नई दिल्ली। खाड़ी संकट ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिला कर रख दिया है। लेकिन, इस बीच कुछ तत्व ऐसे भी हैं जो जन मानस में झूठ परोस रहे हैं। इसी क्रम में कुछ दिनों पहले एक बड़ी खबर आई थी कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने रुपए को संभालने के लिए करीब 12 अरब डॉलर यानी लगभग 1 लाख करोड़ रुपये के बराबर सोना बेच दिया है। लेकिन सरकार ने इस रिपोर्ट को साफ-साफ फर्जी बताया है।
सरकार के पीआईबी फैक्ट चेक हैंडल ने एक्स पर पोस्ट करके कहा कि यह दावा बिल्कुल गलत है। उन्होंने आरबीआई के आधिकारिक आंकड़ों का हवाला दिया, जिसमें साफ दिखता है कि विदेशी मुद्रा भंडार में सोने का हिस्सा बढ़ा है, न कि घटा।
क्या कहती है रिपोर्ट?
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स के भारत के वरिष्ठ अर्थशास्त्री अभिषेक गुप्ता के हवाले से कहा गया था कि मई 2026 के पहले दो हफ्तों में आरबीआई ने करीब 12 अरब डॉलर का सोना बेचा होगा। साथ ही उन्होंने 7.5 अरब डॉलर के विदेशी मुद्रा एसेट्स खरीदे। रिपोर्ट में यह भी लिखा था कि मध्य पूर्व में ईरान युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने की वजह से तेल की कीमतें बढ़ी हैं, पूंजी बाहर जा रही है और रुपया दबाव में है। ऐसे में आरबीआई ने लिक्विड विदेशी मुद्रा बढ़ाने के लिए सोना बेचा होगा। रिपोर्ट में सोने पर आयात शुल्क बढ़ने के बावजूद इसके मूल्य में गिरावट का जिक्र किया गया था, जिससे बिक्री का अनुमान लगाया गया।
क्या कहते हैं आरबीआई के आंकड़े?
आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक:
- सितंबर 2025 के अंत में विदेशी मुद्रा भंडार में सोने का हिस्सा 13.92% था।
- 31 मार्च 2026 को यह बढ़कर 16.70% हो गया।
- 22 मई 2026 तक यह और बढ़कर 16.85% पहुंच गया।
आरबीआई की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, 31 मार्च 2026 को कुल सोना 880.52 मीट्रिक टन था, जबकि एक साल पहले (31 मार्च 2025) यह 879.58 मीट्रिक टन था। यानी पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में आरबीआई ने 0.94 मीट्रिक टन सोना बढ़ाया है, बेचा नहीं।
इसमें से 312.32 मीट्रिक टन इश्यू डिपार्टमेंट के पास और 568.20 मीट्रिक टन बैंकिंग डिपार्टमेंट के पास रखा गया है। मार्च 2026 तक कुल सोने का 77% भारत में रखा था, जबकि छह महीने पहले यह 66% था। बाकी सोना ज्यादातर बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स के पास है। सरकार और आरबीआई के आंकड़े साफ बता रहे हैं कि सोने की बिक्री की खबर आधारहीन है। विदेशी मुद्रा भंडार में सोने का हिस्सा लगातार बढ़ रहा है, जो रुपए को मजबूत बनाने या भंडार प्रबंधन की दिशा में सकारात्मक संकेत देता है।







