बन गया है।

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