सतीश मुखिया
मथुरा: अंतिम व्यक्ति कौन है, समझ नहीं आ रहा है, शासन प्रशासन, केंद्र सरकार, राज्य सरकार, त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था स्थानीय स्तर पर सभी लोग अंतिम व्यक्ति के विकास हेतु विभिन्न कार्य योजनाओं पर कार्य कर रहे हैं लेकिन आजादी के 80 वर्ष बीतने के उपरांत भी उसे अंतिम व्यक्ति का विकास नजर नहीं आ रहा है।
अब से कुछ दिन बाद हम सभी भारतीय मिलकर 15 अगस्त मनाएंगे झंडा फहराएंगे और फिर मंच पर खड़े होकर उन्हें समस्याओं पर फिर से बात करेंगे और 15 अगस्त का समारोह संपन्न हो जाएगा लेकिन मूल सवाल यह है कि जब हम सब लोग पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय को मानते हुए उसे अंतिम व्यक्ति के विकास हेतु तत्पर हैं लेकिन देखने में ऐसा महसूस प्रतीत होता है कि जो भी कार्य योजनाएं केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार चलाई द्वारा चलाई जाती हैं वह योजनाएं जमीनी स्तर पर सही तरीके से क्रियान्वित हो नहीं पाती है ।
सवाल यह है कि सभी लोग चाहते हैं कि भारत के गांव का और पंचायत का संपूर्ण विकास हो लेकिन स्थानीय राजनीतिके भाई भतीजाबाद जातिवाद और अहम कारण आज भी यह पंचायत अपनी दुर्दशा पर रो रही है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पंचायत को परफॉर्मेंस ग्रांट के तहत गोरखपुर मंडल और अन्य मंडलों की विभिन्न पंचायत को फंड आवंटित किया गया जिससे कि यह पंचायत अपने आप को विकास मॉडल के रूप में प्रस्तुत कर सकें और अन्य पंचायतें उनका अनुसरण करते हुए उनके रास्ते पर चलें।
इसी प्रकार केंद्र सरकार द्वारा सांसद आदर्श ग्राम योजना का संचालन किया गया और प्रत्येक संसदीय क्षेत्र से तीन गांवों को सांसदों द्वारा गोद लिया गया जिसके तहत इन ग्राम पंचायत का विकास करके मॉडल के रूप में अन्य गांव के लिए प्रस्तुत करना था लेकिन यह योजना भी पूर्ण रूप से अपूर्ण ही रही जब इन योजनाओं की शुरुआत की गई तब बड़े स्तर पर सभी मीडिया हाउसहोल्ड द्वारा इनका प्रमोशन किया गया लेकिन समय बीतने के बाद आज यह योजनाएं बंद हो चुकी है या बंद होने के कगार पर है।







