प्रकाश मेहरा
स्पेशल डेस्क
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान राम मंदिर के चढ़ावे और चंदे को लेकर लगाए गए आरोपों पर सदन में जोरदार हंगामा देखने को मिला। समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायकों ने इस मुद्दे पर चर्चा की मांग करते हुए सरकार के खिलाफ नारेबाजी की, जिसके चलते सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए बाधित रही। इस पूरे घटनाक्रम पर विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कड़ी नाराजगी जताई और विपक्षी सदस्यों के आचरण को सदन की गरिमा के विपरीत बताया।
चढ़ावा विवाद को लेकर विपक्ष का प्रदर्शन
मानसून सत्र के दौरान समाजवादी पार्टी के विधायक राम मंदिर के चढ़ावे और चंदे से जुड़े कथित अनियमितताओं के मुद्दे पर चर्चा की मांग कर रहे थे। इसी दौरान विपक्षी सदस्यों ने सदन के भीतर “चंदा चोर, गद्दी छोड़” जैसे नारे लगाए और सरकार को घेरने का प्रयास किया। विपक्ष का कहना था कि इस मामले पर सदन में विस्तृत चर्चा कराई जानी चाहिए।
स्पीकर सतीश महाना का पलटवार
हंगामे के बीच विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने विपक्ष के आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जो सदस्य चंदा चोरी के आरोप लगा रहे हैं, वे पहले यह स्पष्ट करें कि क्या उन्होंने स्वयं राम मंदिर निर्माण के लिए चंदा दिया था।
स्पीकर ने कहा कि यदि किसी ने चंदा दिया है तो वह उसकी रसीद सदन में प्रस्तुत करे। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि बिना किसी ठोस प्रमाण के इस प्रकार के गंभीर आरोप लगाना उचित नहीं है।
सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील
सतीश महाना ने सदन में हुए हंगामे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि विधानसभा लोकतांत्रिक व्यवस्था का सर्वोच्च मंच है, जहां जनहित के मुद्दों पर गंभीर और मर्यादित चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन सदस्यों को सदन का ‘रोल मॉडल’ माना जाता था, उन्हीं द्वारा इस प्रकार का व्यवहार करना अत्यंत दुखद है। उन्होंने सभी दलों के सदस्यों से संसदीय परंपराओं और सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील की।
अनुशासनहीनता पर सख्त कार्रवाई
कार्यवाही के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई। इस दौरान सदन की व्यवस्था लगातार बाधित होने पर विधानसभा अध्यक्ष ने अनुशासनहीनता का हवाला देते हुए समाजवादी पार्टी के विधायक सचिन यादव को पूरे मानसून सत्र के लिए सदन से निष्कासित कर दिया।
स्पीकर ने स्पष्ट किया कि सदन की कार्यवाही को सुचारु रूप से चलाना उनकी जिम्मेदारी है और किसी भी सदस्य को नियमों एवं संसदीय मर्यादा का उल्लंघन करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
राजनीतिक माहौल हुआ गरम
राम मंदिर चढ़ावे को लेकर उठे इस विवाद ने उत्तर प्रदेश की राजनीति को एक बार फिर गरमा दिया है। जहां विपक्ष सरकार से जवाब मांग रहा है, वहीं सत्ता पक्ष विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप लगा रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।







