प्रकाश मेहरा
नई दिल्ली: भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष समाप्त करने के लिए घोषित शांति समझौते का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि यह सहमति पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा कि भारत इस समझौते का स्वागत करता है, क्योंकि लंबे समय से चले आ रहे इस संघर्ष ने वैश्विक स्तर पर गंभीर आर्थिक बाधाएँ पैदा की हैं और कई देशों में जनहानि भी हुई है।
अंतरराष्ट्रीय व्यापार की निर्बाधता सुनिश्चित
उन्होंने अपने संदेश में कहा कि “इस समझौते के लागू होने से क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल करने में मदद मिलेगी। साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि इससे समुद्री मार्गों (नेविगेशन) की स्वतंत्रता और अंतरराष्ट्रीय व्यापार की निर्बाधता सुनिश्चित हो सकेगी।”
प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि “भारत को आशा है कि दोनों पक्ष आगे भी बातचीत जारी रखेंगे और अब तक अनसुलझे मुद्दों पर चर्चा करके एक “स्थायी और अंतिम समझौते” की दिशा में आगे बढ़ेंगे।
वैश्विक प्रतिक्रिया भी आई सामने
इस समझौते पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं। बांग्लादेश ने भी इस समझौते का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि इसे “अच्छी नीयत” के साथ लागू किया जाएगा और यह टिकाऊ साबित होगा।
इसके अलावा यूरोपीय देशों की ओर से भी संयुक्त प्रतिक्रिया सामने आई है। ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और इटली के नेताओं ने एक संयुक्त बयान जारी कर इस पहल का समर्थन किया।
क्षेत्रीय तनाव कम करने की दिशा में सकारात्मक कदम
संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने भी इस समझौते का स्वागत करते हुए इसे क्षेत्रीय तनाव कम करने की दिशा में सकारात्मक कदम बताया। जापान, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड जैसे देशों ने भी शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की उम्मीद जताई है।
अमेरिका और ईरान के बीच हुए इस समझौते को वैश्विक समुदाय एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहल के रूप में देख रहा है। भारत सहित कई देशों ने उम्मीद जताई है कि यह कदम पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव को कम करेगा और स्थायी शांति की नींव रखेगा।







