काठमांडू: नेपाल को कबाड़ पैसेंजर प्लेन बेचकर अरबों रुपये का चूना लगाने वाले चीन की अब पोल खुलने जा रही है। नेपाल के सुप्रीम कोर्ट ने बालेन शाह सरकार से जवाब मांगा है कि क्यों चीनी विमानों के विवादित खरीद की कभी जांच नहीं की गई। नेपाल एयरलाइंस ने करीब 13 साल पहले इन चीनी विमानों को खरीदा था लेकिन ये कबाड़ निकले और उड़ ही नहीं पा रहे हैं। चीन से इन विमानों को खरीदने पर अरबों रुपये खर्च किया गया था। इन विमानों के बेकार निकल जाने की वजह से नेपाल एयरलाइंस को भारी घाटा हुआ है और जनता का पैसा बेकार चला गया।
काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक 26 जून को एक याचिका के जवाब में दिए अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने जांच को लेकर जवाब मांगा है। इसके साथ ही नेपाल के सबसे विवादित विमान समझौते को लेकर चर्चा तेज हो गई है। नेपाल ने कुल 6 चीनी प्लेन खरीदे थे और उसे उम्मीद थी कि इससे उसके विमानन क्षेत्र की सूरत बदल जाएगी। खासतौर पर पहाड़ी इलाके में उड़ान सेवा को मजबूत करने का प्लान था। ये विमान नेपाल की सरकारी एयरलाइन को फायदा पहुंचाने की बजाए उसके लिए सफेद हाथी साबित हुए।
चीनी प्लेन उड़ ही नहीं रहे, खड़ा करने में करोड़ों खर्च
रिपोर्ट के मुताबिक नेपाल ने चार 17 सीटों वाला और दो विमान 56 सीटों वाला खरीदा था। ये विमान हवा की बजाय जमीन पर ज्यादा समय तक खड़े रहे। नेपाल एयरलाइंस ने हमेशा के लिए 5 बचे हुए चीनी विमानों को जुलाई 2020 में उड़ाना बंद कर दिया। इन विमानों को ऑपरेशनल रखने में भारी खर्च आ रहा था और तेल भी काफी ज्यादा खर्च हो रहा था। इन कलपुर्जे भी चीन महंगा दे रहा था। इससे ये विमान नेपाल के लिए सफेद हाथी बन गए थे।
नेपाल एयरलाइन ने इन विमानों को बार-बार लीज पर देने या उसे बेचने की कोशिश की लेकिन बेकार रहा। इन विमानों के मेंटेनेंस, पार्किंग और संरक्षण में करोड़ों रुपये बर्बाद हो गए। नेपाल ने इन विमानों को साल 2014 से 2018 के बीच में चीनी ग्रांट और लोन की मदद से 6 अरब 66 करोड़ नेपाली रुपये में खरीदा था। इन विमानों को नेपाल के त्रिभुवन इंटरनैशनल एयरपोर्ट पर खड़ा रखा गया है। इस विवादित डील को लेकर नेपाल के सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। चीन ने इस मामले में चुप्पी साध रखी है।







