प्रकाश मेहरा
अयोध्या (स्पेशल डेस्क)। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। कांग्रेस ने इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में तत्काल जांच कराने की मांग की है। कांग्रेस का कहना है कि यदि मंदिर से जुड़े आर्थिक लेन-देन में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है, तो इसकी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच आवश्यक है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पब्लिक अकाउंट्स कमेटी (पीएसी) के अध्यक्ष के.सी. वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इस संबंध में जानकारी साझा की। उन्होंने आरोप लगाया कि “अयोध्या राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए चंदे और चढ़ावे में बड़े पैमाने पर कथित गड़बड़ियां सामने आई हैं, जिसने देशभर के करोड़ों राम भक्तों की भावनाओं को आहत किया है।”
कांग्रेस ने क्या कहा ?
के.सी. वेणुगोपाल ने अपने बयान में कहा कि “करोड़ों श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीराम के प्रति आस्था और विश्वास के साथ अपनी मेहनत की कमाई मंदिर में दान की है। उन्होंने आरोप लगाया कि खुद को हिंदू आस्था का संरक्षक बताने वाले लोगों के कार्यों से भगवान राम की मर्यादा और उनकी छवि को नुकसान पहुंचा है।”
उन्होंने कहा कि “श्रीराम जन्मभूमि मंदिर का निर्माण सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद गठित ट्रस्ट के माध्यम से किया गया है और मंदिर प्रशासन से जुड़े मामलों की जवाबदेही केंद्र सरकार पर भी है। ऐसे में यदि चढ़ावे और दान की राशि में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है, तो उसकी जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।”
करोड़ों रुपये की कथित गड़बड़ी
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि “कथित अनियमितताओं को लेकर पहले भी कई बार चेतावनी और शिकायतें सामने आई थीं, लेकिन उन्हें गंभीरता से नहीं लिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब करोड़ों रुपये की कथित गड़बड़ी हो रही थी, तब जिम्मेदार लोगों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया।
के.सी. वेणुगोपाल ने कहा कि “उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है, ताकि सच्चाई सामने आ सके और श्रद्धालुओं का विश्वास कायम रहे।”
आधिकारिक पक्ष का इंतजार
फिलहाल इस मामले में केंद्र सरकार, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट या मंदिर प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। यदि मामले की जांच शुरू होती है, तो उससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और क्या मंदिर के चढ़ावे से संबंधित धनराशि के प्रबंधन में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है।







