नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में कारोबार और आम जीवन को आसान बनाने की दिशा में उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने शुक्रवार को एक उच्चस्तरीय बैठक में ‘डी-रेगुलेशन और अनुपालन समीक्षा’ की प्रगति की समीक्षा की. यह बैठक गत 29 जुलाई को हुई समीक्षा बैठक के बाद बुलाई गई थी.
इस बैठक में मुख्य सचिव राजीव वर्मा, एमसीडी कमिश्नर, डीडीए के उपाध्यक्ष, शिक्षा सचिव तथा शहरी विकास, पर्यटन, स्वास्थ्य विभागों के सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे. उपराज्यपाल ने बैठक की शुरुआत में ही स्पष्ट शब्दों में अधिकारियों को चेतावनी दी कि यह अभ्यास अब उस चरण में पहुंच चुका है, जहां प्रशासनिक देरी का सीधा असर दिल्ली के आम नागरिकों और कारोबारियों पर पड़ रहा है.
उपराज्यपाल ने कहा कि इस पूरी कवायद का पैमाना यह नहीं होना चाहिए कि पोर्टल पर कितने ‘प्रायोरिटी एरिया’ बंद (कवर) दिखाए गए हैं, बल्कि यह होना चाहिए कि क्या दिल्ली के किसी छोटे दुकानदार, उद्यमी, स्कूल संचालक या मरीज को वास्तव में कम फॉर्म भरने पड़ रहे हैं, कम चक्कर काटने पड़ रहे हैं और मंजूरी तेजी से मिल रही है. उन्होंने निर्देश दिया कि किसी भी सुधार को विभागों के बीच केवल कागजी कार्रवाई या पत्राचार तक सीमित न रखा जाए, बल्कि हर लंबित सुधार को जल्द से जल्द अधिसूचित किया जाए.
मास्टर प्लान-2047 से पहले चरण के सुधारों को मिला बल
बैठक में यह रेखांकित किया गया कि एक दिन पहले ही जारी किए गए ‘मास्टर प्लान फॉर दिल्ली-2047’ (MPD-2047) के लागू होने से पहले चरण (Phase-I) के सभी शेष ‘प्रायोरिटी एरिया’ का रास्ता साफ हो गया है. चरण-1 के कुल 23 प्रायोरिटी एरिया में से 13 पहले ही लागू हो चुके हैं, जबकि नए लेबर कोड के अधिनियमन के बाद 4 को गैर-जरूरी मान लिया गया है. बाकी बचे 6 क्षेत्रों जिनमें लचीले ज़ोनिंग मानदंड, ग्रामीण क्षेत्रों में उद्योगों के लिए न्यूनतम सड़क चौड़ाई, औद्योगिक और वाणिज्यिक भूखंडों के लिए भवन नियम, भवन अनुमोदन में थर्ड पार्टी की भूमिका, तथा कम व मध्यम जोखिम वाली इमारतों के लिए थर्ड-पक्षीय निरीक्षण शामिल हैं.
इसके अलावा, गत 6 अप्रैल को अधिसूचित की गई टीओडी (TOD) नीति और उसके नियम पहले से ही क्रियान्वित हैं. शहरी विकास विभाग द्वारा शेष 48 गांवों के शहरीकरण की अधिसूचना जल्द जारी की जाएगी, जिसके बाद दिल्ली में कोई ग्रामीण क्षेत्र नहीं बचेगा. साथ ही, डीडीए द्वारा एकीकृत भवन उप-नियम (UBBL-2016) में प्रस्तावित संशोधनों को भी जल्द अंतिम रूप दिया जाएगा.
चरण-2 में तेजी: दो सौ किलोवाट तक के बिजली कनेक्शन बिना निरीक्षण
चरण-II की प्रगति का ब्योरा देते हुए बताया गया कि 20 अगस्त तक सात प्रायोरिटी एरिया पूरी तरह लागू कर दिए गए हैं. इनमें एमसीडी द्वारा दोहरे व्यापार लाइसेंस को समाप्त करना, दुकानों और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों के लिए स्थायी पंजीकरण, और 200 किलोवाट तक के बिजली कनेक्शन बिना किसी निरीक्षण के मिलना शामिल है. टास्क फोर्स द्वारा दो अन्य क्षेत्रों चिकित्सकों के लिए सरलीकृत पंजीकरण और सिंगल विंडो सिस्टम पर समय सीमा में कमी को भी लागू हुआ मान लिया गया है. इसके अलावा 18 अन्य सुधार उन्नत चरणों में हैं.
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बिल और अन्य अहम फैसले
बैठक में जानकारी दी गई कि कैबिनेट के निर्देशों के अनुसार ‘दिल्ली ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बिल, 2026’ को संशोधित कर लिया गया है और इसे जल्द ही मंजूरी के लिए कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा. इसके अलावा, अपील के अधिकार वाला ‘दिल्ली (नागरिकों का समयबद्ध सेवा वितरण का अधिकार) बिल, 2026’ कैबिनेट से मंजूर होकर विधानसभा में पारित हो चुका है और इसकी अंतिम अधिसूचना की प्रक्रिया जारी है.
पर्यटन विभाग ने ‘बेड एंड ब्रेकफास्ट एस्टेब्लिशमेंट एक्ट, 2007’ को निरस्त कर दिया है और नई बीएनबी नीति अंतिम चरण में है. स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े लाइसेंसों के लिए डीजीएचएस को सिंगल नोडल एजेंसी बना दिया गया है, जबकि माप और तौल से जुड़े लाइसेंस अब सेल्फ डिक्लेयरेशन पर दिए जाएंगे.
एलजी ने अधिकारियों को चेतावनी दी कि अब तय की गई समय-सीमाएं बाध्यकारी होंगी. उन्होंने हर विभाग से यह रिपोर्ट तलब की है कि उनके लंबित प्रायोरिटी एरिया किस निश्चित तारीख तक अधिसूचित कर दिए जाएंगे. उन्होंने अंत में कहा कि ‘विकसित दिल्ली’ के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता जमीन पर दिखने वाले नतीजों से आंकी जाएगी चाहे वह लंबी कतारों का खत्म होना हो, त्वरित मंजूरियां हों या फिर ऐसा तंत्र हो जिसके लिए नागरिकों को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें.







