नई दिल्ली। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने भारत में गाड़ियों के लिए E100 (100 प्रतिशत इथेनॉल) ईंधन के इस्तेमाल को मंजूरी देने वाले नियमों पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इस फैसले के बाद अब देश में पूरी तरह से इथेनॉल पर चलने वाले फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों (Flex-Fuel Vehicles) के आने का रास्ता साफ हो गया है। यह घोषणा दिल्ली में E85 फ्यूल लॉन्च होने के कुछ हफ्तों हुई है, जो यह दिखाता है कि सरकार मौजूदा E20 (20% इथेनॉल) प्रोग्राम से काफी आगे बढ़कर काम कर रही है। आइए आपको इस फैसले और इसके फायदों और चुनौतियों के बारे में बताते हैं।
E100 फ्यूल को मिली कानूनी मान्यता
नागपुर में आयोजित शुगर, इथेनॉल और बायो-एनर्जी इंडिया कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए नितिन गडकरी ने बताया कि उन्होंने 100 प्रतिशत इथेनॉल के कानूनी इस्तेमाल से जुड़ी फाइल को मंजूरी दे दी है।
अब तक भारत का पूरा ध्यान पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिलाने (E20) पर था। लेकिन E100 को मंजूरी मिलने से अब देश में इलेक्ट्रिक, सीएनजी (CNG) और हाइब्रिड गाड़ियों की तरह ही पूरी तरह इथेनॉल से चलने वाली गाड़ियां भी आने लगेंगी।
इथेनॉल से चलने वाली कारें होंगी लॉन्च
सरकार के इस फैसले के बाद ऑटोमोबाइल कंपनियां तेजी से काम कर रही हैं।
पहले से तैयार तकनीक – मारुति सुजुकी अपनी फ्लेक्स-फ्यूल WagonR कार और हीरो मोटोकॉर्प अपनी इथेनॉल से चलने वाली मोटरसाइकल को पहले ही पेश कर चुकी है।
आएंगी नई गाड़ियां – नितिन गडकरी के मुताबिक अगले डेढ़ महीने के अंदर टोयोटा, सुजुकी, हुंडई और एमजी (MG) जैसी बड़ी कंपनियां बाजार में E100 से चलने वाली गाड़ियां पेश कर सकती हैं। ऊपर वाले वीडियो पर नितिन गडकरी इस बारे में बता रहे हैं। आप वह वीडियो देख सकते हैं।
क्या बदलाव होता है? – पारंपरिक पेट्रोल इंजन के मुकाबले फ्लेक्स-फ्यूल इंजन में खास तरह की कैलिब्रेशन और अलग ईंधन पाइपलाइंस का इस्तेमाल किया जाता है, ताकि वे इथेनॉल को आसानी से झेल सकें।
E100 फ्यूल को लेकर क्या चुनौतियां हैं?
भले ही नियम पास हो गया है, लेकिन इसे हर जगह पहुंचने में अभी थोड़ा समय लगेगा। इसकी मुख्य वजहें ये हैं –
E100 पूरी तरह शुद्ध नहीं है – E100 फ्यूल में 100% शुद्ध इथेनॉल नहीं होता। इसमें लगभग 93-95% इथेनॉल होता है और बाकी का हिस्सा पेट्रोल और अन्य एडिटिव्स का होता है, ताकि सर्दियों के मौसम में गाड़ी आसानी से स्टार्ट हो सके।
पुरानी गाड़ियां नहीं चलेंगी – आपकी मौजूदा पेट्रोल या E20 कार में E100 ईंधन नहीं डाला जा सकता। इसके लिए बिल्कुल अलग इंजन और पार्ट्स वाली नई फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियां ही खरीदनी होंगी।
कम माइलेज की समस्या – पेट्रोल की तुलना में इथेनॉल में थोड़ी कम ऊर्जा होती है। इसका मतलब है कि E100 ईंधन पर चलने वाली गाड़ियां उतनी ही दूरी तय करने के लिए पेट्रोल के मुकाबले ज्यादा ईंधन की खपत करेंगी, यानी कि माइलेज थोड़ा कम हो सकता है।
सप्लाई और पेट्रोल पंप की कमी – तेल कंपनियों को E100 ईंधन बेचने के लिए पेट्रोल पंपों पर अलग से मशीनें (डिस्पेंसर) और स्टोरेज टैंक बनाने होंगे, जिसमें समय लगेगा।
देश को क्या होगा फायदा?
इस कदम का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि भारत की दूसरे देशों से आने वाले कच्चे तेल पर निर्भरता कम होगी और हमारे देश के किसानों द्वारा तैयार किए जाने वाले बायो-फ्यूल (जैसे गन्ने और अनाज से बनने वाले इथेनॉल) का इस्तेमाल बढ़ेगा। हालांकि, इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनियां कितनी जल्दी ई100 फ्यूल कंपैटिबल गाड़ियां लाती हैं और ग्राहकों को यह कितना पसंद आता है।







