नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया यात्रा (PM Modi Indonesia Visit) भारत और इंडोनेशिया के रिश्तों के लिए एक नया अध्याय साबित हुई. इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने रक्षा, समुद्री सुरक्षा, अंतरिक्ष, महत्वपूर्ण खनिज, कृषि, चुनाव प्रबंधन, सांस्कृतिक विरासत और औद्योगिक सहयोग समेत करीब 20 महत्वपूर्ण समझौतों (MoUs) पर (India Indonesia Deals) हस्ताक्षर किए. सबसे बड़ी उपलब्धि रक्षा क्षेत्र में रही, जहां भारत इंडोनेशिया को ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल प्रणाली और अस्त्र एयर-टू-एयर मिसाइल (Brahmos Missile Deal) उपलब्ध कराएगा. इसे भारत के रक्षा निर्यात और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक प्रभाव को मजबूत करने वाला बड़ा कदम माना जा रहा है.
प्रधानमंत्री मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता में रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाईदेने पर सहमति बनी. दोनों नेताओं ने रक्षा, व्यापार, ऊर्जा, समुद्री सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा, डिजिटल अर्थव्यवस्था और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर दिया. यह प्रधानमंत्री मोदी की 2023 के बाद इंडोनेशिया की पहली द्विपक्षीय यात्रा है और 2018 में स्थापित व्यापक रणनीतिक साझेदारी की दिशा में अब तक की सबसे बड़ी प्रगति मानी जा रही है.
ब्रह्मोस और अस्त्र से मजबूत होगा रक्षा सहयोग
इस बैठक की सबसे अहम उपलब्धि भारत के स्वदेशी रक्षा उद्योग से जुड़ी रही. दोनों देशों के बीच ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली पर सहयोग का समझौता हुआ है. इसके तहत इंडोनेशिया अपने ब्रह्मोस मिसाइल भंडार का विस्तार करेगा और भारत अतिरिक्त ब्रह्मोस बैटरियों की सप्लाई करेगा. समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से बताया कि इस डील के तहत इंडोनेशिया भारत से 63 करोड़ डॉलर के हथियार खरीदेगा.
इसके साथ ही इंडोनेशिया ने भारत की अस्त्र एयर-टू-एयर मिसाइल को भी अपनाने का फैसला किया है. माना जा रहा है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय मिसाइल प्रणाली की प्रभावी क्षमता से प्रभावित होकर इंडोनेशिया ने यह निर्णय लिया. इससे भारत के रक्षा निर्यात को नई गति मिलेगी और ‘मेक इन इंडिया फॉर द वर्ल्ड’ अभियान को भी मजबूती मिलेगी.
ईवीएम पर हुई बड़ी डील
चुनाव प्रबंधन के क्षेत्र में भी भारत के निर्वाचन आयोग (ECI) और इंडोनेशिया के आम चुनाव आयोग (KPU) के बीच समझौता हुआ. इसके तहत दोनों देश चुनावी प्रबंधन, तकनीक, प्रशिक्षण और सर्वोत्तम प्रक्रियाओं का आदान-प्रदान करेंगे. भारत इंडोनेशिया की जरूरतों के अनुरूप विशेष इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) विकसित करने में भी सहयोग करेगा.
साबांग पोर्ट पर बढ़ेगा सहयोग
भारत और इंडोनेशिया ने समुद्री सुरक्षा सहयोग को भी नई दिशा दी है. समझौते के तहत दोनों देशों के तटरक्षक बलों के बीच सहयोग बढ़ेगा. समुद्री निगरानी, खोज एवं बचाव अभियान, क्षमता निर्माण और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षित नौवहन सुनिश्चित करने के लिए संयुक्त प्रयास किए जाएंगे.
साथ ही दोनों देश साबांग बंदरगाह के विकास में भी सहयोग करेंगे. मलक्का स्ट्रेट के निकट स्थित यह बंदरगाह भारत की ग्रेट निकोबार परियोजना के बेहद करीब है और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में इसकी रणनीतिक अहमियत काफी अधिक मानी जाती है.
क्रिटिकल मिनरल्स और स्टील सेक्टर में बड़ा निवेश
दोनों देशों ने महत्वपूर्ण खनिजों और इस्पात आपूर्ति श्रृंखला प्रौद्योगिकी में सहयोग बढ़ाने के लिए समझौता किया. इसके तहत भारत इंडोनेशिया में स्टील, निकेल और रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट्स के निर्माण में निवेश करेगा.
इस सहयोग से खनिज क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा, आधुनिक निष्कर्षण और प्रसंस्करण तकनीकों तक पहुंच आसान होगी और दोनों देशों के बीच संयुक्त अनुसंधान एवं परियोजनाओं को बढ़ावा मिलेगा. इससे इलेक्ट्रिक वाहन, सेमीकंडक्टर और हाई-टेक उद्योगों के लिए जरूरी क्रिटिकल मिनरल्स की आपूर्ति श्रृंखला भी मजबूत होगी.
इसी कड़ी में स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAIL) और पीटी क्राकाताउ स्टील के बीच इंडोनेशिया में स्टेनलेस स्टील स्लैब निर्माण संयंत्र स्थापित करने के लिए संयुक्त उद्यम (Joint Venture) पर भी सहमति बनी है. इससे दोनों देशों में औद्योगिक उत्पादन, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे.
रेयर अर्थ मैग्नेट्स पर भी साझेदारी
रेयर अर्थ और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए नॉन-फेरस मैटेरियल्स टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट सेंटर (NFTDC), मिडवेस्ट लिमिटेड और पीटी पर्मिनास के बीच भी समझौता हुआ है. इसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर रेयर अर्थ सप्लाई चेन का विविधीकरण करना और रणनीतिक खनिजों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है.
अंतरिक्ष और कृषि क्षेत्र में भी नई पहल
दोनों देशों ने शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए अंतरिक्ष सहयोग संबंधी रूपरेखा समझौते का विस्तार किया. इससे संयुक्त अनुसंधान, सैटेलाइट तकनीक, वैज्ञानिक सहयोग और क्षमता निर्माण को बढ़ावा मिलेगा.
कृषि क्षेत्र में भारत इंडोनेशिया को DWR-162 किस्म के 100 टन उच्च गुणवत्ता वाले गेहूं के बीज उपलब्ध कराएगा. इसका उद्देश्य खाद्य सुरक्षा को मजबूत करना और टिकाऊ कृषि सहयोग को बढ़ावा देना है.
दोनों देशों ने सांस्कृतिक सहयोग को भी नई गति दी. भारत इंडोनेशिया के योग्याकार्ता स्थित विश्व प्रसिद्ध प्रम्बानन मंदिर परिसर के संरक्षण और पुनरुद्धार में सहयोग करेगा. इसे ‘विकास भी, विरासत भी’ की नीति का हिस्सा माना जा रहा है और इससे दोनों देशों की साझा सभ्यतागत विरासत को संरक्षित करने में मदद मिलेगी.







