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Home राज्य

बेटी की पढ़ाई के लिए मां का संघर्ष

7 वीं पास उर्मिला बनी महिलाओं के लिए प्रेरणा

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
April 17, 2026
in राज्य, विशेष
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Mother's Struggle for Her Daughter's Education
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विकाश शुक्ला


मध्यप्रदेश (उमरिया)। एमपी का उमरिया जिला एक प्रमुख आदिवासी क्षेत्र के रूप में जाना जाता है, जहां आज भी कई गांवों में पारंपरिक जीवनशैली और सीमित संसाधनों के बीच लोग जीवन यापन करते हैं। ऐसे ही पाली विकासखंड के ग्राम गिंजरी से एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जिसने पूरे क्षेत्र में नई सोच को जन्म दिया है। यहां की रहने वाली उर्मिला बैगा ने अपने साहस और आत्मविश्वास के दम पर यह साबित कर दिया है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, दृढ़ निश्चय से उन्हें बदला जा सकता है। उर्मिला बैगा ‘बैगा समुदाय’ से संबंध रखती हैं, और उन्होंने केवल 7वीं कक्षा तक ही शिक्षा प्राप्त की है। सीमित शिक्षा और संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने जीवन में आगे बढ़ने का हौसला नहीं छोड़ा।

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Mother's Struggle for Her Daughter's Education
दृश्य : सड़क पर दौड़ती उर्मिला की ई-रिक्शा

चुनौतियों से भरा जीवन तलाशी राह

ग्रामीण और आदिवासी समाज में अक्सर महिलाओं को घर तक सीमित माना जाता है, लेकिन उर्मिला ने इस सोच को चुनौती देते हुए अपने लिए एक अलग रास्ता चुना। उनके जीवन में सबसे बड़ी चुनौती तब आई जब परिवार के भरण-पोषण में पति का सहयोग नहीं मिल रहा था। ऐसी स्थिति में अधिकांश महिलाएं टूट जाती हैं, लेकिन उर्मिला ने हार मानने के बजाय खुद जिम्मेदारी उठाने का निर्णय लिया। उन्होंने अपने परिवार को संभालने के साथ-साथ अपनी बेटी की शिक्षा को भी प्राथमिकता दी। उनकी बेटी वर्तमान में हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रही है, जिसका पूरा खर्च उर्मिला खुद वहन कर रही हैं।

उर्मिला के लिए बड़े शहरों की महिलाएं बनी प्रेरणा

आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के लिए उर्मिला ने पहले एक आयुर्वेदिक कंपनी में काम किया, जहां उन्हें कुछ अनुभव मिला। इसी दौरान उन्होंने बड़े शहरों में महिलाओं को आत्मनिर्भर और विभिन्न कार्यों में सक्रिय देखा, जहां कई महिलाएं ऑटो चलाकर अपना जीवन यापन कर रही थीं। यह अनुभव उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। उन्होंने ठान लिया कि वे भी कुछ ऐसा करेंगी जिससे वे अपने पैरों पर खड़ी हो सकें। और उर्मिला अपने गांव लौटकर लोन से ऑटो लेकर नई उड़ान शुरू की।

लोन से लिया ऑटो बदल रही तकदीर

उर्मिला ने समूह से लोन लेकर ऑटो  खरीदने का साहसिक निर्णय लिया। ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्र में एक महिला का ऑटो चलाना अपने आप में एक बड़ी बात है। शुरुआत में उन्हें कई सामाजिक और व्यावहारिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने अपने आत्मविश्वास को बनाए रखा और धीरे-धीरे इस काम में खुद को स्थापित किया। आज उर्मिला पाली से उमरिया और पाली से नौरोज़बाद के बीच ऑटो चलाकर रोजाना लगभग सात सौ से आठ सौ रुपये तक की कमाई कर रही हैं। यह आय उनके परिवार के लिए एक मजबूत सहारा बनी हुई है। वे न केवल अपने घर का खर्च उठा रही हैं, बल्कि अपनी बेटी की पढ़ाई भी बिना रुके जारी रखे हुए हैं।

रोजमर्रा की चुनौतियाँ और अनुभव

उर्मिला बताती हैं, कई बार कई यात्री शराब पीकर गाड़ी में बैठ जाते हैं, शोर मचाते हैं, कभी-कभी अनुशासन बनाना मुश्किल हो जाता है। वहीं खराब रास्तों पर ऑटो चलाना मुश्किल होता है। कभी-कभी गाड़ी फस जाती है, लेकिन धीरे-धीरे और सावधानी से निकलती हूँ। जबकि कुछ यात्री अचानक अपने रूट बदल देते हैं या लंबा सफर मांगते हैं। सभी को समझाना चुनौती होती है, लेकिन उर्मिला धैर्य रखना सीख लिया है। कभी-कभी दूर सवारी को छोड़ने पर देर शाम हो जाती है, अकेले सफर करना पड़ता है। डर होता है, लेकिन सावधानी और अनुभव से अब इसे उर्मिला ने आसान बना लिया है। संयम रखते हुए अपने काम को जारी रखा।

संघर्ष, साहस और सफलता की उदाहरण उर्मिला

उर्मिला बैगा की यह कहानी केवल व्यक्तिगत संघर्ष की नहीं है, बल्कि यह पूरे आदिवासी समाज में बदलाव की एक मजबूत मिसाल है। उन्होंने यह दिखा दिया है कि कम शिक्षा और सीमित संसाधन किसी भी महिला की प्रगति में बाधा नहीं बन सकते, अगर उसके पास हिम्मत और आत्मविश्वास हो। उनका यह कदम क्षेत्र की अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रहा है। आज उर्मिला बैगा महिला सशक्तिकरण का एक जीवंत उदाहरण बन चुकी हैं। उनकी मेहनत, साहस और संघर्ष यह संदेश देते हैं कि महिलाएं किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ सकती हैं। गिंजरी गांव की यह साधारण महिला आज असाधारण कार्य कर रही है, और पूरे समाज को यह सिखा रही है कि बदलाव की शुरुआत एक कदम से ही होती है।

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