प्रकाश मेहरा
एग्जीक्यूटिव एडिटर
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय राजनीति के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ते हुए देश के सबसे लंबे समय तक लगातार सेवा देने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। बुधवार को उन्होंने लगातार 4,399 दिनों तक प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।
यह उपलब्धि इसलिए भी विशेष मानी जा रही है क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी ने वर्ष 2014 में पहली बार सत्ता संभालने के बाद 2019 और 2024 में लगातार जनादेश प्राप्त कर तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। इस तरह वे स्वतंत्र भारत के इतिहास में लगातार सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री बने हैं।
नेहरू का रिकॉर्ड टूटा, नया इतिहास रचा
विशेषज्ञों के मुताबिक इस तुलना में वर्ष 1952 से शुरू हुए जवाहरलाल नेहरू के कार्यकाल को आधार माना गया है। 1947 से 1952 तक नेहरू अंतरिम सरकार के प्रमुख थे, जबकि 1952 में देश के पहले आम चुनावों के बाद वे निर्वाचित प्रधानमंत्री बने।
हालांकि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी कुल मिलाकर 14 वर्षों से अधिक समय तक प्रधानमंत्री रहीं, लेकिन उनका कार्यकाल लगातार नहीं था। इसी कारण नरेंद्र मोदी अब भारत के सबसे लंबे समय तक लगातार सेवा देने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में दर्ज हो गए हैं।
विकास और राष्ट्र निर्माण का दशक
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों के दौरान देश में कई बड़े बुनियादी ढांचा और राष्ट्र-निर्माण परियोजनाओं को गति मिली। इनमें शामिल हैं-
- नई पार्लियामेंट हाउस का निर्माण
- सेंट्रल विस्टा रेडेवेलोप्मेन्ट प्रोजेक्ट
- कर्त्तव्य पथ का पुनर्विकास
- वन्दे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों का विस्तार
- स्टेचू ऑफ़ यूनिटी
- INS विक्रांत का नौसेना में शामिल होना
- कश्मीर रेल लिंक परियोजना
- नॉएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट
- नमो भारत RRTS
- गंगा एक्सप्रेसवे
इन परियोजनाओं को भारत की आधारभूत संरचना को आधुनिक बनाने और आर्थिक विकास को गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
उपलब्धियों और भविष्य की रणनीति पर मंथन
प्रधानमंत्री मोदी की इस ऐतिहासिक उपलब्धि और केंद्र में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर राजधानी दिल्ली में एक विशेष बैठक आयोजित की गई। यह बैठक भारत मंडपम में आयोजित हुई, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी के अलावा भाजपा और एनडीए के वरिष्ठ नेता शामिल। बैठक में एनडीए शासित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री तथा सहयोगी दलों के प्रमुख नेताओं भी भाग लिया।
बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, वरिष्ठ भाजपा नेता शिवराज सिंह चौहान सहित कई प्रमुख नेता मौजूद रहे।
बैठक में सरकार की उपलब्धियों, आगामी विकास योजनाओं, नीतिगत प्राथमिकताओं और भविष्य की राजनीतिक रणनीति पर चर्चा की जाएगी। साथ ही आगामी चुनावी चुनौतियों और संगठनात्मक मजबूती पर भी विचार-विमर्श होगा।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली बधाइयाँ
प्रधानमंत्री मोदी की इस उपलब्धि पर अमेरिका के कई सांसदों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और भारतीय मूल के प्रमुख व्यक्तियों ने उन्हें शुभकामनाएं दी हैं।
अमेरिकी सीनेटर जॉन कोर्निन ने कहा कि “4,399 दिनों का यह नेतृत्व भारत की जनता के विश्वास और लगातार तीन लोकतांत्रिक जनादेशों का परिणाम है। उन्होंने भारत की तेज आर्थिक प्रगति और अमेरिका-भारत संबंधों की मजबूती की भी सराहना की।”
इंडियन-अमेरिकन सीईओ काउंसिल के सह-संस्थापक अरुण अग्रवाल ने कहा कि “2014 और 2026 के भारत में बड़ा अंतर दिखाई देता है। उनके अनुसार आज भारत वैश्विक मंच पर अधिक प्रभावशाली, आत्मविश्वासी और सम्मानित राष्ट्र के रूप में उभरा है।”
वैश्विक उद्योग जगत ने भी की सराहना
पालो आल्टो नेटवर्क्स के चेयरमैन एवं सीईओ निकेश अरोरा ने प्रधानमंत्री मोदी को बधाई देते हुए कहा कि भारत की आर्थिक प्रगति और वैश्विक प्रभाव में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी के और अधिक मजबूत होने की उम्मीद भी जताई।
वहीं अमेरिकी गायिका एवं भारत समर्थक मैरी मिलबेन ने इसे भारत की लोकतांत्रिक यात्रा का ऐतिहासिक क्षण बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का नेतृत्व देश की एकता, विकास और वैश्विक प्रतिष्ठा को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में महत्वपूर्ण रहा है।
भारत की राजनीति में एक ऐतिहासिक पड़ाव
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लगातार 12 वर्षों तक प्रधानमंत्री पद पर बने रहना भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है। लगातार तीन आम चुनावों में जनता का विश्वास प्राप्त कर उन्होंने न केवल राजनीतिक स्थिरता का उदाहरण प्रस्तुत किया है, बल्कि शासन, विकास और वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका को लेकर भी नई चर्चा को जन्म दिया है।
आने वाले वर्षों में इस अवधि को भारत के राजनीतिक, आर्थिक और वैश्विक उभार के एक महत्वपूर्ण दौर के रूप में याद किया जा सकता है। प्रधानमंत्री मोदी की यह उपलब्धि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनसमर्थन, नेतृत्व क्षमता और दीर्घकालिक राजनीतिक स्थिरता का एक उल्लेखनीय उदाहरण बनकर दर्ज हो गई है।







