नई दिल्ली। पेट्रोल-डीजल के रेट से लंबे समय से आम आदमी परेशान हैं तो वहीं दूसरी तरफ तेल कंपनियों की कमाई लगातार मजबूत बनी हुई है. आने वाले दिनों में कच्चे तेल की चाल और सरकार की नीति तय करेगी कि पेट्रोल-डीजल सस्ता होगा या नहीं. ऑयल मार्केटिंग कंपनियों का मार्जिन फिर से बढ़कर पुराने स्तर पर पहुंच गया है. यानी कंपनियां हर लीटर पेट्रोल-डीजल पर अच्छी कमाई कर रही हैं, लेकिन इसका फायदा फिलहाल ग्राहकों तक नहीं पहुंच रहा. वहीं, एक रिपोर्ट ने फिर से इस बहस को तेज कर दिया है कि जब तेल कंपनियों की कमाई बढ़ रही है तो जनता को राहत क्यों नहीं मिल रही है. यहां से आप इस रिपोर्ट के बारे में डिटेल में जानिए.
रिपोर्ट में क्या है?
तेल कंपनियां जिस कीमत पर कच्चा तेल खरीदती हैं और प्रोसेसिंग के बाद जिस दाम पर पेट्रोल-डीजल बेचती हैं, उसके बीच का अंतर उनका मार्जिन कहलाता है. ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म JP Morgan की रिपोर्ट के अनुसार भारत की तेल कंपनियों का पेट्रोल और डीजल पर मार्केटिंग मार्जिन फिर से बढ़ गया है. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम एशिया तनाव के दौरान जो दबाव बना था, अब वह काफी हद तक कम हो चुका है. तेल कंपनियों का मार्जिन अब फिर से प्री-कॉन्फ्लिक्ट यानी संघर्ष से पहले वाले स्तर पर पहुंच गया है. इसका मतलब है कि कंपनियां तेल बेचकर अच्छी कमाई कर रही हैं.
आम जनता के क्या हैं सवाल?
अब आम जनता पेट्रोल- डीजल के दाम को लेकर बड़े सवाल कर रही है. सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब तेल कंपनियों का मार्जिन बढ़ रहा है तो पेट्रोल-डीजल सस्ता क्यों नहीं हो रहा है? दरअसल भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमत सिर्फ कच्चे तेल पर निर्भर नहीं करती. इसमें केंद्र और राज्य सरकारों के टैक्स, डीलर कमीशन, ट्रांसपोर्ट खर्च और कंपनियों का मार्जिन भी शामिल होता है. यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल नरम होने के बावजूद आम लोगों को तुरंत राहत नहीं मिलती.
कच्चे तेल में उतार-चढ़ाव जारी
बीते कुछ दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है. कभी मध्य पूर्व तनाव से कीमतें बढ़ती हैं तो कभी मांग कमजोर होने पर गिरावट आ जाती है. हालांकि फिलहाल कई रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि तेल बाजार पहले के मुकाबले थोड़ा स्थिर हुआ है. अगर कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रण में रहती हैं और खुदरा दाम ज्यादा नहीं घटते, तो ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की कमाई मजबूत बनी रहती है. इसी वजह से निवेशकों की नजर अब तेल कंपनियों के शेयरों पर भी बनी हुई है.







