प्रकाश मेहरा
एग्जीक्यूटिव एडिटर
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन के उस मामले में दखल देने से इनकार कर दिया है, जिसमें उनके राज्यसभा चुनाव के नामांकन को रद्द किए जाने को चुनौती दी गई थी। अदालत ने याचिका को सुनवाई योग्य नहीं मानते हुए खारिज कर दिया, हालांकि याचिकाकर्ता को जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत चुनाव याचिका दाखिल करने की अनुमति दी गई है।
क्या है सुप्रीम कोर्ट का तर्क
जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस ए.एस. चंदूरकर की पीठ ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 329 के तहत चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मामलों में अदालत का रिट अधिकार क्षेत्र सीमित होता है। अदालत ने कहा कि नामांकन और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े विवादों का समाधान सामान्यतः चुनाव याचिका के माध्यम से ही किया जाना चाहिए।
पीठ ने यह भी टिप्पणी की कि “यदि अदालत यह तय करने लगे कि किन मामलों में सीधे हस्तक्षेप किया जाए और किन मामलों को चुनाव न्यायाधिकरण के लिए छोड़ा जाए, तो यह अनुच्छेद 329 की मूल भावना के विपरीत होगा।
इसके साथ ही, अदालत ने अनुच्छेद 32 के तहत “स्पष्ट और गंभीर त्रुटि” के आधार पर हस्तक्षेप की दलील को भी अस्वीकार कर दिया।
चुनाव आयोग और नामांकन रद्दीकरण पर विवाद
यह मामला मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव से जुड़ा है, जहां बीजेपी के तीन उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं। कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद राजनीतिक विवाद गहरा गया।
कांग्रेस का आरोप है कि नामांकन बिना पर्याप्त कानूनी आधार और राजनीतिक कारणों से रद्द किया गया, जबकि बीजेपी का दावा है कि हलफनामे में आवश्यक जानकारी छिपाई गई थी, इसलिए यह कार्रवाई नियमों के तहत की गई।
कांग्रेस की आपत्ति और चुनाव आयोग की भूमिका
नामांकन रद्द होने के बाद कांग्रेस नेताओं ने चुनाव आयोग से शिकायत की थी और दखल देने की मांग की, लेकिन चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक आयोग ने कोई निर्णय नहीं दिया। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।
कांग्रेस नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल बताते हुए चुनाव आयोग की निष्क्रियता पर भी आपत्ति जताई।
कानूनी बहस और अलग-अलग दावे
मामले में कानूनी व्याख्या को लेकर भी विवाद सामने आया है। कांग्रेस पक्ष का कहना है कि “नामांकन रद्द करने का आधार गलत और मनमाना था, जबकि संपादकीय और विश्लेषणों में यह सवाल उठाया गया कि रिटर्निंग अधिकारी द्वारा की गई कार्रवाई कानून की सही व्याख्या पर आधारित थी या नहीं।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद फिलहाल कांग्रेस को संवैधानिक राहत नहीं मिली है। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया है कि चुनावी विवाद को चुनौती देने का रास्ता चुनाव याचिका के माध्यम से खुला हुआ है। अब इस मामले का अंतिम समाधान चुनाव न्यायाधिकरण में ही तय हो सकता है।







