नई दिल्ली। केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) की ओर से कल बुधवार को 19 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई, जिन पर राज्य सरकार के अलग-अलग विभागों और संगठनों के 504 करोड़ रुपये के फंड के कथित गबन का आरोप है. दाखिल की गई चार्जशीट में हरियाणा कैडर के 6 IAS अधिकारियों के अलावा IDFC फर्स्ट बैंक के 3 अधिकारी और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक का एक अधिकारी शामिल है.
आरोपियों की लिस्ट में ये 6 IAS
एजेंसी से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि सीबीआई ने इस मामले में पंचकूला की एक स्पेशल कोर्ट में दाखिल अपनी तीसरी चार्जशीट में भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारियों- राम कुमार सिंह, मोहम्मद शहीन, प्रदीप कुमार, साकेत कुमार, विनीत गर्ग और पंकज अग्रवाल, का नाम शामिल किया गया है.
चार्जशीट में बैंक के 3 कर्मचारी भी
अपनी चार्जशीट में जांच एजेंसी ने IDFC फर्स्ट बैंक के 3 अधिकारियों शमीम अहमद डार, सुधा गोयल, कुलदीप सिंह और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक के चरणजीत सिंह रंधावा का भी नाम लिया है. चार्जशीट में हरियाणा सरकार के अन्य अधिकारियों को भी आरोपी बनाया गया है, इसमें राजेश गोयल, दीप्ति कौशिक, सौरव कुमार, प्रिंस शर्मा, परवीन कुमार, सुरिंदर कौर, अमित कुमार, सुरेंद्र जैन और जुगल किशोर शामिल हैं.
एजेंसी की प्रवक्ता बीना यादव ने कल जारी अपने बयान में बताया कि CBI ने इन आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत आपराधिक साजिश रचने, धोखाधड़ी करने, सबूत नष्ट करने, जालसाजी, नकली दस्तावेजों को असली के तौर पर इस्तेमाल करने, खातों में हेरफेर, आपराधिक विश्वासघात और उकसावे के आरोप लगाए हैं. यही नहीं चार्जशीट में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत रिश्वतखोरी और आपराधिक कदाचार के अपराध भी शामिल किए गए हैं.
हरियाणा के 8 विभागों के पैसे का गबन
प्रवक्ता ने कहा, “अब तक की जांच से यह पता चला है कि आरोपी सरकारी कर्मचारियों ने IDFC फर्स्ट बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक के आरोपी बैंकरों के साथ मिलकर एक सुनियोजित तरीके से धोखाधड़ी की साजिश रची और फिर उसे अंजाम तक पहुंचाया.” “साजिश के तहत, हरियाणा सरकार के 8 विभागों के फंड को अलग-अलग अधिकृत बैंकों से IDFC फर्स्ट बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक की उन विशिष्ट शाखाओं में ट्रांसफर किया गया, जहां आरोपी बतौर बैंक अधिकारी काम कर रहे थे. फंड की राशि के गबन के लिए इन बैंक शाखाओं में बैंक खाते भी खोले गए थे.
एजेंसी ने कहा, “सरकारी पैसों के गबन की इस प्रक्रिया में वित्तीय समझदारी और धोखाधड़ी की रोकथाम पर हरियाणा सरकार के वित्त विभाग के दिशा-निर्देशों का जमकर उल्लंघन किया गया. इन खातों के जरिए धनराशि को धोखाधड़ी के कई तरीकों से हड़प लिया गया और उन तीसरी पार्टियों के खाते में भेज दिया गया जिनका सरकारी विभाग से कोई संबंध नहीं था.”
CBI का आरोप है कि ट्रांसफर की गई रकम को कई बैंक अकाउंट्स के जरिए लगातार घुमाया गया और फिर कैश में तब्दील कर दिया गया. इस आरोपियों ने सरकारी विभाग को नुकसान पहुंचाया और गलत तरीके से खुद को फायदा पहुंचाया.
घोटाले की जानकारी देते हुए एजेंसी ने बताया, “राज्य सरकार के 8 विभागों और संगठनों जिसमें पंचायत विभाग, पंचकूला और कालका नगर निगम, हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद, हरियाणा श्रम कल्याण बोर्ड, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड और हरियाणा पावर जनरेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड के कामकाज पर खासा असर पड़ा.” इस धोखाधड़ी की कुल रकम 504 करोड़ रुपये है.
तीसरी चार्जशीट के साथ 37 आरोपी
CBI इस मामले में पहले ही 18 अन्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, जिनमें 2 बैंकों के अधिकारी, राज्य सरकार के सरकारी कर्मचारी, प्राइवेट व्यक्ति और कई प्राइवेट कंपनियां शामिल भी हैं. अब तीसरी चार्जशीट दाखिल की गई है. प्रवक्ता ने बताया, “नई चार्जशीट के दाखिल होने के साथ ही, इस मामले में अब तक चार्जशीट किए गए लोगों की कुल संख्या 37 हो गई है. CBI ने इस केस में 54 जगहों पर तलाशी ली है और करीब 20 करोड़ की कीमत के सोने सहित कई अहम सबूत जब्त किए हैं, साथ ही अब तक 26 आरोपियों को गिरफ्तार भी किया जा चुका है.”
मामले से जुड़े अन्य जांच को लेकर CBI ने बताया कि उसने चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड (CSCL) और चंडीगढ़ नगर निगम से जुड़े 2 अन्य मामलों, और चंडीगढ़ रिन्यूएबल एनर्जी एंड साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रमोशन सोसाइटी (CREST) से जुड़े एक मामले की भी जांच अपने हाथ में ले ली है. चंडीगढ़ से जुड़े 2 अन्य केस की जांच भी सीबीआई के पास है और दोनों में चार्जशीट भी दाखिल हो चुकी है. एजेंसी जांच के दौरान अन्य संदिग्धों और आरोपियों की भूमिका की भी जांच कर रही है.







