नई दिल्ली। अमेरिका जाने का सपना देख रहे दुनिया भर के पर्यटकों और कारोबारी यात्रियों के लिए अमेरिकी सरकार ने नियमों को काफी सख्त कर दिया है. अमेरिका ने 50 देशों के नागरिकों के लिए ‘वीजा बॉन्ड’ अनिवार्य कर दिया है. इसके तहत B1 और B2 वीजा चाहने वालों को यात्रा से पहले 10,000 डॉलर से लेकर 20,000 डॉलर (करीब 8.5 लाख से 17 लाख रुपये) तक की सुरक्षा राशि यानी बॉन्ड जमा करना होगा.
अच्छी बात यह है कि इस कड़े नियम से भारत को पूरी तरह बाहर रखा गया है. वीजा बॉन्ड के दायरे में आने वाले यात्रियों को सिर्फ कमर्शियल उड़ानों के माध्यम से ही अमेरिका में प्रवेश करने और वापस लौटने की अनुमति होगी. वे किसी भी चार्टर प्लेन, निजी विमान, समुद्री मार्ग या जमीनी बॉर्डर से प्रवेश या निकास नहीं कर सकेंगे.
क्या है वीजा बॉन्ड और क्यों लागू हुआ?
जारी अंतिम नियमों के अनुसार, वीजा बॉन्ड दरअसल एक वित्तीय गारंटी है. कई देशों के नागरिक अमेरिका का टूरिस्ट या बिजनेस वीजा लेकर वहां जाते हैं और तय समय सीमा खत्म होने के बाद भी वापस नहीं लौटते. इस ‘वीजा ओवरस्टे’ की समस्या को रोकने के लिए अमेरिकी विदेश विभाग ने यह नियम बनाया है. अमेरिकी कांसुलर अधिकारी वीजा इंटरव्यू के दौरान तय करते हैं कि आवेदक को 10,000 डॉलर, 15,000 डॉलर या 20,000 डॉलर में से कितना बॉन्ड भरना होगा.
रुपये कब वापस मिलेंगे और कब होंगे जब्त?
यह रकम डीएचएस फॉर्म I-352 भरकर अमेरिकी ट्रेजरी के आधिकारिक पोर्टल Pay.gov पर जमा करनी होती है. यदि यात्री तय समय सीमा के भीतर अमेरिका से वापस लौट आता है, तो उसका पूरा पैसा अमेरिकी डॉलर में वापस मिल जाता है. लेकिन यदि यात्री ने तय तारीख से ज्यादा दिन अमेरिका में बिताए या वीजा शर्तों का उल्लंघन किया, तो उसकी पूरी रकम जब्त कर ली जाएगी. ध्यान रहे, बॉन्ड भरने से वीजा मिलने की कोई गारंटी नहीं होती.
भारत को राहत, पड़ोसियों पर सख्ती
अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग के ओवरस्टे डेटा के आधार पर 50 देशों की यह लिस्ट तैयार की गई है, , जिनमें भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश, नेपाल और भूटान भी शामिल हैं. इनके अलावा क्यूबा, नाइजीरिया, वेनेजुएला, जिम्बाब्वे, कंबोडिया और इथियोपिया जैसे देश भी इस लिस्ट में हैं. भारत में वीजा नियमों के पालन का रिकॉर्ड बेहतर होने के कारण भारतीय पासपोर्ट धारकों को इस बॉन्ड से छूट मिली है. उन्हें सिर्फ सामान्य वीजा प्रक्रिया और तय फीस ही देनी होगी. भारतीय पासपोर्ट धारकों को इस बॉन्ड से छूट मिलने से अमेरिका जाने वाले छात्रों, व्यापारियों और पर्यटकों पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा.







