प्रकाश मेहरा
एग्जीक्यूटिव एडिटर
अयोध्या। अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। इस मामले में प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई करते हुए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने जिन तीन लोगों को अपनी व्यवस्थाओं से अलग किया है, उनमें मंदिर प्रशासन से जुड़े गोपाल राव भी शामिल हैं। कार्रवाई के बाद गोपाल राव ने पहली बार अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि वह अभी इस मामले पर सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं कहना चाहते और केवल एसआईटी (विशेष जांच दल) की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही अपना पक्ष रखेंगे।
झूठ और अफ़वाहों का बाज़ार गर्म
गोपाल राव ने मीडिया से बातचीत में कहा, “हम अभी किसी भी मीडिया के लोगों से बात नहीं कर रहे हैं। हर जगह झूठ और अफ़वाहों का बाज़ार गर्म है।” उन्होंने आगे कहा कि “मीडिया में उनके बारे में कई ऐसी खबरें प्रसारित की गई हैं, जो तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। उनके अनुसार, इन खबरों से मीडिया की विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
गोपाल राव ने कहा, “मैं तभी बोलूंगा जब एसआईटी की फाइनल रिपोर्ट सामने आएगी। उसके बाद मेरे पास भी कई विकल्प होंगे, जिनमें मानहानि का मुकदमा दायर करना भी शामिल है। समय आने पर मैं पूरे मामले में विस्तार से अपनी बात रखूंगा।”
क्या थी गोपाल राव की भूमिका ?
गोपाल राव श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के औपचारिक सदस्य नहीं थे, लेकिन मंदिर के दैनिक प्रशासन, दर्शन व्यवस्था और संचालन से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। इसके अलावा उन्हें ट्रस्ट की बैठकों में विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में बुलाया जाता था और प्रशासनिक विषयों पर उनकी भागीदारी रहती थी।
हालांकि, सोमवार को आयोजित ट्रस्ट की बैठक में निर्णय लिया गया कि उन्हें आगे से विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में भी बैठकों में नहीं बुलाया जाएगा। ट्रस्ट की ओर से उनके खिलाफ मंदिर प्रशासन और निगरानी व्यवस्था में कथित लापरवाही को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
चढ़ावा चोरी मामले में अब तक क्या कार्रवाई हुई ?
राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले की जांच एसआईटी कर रही है। जांच के दौरान अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि चढ़ावे के प्रबंधन में किस स्तर पर अनियमितताएं हुईं और इसके लिए कौन-कौन जिम्मेदार है।
ट्रस्ट में भी हुए बड़े बदलाव
इस पूरे विवाद के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में भी महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिले हैं। ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा अपने पदों से इस्तीफा दे चुके हैं। हालांकि, उनके इस्तीफे के पीछे आधिकारिक रूप से क्या कारण रहे, इस पर ट्रस्ट की ओर से विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
एसआईटी रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
फिलहाल इस पूरे मामले में सभी की निगाहें एसआईटी की अंतिम जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं। गोपाल राव ने भी स्पष्ट कर दिया है कि वह रिपोर्ट आने से पहले किसी भी तरह का विस्तृत बयान नहीं देंगे। ऐसे में जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित अनियमितताओं की जिम्मेदारी किस पर तय होती है और आगे क्या कार्रवाई की जाती है।






