नई दिल्ली। बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने 17 अगस्त 2026 को अपनी नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान कर दिया. स्मृति ईरानी को महासचिव बनाया गया है और वसुंधरा राजे राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाईं गईं. बीएल संतोष संगठन महामंत्री बने हैं. नई टीम में 13 उपाध्यक्ष और 8 महासचिव बनाए गए हैं. 7 महीने पहले नवीन के अध्यक्ष बनने के बाद से ही टीम का गठन पेंडिग था. पार्टी ने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को देखते हुए अपनी राष्ट्रीय टीम तैयार की. बीजेपी दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी है. इसकी सबसे बड़ी ताकत इसका संगठनात्मक ढांचा है, जो राष्ट्रीय अध्यक्ष से लेकर गांव के बूथ स्तर तक एक अनुशासित जंजीर की तरह काम करता है. तो एक्सप्लेनर में जानते हैं इस पूरे ढांचे को सबसे ऊपर से लेकर सबसे नीचे तक…
सबसे ऊपर: मार्गदर्शक मंडल
बीजेपी संगठन की सबसे ऊपरी इकाई मार्गदर्शक मंडल है. यह पार्टी को वैचारिक और रणनीतिक दिशा देने वाली सर्वोच्च संस्था है. फिर सर्वोच्च फैसला लेने वाला निकाय होता है. इसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करते हैं.
पार्टी की बड़ी नीतियां, चुनावी रणनीतियां और संगठन से जुड़े बड़े फैसले इसी बोर्ड में लिए जाते हैं.
राष्ट्रीय अध्यक्ष: पार्टी का सर्वोच्च पद
बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष पार्टी में सबसे बड़ा अधिकारी होता है. पार्टी संविधान के मुताबिक राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव एक निर्वाचक मंडल करता है, जिसमें लगभग 5,700 सदस्य होते हैं:
- अध्यक्ष पद के लिए उम्मीदवार को कम से कम 15 साल तक पार्टी का प्राथमिक सदस्य और चार कार्यकाल तक सक्रिय सदस्य रहना जरूरी होता है.
- उसे पांच अलग-अलग राज्यों से कम से कम 20 सदस्यों का समर्थन चाहिए होता है.
- अध्यक्ष का कार्यकाल तीन साल का होता है और एक व्यक्ति लगातार दो कार्यकाल तक ही इस पद पर रह सकता है.
- चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद नए अध्यक्ष का चुनाव होता है. तब तक पुराना अध्यक्ष कार्यवाहक के रूप में काम करता रहता है.
इसके अलावा बीजेपी के 11 राष्ट्रीय उपाध्यक्ष होते हैं. नई टीम में शामिल हैं:
- पूर्व राजस्थान सीएम वसुंधरा राजे सिंधिया
- सांसद बैजयंत पांडा
- तीरथ सिंह रावत (उत्तराखंड)
- राम माधव (दिल्ली)
- डी. पुरंदेश्वरी (आंध्र प्रदेश)
- रेखा धर्म (उत्तर प्रदेश)
- वर्षाबेन नरेंद्रभाई दोशी (गुजरात)
- डॉ. भारती प्रवीण पवार (महाराष्ट्र)
- सरदार मनप्रीत सिंह बादल (पंजाब)
- लाल सिंह आर्य (मध्य प्रदेश)
- प्रो. एम. नागराज (कर्नाटक)
- प्रो. तारिक मंसूर (उत्तर प्रदेश)
- डॉ. मधुचंद्र कर (पश्चिम बंगाल)
राष्ट्रीय कार्यकारिणी: रणनीति बनाने वाली टीम
राष्ट्रीय अध्यक्ष के बाद राष्ट्रीय कार्यकारिणी आती है, जो पार्टी की रणनीति तय करती है. बीजेपी संविधान के मुताबिक, राष्ट्रीय कार्यकारिणी में अध्यक्ष समेत 120 से ज्यादा सदस्य नहीं हो सकते. इसमें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, राष्ट्रीय महासचिव, राष्ट्रीय सचिव और राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष जैसे पद शामिल होते हैं.
इनमें से एक पद महासचिव संगठन का होता है, जो पार्टी के संगठनात्मक कामकाज की पूरी जिम्मेदारी संभालता है. नई टीम में अनुराग ठाकुर और स्मृति ईरानी जैसे बड़े चेहरों को जगह दी गई है, जिससे संगठन को चुनावी और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर मजबूती मिली है.
पार्टी में 7 राष्ट्रीय महामंत्री होते हैं. वर्तमान में ये हैं:
- अरुण सिंह (राष्ट्रीय महासचिव एवं मुख्यालय प्रभारी)
- दुष्यंत गौतम
- विनोद तावड़े
- तरुण चुघ
- सुनील बंसल
- राधा मोहन दास अग्रवाल
- बीएल संतोष (संगठन महामंत्री)
इन महामंत्रियों में संगठन महामंत्री का पद सबसे महत्वपूर्ण होता है. यह पद फिलहाल बीएल संतोष के पास है. इसके अलावा 2 सह-संगठन मंत्री भी होते हैं.
राज्य स्तर: बीजेपी की रीढ़
अगर राष्ट्रीय स्तर पार्टी का दिमाग है, तो राज्य स्तर उसकी रीढ़ है. यहीं पर राष्ट्रीय रणनीतियों को जमीनी हकीकत में ढाला जाता है और राज्य के चुनावों की पूरी कमान संभाली जाती है. बीजेपी संविधान राज्य स्तर की दो मुख्य इकाइयों को परिभाषित करता है- राज्य परिषद और राज्य कार्यकारिणी.
राज्य परिषद को राज्य स्तर की सबसे बड़ी सलाहकार समिति समझिए. इसमें जिला इकाइयों से चुने गए सदस्य, पार्टी के 10 प्रतिशत विधायक, 10 प्रतिशत सांसद, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, राज्य कार्यकारिणी के सभी सदस्य, विधानसभा और विधान परिषद में पार्टी के नेता, सभी जिलाध्यक्ष, नगर निगम और जिला परिषद के अध्यक्ष, प्रदेश अध्यक्ष से मनोनीत 25 सदस्य और राज्य के सभी मोर्चों के अध्यक्ष शामिल होते हैं. राज्य परिषद की सबसे बड़ी जिम्मेदारी प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव करना है.
राज्य कार्यकारिणी को राज्य स्तर की मंत्रिमंडल समझिए. बीजेपी ने राज्यों को तीन कैटेगरीज में बांटा है और हर कैटेगरी के लिए कार्यकारिणी का आकार तय है:
- कैटेगरी-1: अधिकतम 50 सदस्य
- कैटेगरी-2: अधिकतम 60 सदस्य
- कैटेगरी-3: अधिकतम 70 सदस्य हो सकते हैं.
हर कैटेगरी में महिलाओं और अनुसूचित जाति-जनजाति के सदस्यों के लिए आरक्षण तय है. प्रदेश अध्यक्ष अपनी कार्यकारिणी में से ही उपाध्यक्ष, महासचिव, सचिव और कोषाध्यक्ष नियुक्त करता है. सबसे अहम पद महासचिव संगठन का होता है, जिसकी नियुक्ति राष्ट्रीय अध्यक्ष की पूर्व अनुमति से ही होती है.
प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव राज्य परिषद के सदस्य करते हैं. यह प्रक्रिया नीचे से ऊपर चलती है. पहले मंडल स्तर पर चुनाव होते हैं, फिर आधे मंडलों में चुनाव होने के बाद जिला अध्यक्षों का चुनाव होता है और आधे जिलों में चुनाव होने के बाद प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव होता है.
प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए उम्मीदवार को 10 साल का प्राथमिक सदस्य और 3 कार्यकाल तक सक्रिय सदस्य रहना जरूरी है. प्रदेश अध्यक्ष के पास अपनी पूरी टीम बनाने का अधिकार होता है और वह कम से कम 25 प्रतिशत नए सदस्यों को टीम में शामिल कर सकता है.
राज्य से नीचे: पोजीशन बाय पोजीशन पूरा क्रम
हालिया संगठन चुनावों के आंकड़ों की बात करें तो देश के कुल 1,036 जिलों में से 978 जिलों में जिला अध्यक्षों का चुनाव पूरा हो चुका है. कुल 17,743 मंडलों में से 16,469 मंडल अध्यक्षों का चुनाव पूरा हो चुका है. इसी तरह 10,70,462 बूथों में से 7,88,197 बूथ अध्यक्षों का चुनाव पूरा हो चुका है. यह आंकड़े बताते हैं कि पार्टी अपने संगठन को कितनी गंभीरता से खड़ा करती है.
संगठन पर्व: नीचे से ऊपर तक का सफर
बीजेपी में संगठनात्मक ढांचा हमेशा नीचे से ऊपर बनता है. सबसे पहले बूथ अध्यक्षों का चुनाव होता है, फिर मंडल अध्यक्षों का, उसके बाद जिला अध्यक्षों का, फिर प्रदेश अध्यक्ष का और आखिर में राष्ट्रीय अध्यक्ष का. इस पूरी प्रक्रिया को संगठन पर्व कहा जाता है. सबसे खास बात यह है कि कम से कम 50 प्रतिशत राज्यों में प्रदेश अध्यक्ष चुने जाने के बाद ही राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव हो सकता है.
5 चीजें इस ढांचे को खास बनाती हैं:
हर स्तर पर आरक्षण: महिलाओं और अनुसूचित जाति-जनजाति के सदस्यों के लिए हर कमेटी में आरक्षण तय है, जिससे सामाजिक समरसता बनी रहती है.
महासचिव संगठन का विशेष दर्जा: जिला स्तर से ऊपर महासचिव संगठन का पद पूर्णकालिक होता है और उसकी नियुक्ति में ऊपरी स्तर की सहमति जरूरी होती है, जिससे केंद्र और राज्य के बीच मजबूत तालमेल रहता है.
हर मोर्चे की अपनी कार्यकारिणी: युवा मोर्चा, महिला मोर्चा, ओबीसी मोर्चा, एससी मोर्चा, एसटी मोर्चा, किसान मोर्चा और अल्पसंख्यक मोर्चा का अपना संगठन होता है. यह अलग-अलग वर्गों तक पार्टी की पहुंच बनाता है.
पन्ना प्रमुख की ताकत: पन्ना प्रमुख वोटर लिस्ट के एक-एक पेज का इंचार्ज होता है, जो सीधे वोटरों के संपर्क में रहता है. यही वजह है कि बीजेपी हर बूथ पर अपनी पकड़ मजबूत रख पाती है.
नीचे से ऊपर का लोकतंत्र: अध्यक्ष का चुनाव बूथ से शुरू होकर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचता है, जिससे हर कार्यकर्ता को लगता है कि संगठन में उसकी भी हिस्सेदारी है.







