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Home राष्ट्रीय

आबादी की रफ्तार पर लगा ब्रेक, गिरा भारत का फर्टिलिटी रेट

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
June 5, 2026
in राष्ट्रीय
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population
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नई दिल्ली। भारत जो कभी अपनी बेकाबू आबादी और ‘जनसंख्या विस्फोट’ की चुनौतियों के लिए दुनिया भर में चर्चा का विषय रहता था अब जनसांख्यिकी (Demographic) के एक बिल्कुल नए और ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है। हाल ही में जारी सैम्पल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक भारत की कुल प्रजनन दर यानी टोटल फर्टिलिटी रेट (TFR – प्रति महिला औसतन बच्चों को जन्म देने की संख्या) घटकर 1.9 पर आ गई है। यह आंकड़ा इसलिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि देश की आबादी को स्थिर रखने के लिए जरूरी आदर्श स्तर 2.1 माना जाता है और भारत अब इस रिप्लेसमेंट लेवल से काफी नीचे आ चुका है।

जानें क्यों छोटा हो रहा है भारतीय परिवार?

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दशकों पहले तक जहां बड़े परिवार रखना भारतीय समाज और संस्कृति की पहचान हुआ करता था वहीं आज के दौर के युवाओं की सोच पूरी तरह बदल चुकी है। इसके पीछे कई ठोस सामाजिक और आर्थिक कारण हैं। बता दें कि आज की युवा पीढ़ी बच्चों की संख्या के बजाय उनकी अच्छी परवरिश और लाइफ क्वालिटी को प्राथमिकता दे रही है।

बड़े शहरों में बढ़ता खर्च, प्रॉपर्टी की आसमान छूती कीमतें और बच्चों की उच्च शिक्षा के भारी-भरकम बजट ने मिडिल क्लास परिवारों को परिवार का दायरा सीमित रखने पर मजबूर किया है। महिलाओं में उच्च शिक्षा का ग्राफ बढ़ना, कॉर्पोरेट जगत और नौकरियों में उनकी बढ़ती भागीदारी और शादी की उम्र का बढ़ना इसके सबसे बड़े सामाजिक कारण बनकर उभरे हैं।

फर्टिलिटी रेट में नॉर्थ-साउथ डिवाइड: राज्यों की स्थिति

सरकारी आंकड़ों का विश्लेषण करें तो देश के भीतर ही आबादी की रफ्तार को लेकर उत्तर और दक्षिण के राज्यों में एक बहुत बड़ी खाई (North-South Divide) साफ नजर आती है:

राज्य / केंद्र शासित प्रदेश,                टोटल फर्टिलिटी रेट (TFR),                  मौजूदा स्थिति

  • दिल्ली (Delhi),                                      1.2,                                          पूरे देश में सबसे कम प्रजनन दर
  • तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल,                1.3,                                          आबादी तेजी से स्थिरता और गिरावट की
  • उत्तर प्रदेश,                                           2.6,                                           राष्ट्रीय औसत से ऊपर
  • बिहार (Bihar),                                       2.9,                                           देश में सबसे अधिक प्रजनन दर

दक्षिण राज्यों में बदलाव की मुख्य वजह: दक्षिण और पूर्वोत्तर के राज्यों में साक्षरता और महिला सशक्तिकरण का स्तर काफी ऊंचा है। यहां जागरूकता अधिक होने के कारण महिलाओं ने परिवार नियोजन (Family Planning) से जुड़े फैसले खुद अपने हाथों में लिए हैं।

क्या भविष्य में भारत भी बनेगा जापान या साउथ कोरिया?

टोटल फर्टिलिटी रेट का 2.1 के आदर्श स्तर से नीचे गिरना भविष्य के भारत के लिए एक नई और गंभीर चुनौती की घंटी है। यदि लंबे समय तक यही स्थिति बनी रही तो आने वाले कुछ दशकों में देश के सामने ये बड़े संकट होंगे:

बुजुर्गों की बढ़ती आबादी: देश में वृद्ध लोगों की संख्या तेजी से बढ़ेगी जिससे देश के स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे और पेंशन पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा।

कामकाजी युवाओं की कमी: देश को आगे ले जाने वाले कामकाजी युवाओं (Working-Age Population) की संख्या घटने लगेगी। वर्तमान में जापान, इटली और दक्षिण कोरिया जैसे विकसित देश इसी गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं।

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