प्रकाश मेहरा
एक्जीक्यूटिव एडिटर
प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने नोएडा में अप्रैल 2026 में हुए श्रमिकों के विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामले में दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा और श्रमिक अधिकार कार्यकर्ता आकृति चौधरी की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत रद्द कर दी है।
जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की पीठ ने आकृति चौधरी की ओर से दाखिल बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को मंजूर करते हुए उनकी हिरासत को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने कहा कि हिरासत की कार्रवाई राज्य की ओर से पेश की गई ‘मनगढ़ंत कहानी’ पर आधारित थी।
अदालत ने निर्देश दिया कि यदि आकृति चौधरी किसी अन्य मामले में वांछित नहीं हैं, तो उन्हें तत्काल रिहा किया जाए। हालांकि, कोर्ट के विस्तृत आदेश की प्रति अभी सामने आना बाकी है।
क्या है पूरा मामला ?
13 अप्रैल 2026 को नोएडा में श्रमिकों का प्रदर्शन हुआ था, जो बाद में हिंसक हो गया। इस मामले में पुलिस ने कई श्रमिक अधिकार कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया था। इनमें 25 वर्षीय आकृति चौधरी भी शामिल थीं, जो दिल्ली विश्वविद्यालय में इतिहास की छात्रा हैं।
बाद में उत्तर प्रदेश पुलिस ने इस मामले में दो लोगों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाया। इनमें आकृति चौधरी के अलावा अनुवादक और लेखक सत्यम वर्मा भी शामिल हैं।
सरकार के आरोपों पर कोर्ट ने उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार ने अदालत को बताया कि आकृति चौधरी को 12 अप्रैल 2026 को सुबह 10:56 बजे गिरफ्तार किया गया था और उन्हें BNSS की धारा 130 के तहत नोटिस जारी किया गया था। सरकार का आरोप था कि उन्होंने प्रदर्शनकारियों को आगजनी और पथराव के लिए उकसाया।
हालांकि, आकृति की कथित भूमिका को लेकर सरकार के दावों पर कोर्ट ने सवाल उठाए। सरकार की ओर से कहा गया कि लोग 11 अप्रैल को प्रदर्शन के लिए एकत्र हुए थे।
इस पर अदालत ने टिप्पणी की कि 11 अप्रैल को कोई हिंसा नहीं हुई थी और जिस हिंसा का जिक्र किया जा रहा है, वह आकृति चौधरी की गिरफ्तारी के बाद हुई।
कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद आकृति चौधरी की NSA हिरासत पर सवाल और गंभीर हो गए। अदालत ने अंततः उनकी हिरासत को रद्द करते हुए, किसी अन्य मामले में गिरफ्तारी आवश्यक न होने की स्थिति में तत्काल रिहाई का आदेश दिया।






