प्रकाश मेहरा
पंजाब डेस्क
अमृतसर। श्री अकाल तख़्त साहिब ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को ‘खालसा पंथ विरोधी’ और ‘गुरु दोषी’ करार दिया है। यह फैसला सोमवार को श्री अकाल तख़्त साहिब में पांच सिंह साहिबानों की बैठक के दौरान लिया गया। निर्णय उस विवादित वीडियो प्रकरण से जुड़ा है, जिसे मुख्यमंत्री पहले कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से निर्मित और फर्जी बता चुके हैं।
बैठक के बाद अकाल तख़्त के कार्यकारी जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज ने बताया कि मामले की जांच भारत सरकार से मान्यता प्राप्त दो फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं से करवाई गई थी। जांच रिपोर्ट में वीडियो से किसी प्रकार की छेड़छाड़ या एआई तकनीक के इस्तेमाल के प्रमाण नहीं मिले। इसके आधार पर सिंह साहिबानों ने मुख्यमंत्री के विरुद्ध धार्मिक निर्णय सुनाया।
जनवरी में शुरू हुआ था विवाद
विवाद की शुरुआत जनवरी 2026 में हुई थी, जब अकाल तख़्त ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को स्पष्टीकरण के लिए तलब किया था। अकाल तख़्त द्वारा जारी नोटिस में आरोप लगाया गया था कि “मुख्यमंत्री ने सिख आचार संहिता, अकाल तख़्त की सर्वोच्चता और ‘गुरु की गोलक’ से संबंधित विषयों पर आपत्तिजनक टिप्पणियां की हैं।
नोटिस में कुछ वीडियो क्लिप का भी उल्लेख किया गया था, जिनके आधार पर आरोप लगाया गया कि “मुख्यमंत्री ने सिख गुरुओं और संत जरनैल सिंह भिंडरांवाले की तस्वीरों के साथ अनुचित व्यवहार किया। सिख संगठनों ने इन कथित गतिविधियों को धार्मिक मर्यादा के विरुद्ध बताया था।
अकाल तख़्त के समक्ष पेश हुए थे मुख्यमंत्री
5 जनवरी 2026 को अकाल तख़्त के कार्यकारी जत्थेदार ने मुख्यमंत्री को तलब करने का आदेश जारी किया था। इसके बाद 15 जनवरी को भगवंत मान अकाल तख़्त सचिवालय में पेश हुए और अपना पक्ष रखा।
मुख्यमंत्री ने अपने जवाब में कहा था कि विवादित वीडियो वास्तविक नहीं है, बल्कि उसे एआई तकनीक की सहायता से तैयार किया गया है। उन्होंने आरोपों को राजनीतिक और भ्रामक बताते हुए वीडियो की सत्यता पर सवाल उठाए थे।
फॉरेंसिक रिपोर्ट बनी फैसले का आधार
अकाल तख़्त के अनुसार मामले की निष्पक्ष जांच के लिए दो स्वतंत्र फॉरेंसिक लैब से वीडियो की तकनीकी जांच कराई गई। रिपोर्ट में वीडियो को संपादित या एआई जनित साबित करने वाला कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला। इसके बाद पांच सिंह साहिबानों ने विचार-विमर्श कर अंतिम निर्णय सुनाया।
सिख समुदाय की सर्वोच्च धार्मिक संस्था
अकाल तख़्त सिख समुदाय की सर्वोच्च धार्मिक संस्था मानी जाती है और उसके निर्णयों का व्यापक धार्मिक एवं सामाजिक महत्व होता है। ऐसे में किसी मौजूदा मुख्यमंत्री को ‘खालसा पंथ विरोधी’ और ‘गुरु दोषी’ घोषित किया जाना पंजाब की राजनीति और सिख धार्मिक जगत में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
फैसले के बाद राजनीतिक दलों, सिख संगठनों और सामाजिक समूहों की प्रतिक्रियाओं पर नजर बनी हुई है। वहीं मुख्यमंत्री भगवंत मान और उनकी पार्टी की ओर से इस ताजा निर्णय पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।







