नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) की करारी और ऐतिहासिक हार के बाद सूबे से भ्रष्टाचारियों और रंगदारों के सफाए का दौर शुरू हो चुका है. बता दें कि कल तक सत्ता के रसूख में उड़ने वाले टीएमसी के ‘बाहुबली’ अब कानून के शिकंजे में आते ही घुटनों पर हैं.
दरअसल ताजा और सबसे बड़ा झटका ममता बनर्जी के बेहद करीबी और पूर्व खेल मंत्री अरूप विश्वास को लगा है. उनके सगे भाई और टॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री (FCTWEI) के पूर्व सर्वेसर्वा स्वरूप विश्वास (Swarup Biswas) को न्यू अलीपुर थाना पुलिस ने जबरन रंगदारी (तोलाबाजी), छेड़छाड और आर्म्स एक्ट के तहत गिरफ्तार कर लिया है.
‘जूनियर विश्वास’ का टॉलीवुड में खत्म हुआ आतंक
इनसाइड रिपोर्ट्स के मुताबिक, टॉलीवुड फिल्म और टीवी इंडस्ट्री में तकनीशियनों और कलाकारों का खून चूसने वाले स्वरूप विश्वास के खिलाफ रीजेंट पार्क की एक महिला मेकअप आर्टिस्ट ने न्यू अलीपुर थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी. पीड़िता पिछले दो साल से बेरोजगार थी और जब वह काम मांगने गई, तो स्वरूप विश्वास ने काम के बदले मोटी रकम (तोलाबाजी) मांगी और पैसे न देने पर उसे जान से मारने की धमकी दी. पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 75(1), 308 और अस्त्र अधिनियम (Arms Act) के तहत केस दर्ज कर स्वरूप को सीधे लालबाजार मुख्यालय के लॉकअप में डाल दिया.
मेसी के ‘GOAT’ टूर से लेकर टेक्नीशियन स्टूडियो तक लूट
स्वरूप विश्वास की गिरफ्तारी महज एक शुरुआत है. उन पर और उनके भाई पूर्व खेल मंत्री अरूप विश्वास पर अर्जेंटीना के महान फुटबॉलर लियोनेल मेसी के ‘GOAT इंडिया टूर-कोलकाता एडिशन’ के दौरान भी 22,000 मानार्थ (Complimentary) टिकटों की ब्लैक-मार्केटिंग और आयोजकों से भारी वसूली करने का संगीन आरोप है, जिसकी FIR बिधाननगर साउथ थाने में पहले से दर्ज है. सत्ता हाथ से जाते ही अब एक के बाद एक पीड़ित खुलकर सामने आ रहे हैं और गवाही दे रहे हैं कि कैसे ये भाई मिलकर बंगाल की फिल्म इंडस्ट्री और खेल आयोजनों को अपनी जागीर समझकर लूट रहे थे.
न्यू अलीपुर थाने में जनता ने लगाए ‘चोर-चोर’ के नारे
स्वरूप विश्वास की गिरफ्तारी की खबर फैलते ही न्यू अलीपुर थाने के बाहर भारी संख्या में पीड़ित तकनीशियन और आम लोग इकट्ठा हो गए. आक्रोशित जनता ने पूरे थाने को घेर लिया, गाड़ियों में तोड़फोड़ की और स्वरूप विश्वास को मेडिकल के लिए ले जाते समय उन पर अंडे फेंके और ‘चोर-चोर’ के नारे लगाए.
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज तक करना पड़ा. राजनीतिक विश्लेषकों का साफ कहना है कि ‘दीदी’ के सिंडिकेट राज का यह अंत बंगाल की जनता के उस गुस्से का नतीजा है, जिसे टीएमसी ने सालों तक दबाकर रखा था.







