प्रकाश मेहरा
एक्जीक्यूटिव एडिटर
नई दिल्ली: देश के सबसे प्रतिष्ठित सरकारी अस्पतालों में शुमार अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), नई दिल्ली में सर्जरी के लिए मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त जानकारी ने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की चुनौतियों को एक बार फिर उजागर कर दिया है। जानकारी के अनुसार, अस्पताल के कुछ विभागों में मरीजों को ऑपरेशन के लिए 3 महीने से लेकर करीब ढाई वर्ष तक प्रतीक्षा करनी पड़ सकती है।
ऑर्थोपेडिक विभाग में सबसे लंबी वेटिंग
RTI से मिली जानकारी के मुताबिक, ऑर्थोपेडिक (हड्डी रोग) विभाग में निर्धारित (Elective) सर्जरी के लिए मरीजों की प्रतीक्षा अवधि सबसे अधिक है। कई मामलों में मरीजों को 3 महीने से लेकर लगभग 2.5 साल तक इंतजार करना पड़ रहा है।
इसी तरह गायनेकोलॉजिक ऑन्कोलॉजी (महिला कैंसर सर्जरी) और प्लास्टिक सर्जरी विभाग में भी सर्जरी के लिए कई सप्ताह से लेकर महीनों तक की वेटिंग दर्ज की गई है। इससे स्पष्ट होता है कि सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं पर मरीजों का दबाव लगातार बढ़ रहा है।
AIIMS ने क्या कहा ?
AIIMS प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह प्रतीक्षा अवधि केवल इलेक्टिव (पूर्व-निर्धारित) सर्जरी पर लागू होती है। अस्पताल का कहना है कि दुर्घटना, गंभीर चोट, जीवनरक्षक या अन्य आपातकालीन मामलों में मरीजों का इलाज और ऑपरेशन प्राथमिकता के आधार पर तत्काल किया जाता है। ऐसे मरीजों को लंबी प्रतीक्षा सूची में शामिल नहीं किया जाता।
लंबी वेटिंग के पीछे क्या हैं कारण ?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, AIIMS दिल्ली पर देशभर से आने वाले मरीजों का अत्यधिक दबाव इस स्थिति का सबसे बड़ा कारण है। इसके अलावा—देशभर से बड़ी संख्या में रेफर होकर आने वाले मरीज।सीमित ऑपरेशन थिएटर और अस्पताल की क्षमता।विशेषज्ञ डॉक्टरों एवं स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता।जटिल और सुपर स्पेशियलिटी मामलों की अधिक संख्या। लगातार बढ़ती स्वास्थ्य सेवाओं की मांग। इन सभी कारणों से सर्जरी की प्रतीक्षा सूची लगातार लंबी होती जा रही है।
वरिष्ठ डॉक्टरों के इस्तीफों की भी रही चर्चा
पिछले कुछ वर्षों में AIIMS दिल्ली से कई वरिष्ठ चिकित्सकों के इस्तीफा देने और निजी क्षेत्र का रुख करने की खबरें भी सामने आती रही हैं। हालांकि इन घटनाओं का मौजूदा वेटिंग लिस्ट से प्रत्यक्ष संबंध स्थापित नहीं किया गया है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि अनुभवी विशेषज्ञों की उपलब्धता भी स्वास्थ्य सेवाओं की क्षमता को प्रभावित कर सकती है।
सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते केंद्र और राज्य सरकारें सरकारी सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों की क्षमता नहीं बढ़ाती हैं, नए संस्थानों को मजबूत नहीं किया जाता और डॉक्टरों व संसाधनों की संख्या में वृद्धि नहीं की जाती, तो भविष्य में मरीजों को इलाज के लिए और अधिक इंतजार करना पड़ सकता है।
विशेषज्ञ यह भी सुझाव देते हैं कि AIIMS जैसे राष्ट्रीय संस्थानों पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए देशभर के मेडिकल कॉलेजों, एम्स संस्थानों और क्षेत्रीय सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों को समान स्तर पर विकसित करना आवश्यक है, ताकि मरीजों को अपने राज्यों में ही बेहतर उपचार उपलब्ध हो सके।
देश की स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने चुनौतियां!
RTI से सामने आई यह जानकारी देश की स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने मौजूद चुनौतियों की ओर गंभीर संकेत करती है। एक ओर AIIMS जैसी संस्थाओं पर देशभर का भरोसा लगातार बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर सीमित संसाधनों के कारण मरीजों को लंबे समय तक सर्जरी का इंतजार करना पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्वास्थ्य अवसंरचना के विस्तार, विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बढ़ाने और क्षेत्रीय चिकित्सा संस्थानों को सशक्त बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाना समय की मांग है।







