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Home राष्ट्रीय

अल नीनो आ रहा, भारत समेत पूरी दुनिया पर पड़ेगी मौसम की मार

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
June 1, 2026
in राष्ट्रीय
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नई दिल्ली। इस साल प्रशांत महासागर में एक सुपर अल नीनो बनने की संभावना तेजी से बढ़ रही है, जिसके चलते पूरी दुनिया के मौसम पर असर पड़ सकता है। मौसम की यह घटना एशिया से लेकर अमेरिका तक असर डालेगी। कहीं पर यह बाढ़ तो किसी जगह भयंकर सूखे का कारण बन सकती है। अल नीनो उस घटना को कहते हैं, जब प्रशांत महासागर की सतह का पानी सामान्य स्तर से ज्यादा गर्म होने लगता है, जिसका असर वायुमंडल पर पड़ता है।

पिछले कुछ महीनों में प्रशांत महासागर का पानी तेजी से गर्म हुआ है। हाल ही में यूरोपीय क्लाइमेट एजेंसी की सैटेलाइट ने प्रशांत महासागर में 1000 किमी चौड़ी गर्म पानी की दीवार (केल्विन वेव) आगे बढ़ते देखी थी। अमेरिका के क्लाइमेट पूर्वानुमान केंद्र के अनुसार, जुलाई के आखिर तक अल नीनो बढ़ने की संभावना बढ़कर 82% हो गई है। कुछ समय पहले अप्रैल में यह अनुमान 65 प्रतिशत था। इस साल आने वाला अल-नीनो काफी शक्तिशाली हो सकता है। 2027 तक इसके एक मजबूत घटना में बदलने की 67% संभावना है। इसे सुपर अल-नीनो कहा जा रहा है।

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सुपर अल-नीनो क्या है?

सुपर अल-नीनो कोई आधिकारिक शब्द नहीं है। यह एक बहुत मजबूत अल-नीनो के लिए इस्तेमाल किया जाता है। अल नीनो की पहचान प्रशांत महासागर की सतह के तापमान के स्तर पर नजर रखकर की जाती है। अल नीनो तब कहा जाता है, जब समुद्र की सतह का तापमान लंबे समय के औसत से कम से कम 0.5 डिग्री सेल्सियस ज्यादा हो जाए। यह स्थिति लगातार पांच महीने तक बनी रहे। एक मजबूत अल नीनो के लिए तापमान का अंतर 1.5 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए। वहीं, बहुत मजबूत अल नीनो के लिए यह अंतर कम से कम 2 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए।

अल नीनो की शुरुआत प्रशांत महासागर में होती है, लेकिन इसका असर कई महाद्वीपों तक फैलता है। यह इस बार ऐसे समय में आ रहा है, जब वैश्विक अर्थव्यवस्था पहले से ही मध्य पूर्व में युद्ध के कारण ऊर्जा की कमी, उर्वरक की किल्लत और महंगाई के दबाव से जूझ रही है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 2027 अब तक के सबसे गर्म सालों में से एक हो सकता है।

अल नीनो का दुनिया पर असर

अल नीनो की स्थिति आने पर ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण-पूर्वी एशिया, उत्तरी अमेरिका और कनाडा आमतौर पर ज्यादा गर्म और सूखे हो जाते हैं। इसके चलते यहां सूखा और जंगल की आग लगने का खतरा बढ़ जाता है। इसके चलते भारत में मानसून की बारिश कमी हो सकती है। वहीं, दक्षिणी अमेरिका के चिली, अर्जेंटीना और पूर्वी अफ्रीका के कुछ हिस्सों में ज्यादा बारिश के चलते बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है।

तूफान का खतरा

अल नीनो वाले साल में प्रशांत महासागर में तूफान की गतिविधियां बढ़ जाती हैं। समुद्र का पानी उष्ण कटिबंधीय तूफानों को और ज्यादा ऊर्जा देता है। इसका मतलब है कि एशिया में तूफान से होने वाले नुकसान का खतरा बढ़ सकता है।

फसलों पर अल नीनो प्रभाव

अल नीनो के आने से सूखे की स्थिति फसलों का नुकसान होने की संभावना बढ़ जाती है। जमीन पर पड़ने वाले असर के अलावा यह समुद्र में मछली पकड़ने के काम में भी रुकावट डाल सकता है। फसलों की कम पैदावार, मछली पकड़ने में कमी और खराब मौसम के कारण पशुओं के मरने से दुनिया भर में खाद्य सुरक्षा पर खतरा पैदा हो सकता है।

भारत में कमजोर मानसून का अनुमान

अल नीनो की संभावना के कारण भारत ने साल 2026 में कमजोर मॉनसून का अनुमान लगाया है, जिसके 11 सालों में सबसे कम बारिश होगी। इसके चलते फसलों, खाने की चीजों की कीमतों और विकास को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। खासकर ऐसे समय में जब ईरान युद्ध के कारण अर्थव्यवस्था महंगाई के दबाव से जूझ रही है। यह मॉनसून पानी के जरूरी स्रोतों को भरने के लिए सालाना बारिश का लगभग 70% हिस्सा लाता है। कमजोर मॉनसून दबाव बढ़ा सकता है, जो महंगाई को 5.5% के औसत के करीब पहुंचा सकता है।

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