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Home दिल्ली

MCD ने दिल्ली में जन विश्वास एक्ट के तहत बदले नियम, अब इन कामों पर नहीं होगी जेल

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
May 23, 2026
in दिल्ली
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दिल्ली नगर निगम
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नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में गंदगी फैलाने, दीवारों पर पोस्टर चिपकाने और बिना लाइसेंस के मवेशी रखने पर अब जेल तो नहीं जाना होगा, लेकिन जुर्माना जरूर भरना होगा। बिना लाइसेंस चाय की दुकानें और ढाबे चलाने वालों से भी दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) जुर्माना वसूलेगा।

इस साल मार्च के अंत में संसद में जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किया गया था। अब केंद्र सरकार ने इसे लागू कर दिया है। इसके मद्देनजर दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) अधिनियम, 1957 में कई संशोधन प्रस्तावित किए गए थे। इसके तहत नगर निगम ने विभिन्न नियमों के उल्लंघन व नागरिक कानूनों को लेकर संशोधन प्रस्ताव पेश कर जुर्माने को बढ़ा दिया है। इस संबंध में निगम कमिश्नर संजीव खिरवार ने आदेश भी जारी कर दिया है। इसके मद्देनजर अब दिल्ली में निगम के अधीन आने वाले नियमों व नागरिक कानूनों का उल्लंघन करने पर जुर्माना लगेगा।

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कार्रवाई के नियमों में बदलाव

अधिकारियों ने बताया कि अब दिल्ली में निगम से जुड़े अधिनियम में आने वाले सभी नागरिक कानूनों व उपनियमों का उल्लंघन करने पर जेल भेजने की कार्रवाई को हटा दिया गया है। अब निगम के नियमों का उल्लंघन करने पर 500 रुपये और तय किए गए नियम के उल्लंघन पर जुर्माना लगेगा। नियमों का उल्लंघन करने पर अपीलीय न्यायाधिकरण (एटी) एमसीडी में मामले की सुनवाई होती है।

एमसीडी ने अफसरों को दिया नागरिक दंड लगाने का अधिकार

एमसीडी ने दिल्ली नगर निगम अधिनियम, 1957 में संशोधन के बाद जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) अधिनियम, 2026 के तहत नागरिक दंड लगाने के लिए अधिनिर्णायक एवं अपीलीय प्राधिकरणों के रूप में कार्य करने के लिए विभिन्न विभागों के अधिकारियों को अधिकृत किया है।

गृह मंत्रालय द्वारा 15 मई को अधिसूचित जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) अधिनियम 2026, निर्दिष्ट उल्लंघनों के लिए आपराधिक कार्रवाई के स्थान पर जुर्माने का प्रावधान करने के लिए डीएमसी अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों में संशोधन करता है।

एमसीडी कमिश्नर के आदेश में क्या-क्या लिखा

एमसीडी कमिश्नर संजीव खिरवार द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि यह कदम डीएमसी अधिनियम, 1957 की धारा 468ए और धारा 468बी के तहत उठाया गया है, जिसे जन विश्वास अधिनियम द्वारा संशोधित किया गया है। इस अधिनियम के तहत छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से हटाकर आपराधिक दंडों के स्थान पर जुर्माना लगाया जाएगा।

इस आदेश के अनुसार, विज्ञापन, कारखाना लाइसेंसिंग, लाइसेंसिंग, पशु चिकित्सा सेवाएं, भवन एवं इंजीनियरिंग, डीईएमएस और स्वास्थ्य सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों को शहर के 12 जोन में उनके संबंधित अधिकार क्षेत्र के लिए निर्णायक अधिकारी नियुक्त किया गया है। इसमें कहा गया है कि उनके द्वारा पारित आदेशों के विरुद्ध अपीलों की सुनवाई के लिए उपायुक्तों और विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को अपीलीय प्राधिकारी नियुक्त किया गया है।

एमसीडी ने कहा कि अधिकारियों के पास जांच करने, व्यक्तियों को तलब करने, उपस्थिति अनिवार्य करने और दंड लगाने से पहले साक्ष्यों की जांच करने की शक्तियां होंगी। ऐसे आदेशों के विरुद्ध अपील 30 दिनों के भीतर दायर की जा सकती है और अपीलीय प्राधिकारियों को 60 दिनों के भीतर उनका निपटारा करना होगा। नगर निगम ने कहा कि यह बदलाव मामूली नगरपालिका उल्लंघनों के लिए आपराधिक अभियोजन से नागरिक न्यायनिर्णय तंत्र में बदलाव करके प्रवर्तन को सुव्यवस्थित करने के उद्देश्य से किया गया है।

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