नई दिल्ली। स्टार क्रिकेटर ऋषभ पंत को उत्तराखंड का निवासी होने के बाद भी वहां पर जमीन नहीं मिल पा रही है. जिसके चलते उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मदद मांगी है. इस घटना के बाद एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर भारत के किन-किन राज्यों में लोग आसानी से जमीन नहीं खरीद सकते? पहाड़ों की शांत वादियों या पूर्वोत्तर के खूबसूरत राज्यों में अपना सपनों का घर बनाना कई लोगों की चाहत होती है, लेकिन देश के कई राज्यों में स्थानीय संस्कृति, नाजुक पर्यावरण और आदिवासी अधिकारों की रक्षा के लिए सख्त भूमि कानून लागू किए गए हैं. आइए जानते हैं किन राज्यों में यह पाबंदियां लागू हैं और इसके पीछे की मुख्य वजहें क्या हैं.
हिमाचल प्रदेश का 1972 का भूमि कानून
हिमाचल प्रदेश अपनी ठंडी वादियों के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन यहां बाहरी निवासियों के लिए कृषि भूमि खरीदना आसान नहीं है. राज्य में वर्ष 1972 में हिमाचल प्रदेश टेनेंसी एंड लैंड रिफॉर्म्स एक्ट लागू किया गया था. इस कानून की धारा 118 स्पष्ट रूप से प्रावधान करती है कि कोई भी गैर-कृषक या राज्य के बाहर का निवासी यहां खेती की जमीन नहीं खरीद सकता है. हालांकि, राज्य सरकार व्यावसायिक गतिविधियों, पर्यटन या विशेष जरूरतों के लिए शर्तों के साथ सीमित अनुमति दे सकती है, लेकिन सामान्य तौर पर जमीन का मालिकाना हक नहीं दिया जाता है.
नागालैंड और सिक्किम में क्या हैं नियम?
पूर्वोत्तर के नागालैंड और सिक्किम राज्यों में भूमि खरीद पर सबसे सख्त पाबंदियां लागू हैं. वर्ष 1963 में नागालैंड को पूर्ण राज्य का दर्जा मिलने के साथ ही भारतीय संविधान के अनुच्छेद 371A के तहत विशेष अधिकार मिले थे. इसके तहत किसी भी बाहरी व्यक्ति को नागालैंड में जमीन खरीदने की अनुमति नहीं है. ठीक इसी तरह, अनुच्छेद 371F के जरिए सिक्किम को विशेष दर्जा दिया गया है, जहां केवल वहां के मूल निवासी ही जमीन के खरीदार और विक्रेता हो सकते हैं. बाहरी लोगों के लिए संपत्ति ट्रांसफर पर पूरी तरह से रोक है.
अरुणाचल प्रदेश और पूर्वोत्तर के अन्य राज्य
पर्यटन के लिहाज से मशहूर अरुणाचल प्रदेश में भी कोई बाहरी नागरिक सीधे जमीन नहीं खरीद सकता है. यहां कृषि भूमि का हस्तांतरण केवल सरकारी मंजूरी के बाद ही विशेष परिस्थितियों में संभव है. इसके अलावा मिजोरम, मेघालय और मणिपुर में भी स्थानीय आदिवासी समुदायों के भूमि अधिकारों की रक्षा के लिए कड़े कानून बने हुए हैं. दिलचस्प बात यह है कि पूर्वोत्तर के इन राज्यों के मूल निवासी भी एक-दूसरे के राज्य में जाकर आसानी से जमीन या प्रॉपर्टी नहीं खरीद सकते हैं.
जम्मू-कश्मीर के नियम और पाबंदियां
वर्ष 2019 में अनुच्छेद 370 के बेअसर होने के बाद जम्मू-कश्मीर में भूमि खरीद से जुड़े पुराने नियमों में कई बड़े बदलाव किए गए हैं. अब देश का कोई भी नागरिक वहां संपत्ति खरीद सकता है, लेकिन इसके बावजूद पूरी तरह से छूट नहीं दी गई है. राज्य प्रशासन ने पर्यावरण और कृषि भूमि के संरक्षण के लिए कुछ खास इलाकों, रक्षा क्षेत्रों और कृषि योग्य भूमि की खरीद-बिक्री पर आज भी कई तरह की पाबंदियां और सख्त नियम लागू कर रखे हैं.
आखिर क्यों इन जगहों पर नहीं खरीद सकते जमीन?
पहाड़ी और सीमावर्ती इलाकों में मैदानी क्षेत्रों की तुलना में सीमित जमीन उपलब्ध होती है. यदि बाहरी लोगों को अनियंत्रित रूप से जमीन खरीदने की छूट दे दी जाए, तो संपत्ति के दाम आसमान छूने लगेंगे और स्थानीय लोग अपनी ही जमीन से वंचित हो जाएंगे. इसके अतिरिक्त, पहाड़ों का पारिस्थितिकी तंत्र बेहद नाजुक होता है. अत्यधिक निर्माण कार्य, अनियोजित पर्यटन और जंगलों की कटाई से प्राकृतिक संसाधनों, नदियों और पहाड़ियों को भारी नुकसान पहुंचता है. इसी संतुलन को बनाए रखने के लिए यह कड़े प्रावधान बनाए गए हैं.







