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Home विश्व

चीन को ‘चेकमेट’ करने के इरादे से भारत आए म्यांमार के राष्ट्रपति!

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
May 31, 2026
in विश्व
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Myanmar's President Arrives in India
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नई दिल्ली: म्यांमार में पांच साल पहले तख्तापलट कर सत्ता हथियाने वाले सैन्य कमांडर जनरल मिन आंग ह्लाइंग अब अपनी नई ‘सिविलियन’ (नागरिक) भूमिका में पहली विदेश यात्रा के लिए भारत आ रहे हैं. शनिवार से शुरू हो रहे उनके इस पांच दिवसीय कूटनीतिक दौरे को लेकर न सिर्फ दक्षिण-पूर्व एशिया, बल्कि बीजिंग के गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है. जुंटा प्रमुख से राष्ट्रपति बनने का सफर पूरा करने के महज 2 महीने के भीतर मिन आंग ह्लाइंग का भारत आना बेहद मायने रखता है. इस हाई-प्रोफाइल दौरे पर वे भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे, जिसका सीधा असर दोनों देशों की सुरक्षा और व्यापारिक रिश्तों पर पड़ेगा.

चीन को ‘चेकमेट’ करने की तैयारी?

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राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राष्ट्रपति बनने के बाद अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए भारत को चुनना म्यांमार की एक सोची-समझी कूटनीतिक रणनीति है. हालांकि, म्यांमार की सैन्य सरकार को लंबे समय से बीजिंग (चीन) का समर्थन मिलता रहा है और वहां चीन का भारी निवेश भी है, लेकिन भारत का रुख कर म्यांमार खुद पर चीनी प्रभाव को कम करना चाहता है. म्यांमार में भारत के पूर्व राजदूत गौतम मुखोपाध्याय के अनुसार, म्यांमार का यह पुराना ढर्रा रहा है कि जब भी वह चीन के दबाव में ज्यादा झुकने लगता है, तो संतुलन बनाने के लिए भारत के साथ अपने रिश्तों को आगे बढ़ा देता है.

भारत के लिए क्यों अहम है ये दौरा?

भारत के नजरिए से ये दौरा रणनीतिक और आर्थिक दोनों लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है. भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साफ किया है कि इस वार्ता के दौरान म्यांमार और भारत के संबंधों के व्यापक दायरे में आने वाले सभी मुद्दों पर खुलकर चर्चा होगी.

  1. दुर्लभ खनिजों (Rare Earth) तक पहुंच: म्यांमार के सीमावर्ती इलाकों में ‘रेयर अर्थ’ खनिजों का भारी भंडार है. चीन के प्रभुत्व को टक्कर देने के लिए भारत इन संसाधनों और कच्चे माल तक अपनी पहुंच पक्की करना चाहता है.
  2. उत्तर-पूर्वी सीमा पर सुरक्षा: भारत की उत्तर-पूर्वी सीमा म्यांमार से सटी है. वहां शांति बनाए रखने और उग्रवाद पर लगाम कसने के लिए म्यांमार की सेना का सहयोग भारत के लिए बेहद जरूरी है.

बगावत से घिरे म्यांमार के राष्ट्रपति को चाहिए भारत का साथ

1 फरवरी 2021 को नोबेल पुरस्कार विजेता आंग सान सू ची की लोकतांत्रिक सरकार का तख्तापलट करने के बाद मिन आंग ह्लाइंग को वैश्विक स्तर पर भारी विरोध का सामना करना पड़ा था. म्यांमार में गृहयुद्ध जैसे हालात बन गए और आसियान (ASEAN) देशों ने भी उन्हें कूटनीतिक रूप से अलग-थलग कर दिया था.

अब म्यांमार की सेना उन सीमावर्ती इलाकों में नए सिरे से सैन्य अभियान चला रही है, जहां से भारत और थाईलैंड के व्यापारिक मार्ग गुजरते हैं. क्राइसिस ग्रुप के वरिष्ठ सलाहकार रिचर्ड हॉर्सी के मुताबिक, राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग इस दौरे पर भारत की सीमा से सटे ‘चिन’ प्रांत और ‘रखाइन’ प्रांत में सक्रिय विद्रोही समूहों (जैसे अराकान आर्मी) का मुकाबला करने के लिए भारत से सैन्य और रणनीतिक मदद मांग सकते हैं.

इंटरनेशनल मंच पर साख बहाल करने की कोशिश

पिछले साल म्यांमार में आए विनाशकारी भूकंप और उसके बाद हुए चुनावों ने मिन आंग ह्लाइंग के लिए अंतरराष्ट्रीय मंच पर वापसी का रास्ता साफ किया. कूटनीतिक रूप से अलग-थलग पड़ने के बाद अब वे भारत के जरिए वैश्विक स्तर पर अपनी नई नागरिक साख और सम्मान को बहाल करना चाहते हैं. भारत दौरे के बाद उनके जल्द ही बीजिंग जाकर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भी मिलने की उम्मीद है.

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